
नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। पुणे की सेशंस कोर्ट ने 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दाभोलकर की हत्या का दोषी ठहराया था और दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट से सचिन अंदुरे को भी राहत मिल गई है।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। घटना के दौरान मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मारी थी।
2014 में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी ने सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को हत्या का आरोपी बनाया। बाद में विशेष अदालत ने 2024 में दोनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
इस मामले में सचिन अंदुरे से पहले शरद कलस्कर को भी बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अदालत ने 29 अप्रैल को कलस्कर को जमानत देते हुए हमलावर के तौर पर उनकी पहचान को लेकर संदेह जताया था। कलस्कर को पिछले साल गोविंद पंसारे की हत्या के मामले में भी जमानत मिल चुकी है।
कलस्कर की याचिका पर जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने उनकी रिहाई का आदेश दिया था। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने को कहा था। सीबीआई ने जमानत आदेश पर चार सप्ताह तक रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि जब वह पहले ही कलस्कर की हमलावर के रूप में पहचान पर संदेह जता चुकी है, तो जमानत आदेश पर रोक लगाने का सवाल नहीं उठता। अब सचिन अंदुरे को जमानत मिलने के बाद इस मामले में 2024 में उम्रकैद की सजा पाए दोनों दोषियों को हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है।
नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र में अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी और लंबे समय तक अंधविश्वास के खिलाफ काम किया। 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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