
एमपीएससी के खिलाफ उम्मीदवारों का प्रदर्शन जारी
रोहित पवार ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया
मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र पुणे की सड़कों पर उतरेंगे
राहुल गांधी 7 या 8 अक्टूबर को पुणे पहुंच सकते हैं
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। इस बीच एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है। पवार ने कहा कि अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं होने पर हजारों छात्रों के साथ पुणे की सड़कों पर उतरेंगे।
अभ्यर्थियों की मांगों में हाल ही में हुए पेपर लीक और पारदर्शिता की कमी के कारण एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमन्वार को तुरंत पद से हटाना भी शामिल है। रोहित पवार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, तो 1,00,000 से अधिक छात्र पुणे की सड़कों पर उतर आएंगे। प्रदर्शनकारी या तो पूरी तरह से पुणे बंद करवाएंगे या फिर सीधे मुंबई में मंत्रालय तक एक बड़ा मार्च निकालेंगे।
विरोध प्रदर्शन के पहले दिन से ही उम्मीदवारों के साथ मौजूद रोहित पवार ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों से मिलने की उम्मीद है। उस समय पुणे की सड़कों पर हजारों उम्मीदवारों की भारी भीड़ अपनी ताकत दिखाएगी। उन्होंने कहा, "बाद पुणे शहर ठप हो सकता है। अब एमपीएससी के उम्मदीदवार और उनके माता-पिता ही फैसला करेंगे। उस समय पुणे के निवासियों को इन छात्रों का समर्थन करना चाहिए।
रोहित पवार ने कहा कि राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को आने की संभावना है। हमारा अनुमान है कि उस दिन पुणे की सड़कों पर लगभग 1,00,000 छात्र होंगे। ये छात्र या तो पुणे बंद का आह्वान करेंगे या सीधे मुंबई में मंत्रालय तक मार्च करेंगे। हम सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दे रहे हैं।" पवार ने कहा कि इस आंदोलन की मुख्य वजह परीक्षा बोर्ड में फैला व्यवस्थित भ्रष्टाचार है। उन्होंने एमपीएससी के चेयरमैन विवेक भीमन्वार के तुरंत इस्तीफे की मांग की और कमीशन की भर्ती प्रक्रियाओं की पूरी तरह से ऑडिट और सफाई करने की बात कही।
वहीं, बीजेपी नेता और राज्य मंत्री नितेश राणे के बयानों को रोहित पवार ने ध्यान भटकाने की कोशिश बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के खिलाफ बढ़ते जन-आक्रोश से मंत्री घबराए हुए लग रहे हैं। रोहित पवार ने कहा, "मुझे कैबिनेट में जगह देने के बजाय, उन्हें छात्रों के साथ बैठकर उनके मुद्दों का समाधान करना चाहिए। अगर वे हमें सरकार में देखते हैं, तो उन्हें हिम्मत दिखानी चाहिए और अभी विपक्ष में बैठना चाहिए। जब हमारी सरकार आएगी, तब हम मिलकर काम कर सकते हैं।"