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चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मिला मलबा, NASA ने क्रैश साइट से 750 मीटर दूर 3 टुकड़े मिलने का किया दावा

नासा के मुताबिक, चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा उसके क्रैश साइट से 750 मीटर दूर मिला। मलबे के तीन टुकड़े भी मिले हैं। नासा ने रात करीब 1:30 बजे विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की।

फोटो: NASA
फोटो: NASA 

अंतरिक्ष में रुचि लेने वाले एक भारतीय द्वारा अमेरिका के ऑर्बिटिंग कैमरा से चंद्रमा की तस्वीरों का निरीक्षण करने के बाद नासा ने कहा कि उसे भारतीय चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर का दुर्घटनास्थल और मलबा मिला है।

Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST

इस जगह का पता शनमुगा सुब्रमण्यम ने पता लगाया, जिन्होंने खुद लूनर रिकनाइसांस ऑर्बिटल कैमरा (एलआरओसी) से तस्वीरें डाउनलोड कीं। इसकी पुष्टि नासा और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने सोमवार को की। नासा ने कहा कि पहली धुंधली तस्वीर दुर्घटनास्थल की हो सकती है जो एलआरओसी द्वारा 17 सितंबर को ली गई तस्वीरों से बनाई गई है। कई लोगों ने विक्रम के बारे में जानने के लिए इस तस्वीर को डाउनलोड किया।

Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST

नासा ने कहा कि उनमें से एक सुब्रमण्यम ने मलबे की सकारात्मक पहचान के साथ एलआरओसी प्रोजेक्ट से संपर्क किया। एलआरओसी एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) में स्थित है। एएसयू ने कहा, "यह जानकारी मिलने के बाद एलआरओसी टीम ने पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर पहचान की पुष्टि कर दी।"

Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST

यूनिवर्सिटी ने कहा कि जब पहले मोजाइक के लिए 17 सितंबर को तस्वीरें ली गईं, तो दुर्घटनास्थल बहुत धुंधला दिख रहा था और आसानी से इसे पहचाना नहीं जा सकता था। लेकिन 14-15 अक्टूबर को और 11 नवंबर को ली गई तस्वीरों के दो क्रम बेहतर थे।

यूनिवर्सिटी ने कहा कि सुब्रमण्यम द्वारा दी गई सूचना पर एलआरओसी टीम ने नए मोजाइक्स में आसपास के क्षेत्र की तलाशी ली और दुर्घटनास्थल तथा मलवे का स्थान देख लिया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि दुर्घटनास्थल 70.8810 डिग्री एस, 22.7840 डिग्री ई, 834 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।

Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST

एएसयू ने कहा, "शनमुगा ने सबसे पहले मलबा मुख्य दुर्घटनास्थल से 750 मीटर उत्तर-पश्चिम में देखा।"

6 सितंबर को चंद्रयान-2 से लॉन्चिंग के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्टलैंडिंग करने के प्रयास के दौरान लैंडर विक्रम का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से संपर्क टूट गया था।

Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST

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Published: 03 Dec 2019, 9:33 AM IST