
देश की आर्थिक स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि एक तरफ विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार से उठ चुका है, वहीं खराब आर्थिक नीतियों के चलते अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि, "दुनिया की टॉप 100 कंपनियों में अब भारत की एक भी कंपनी नहीं है। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का भरोसा उठ चुका है। बड़े विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा खींच रहे हैं।" कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार पर इन निवेशकों को भरोसा नहीं रहा ये देश की इकॉनमी के लिए बहुत बुरी खबर है।
कांग्रेस ने आगे कहा कि, "हालात ऐसे ही रहे... तो देश में जारी बेरोजगारी महामारी का रूप ले लेगी, कंपनियां घाटे में जाएंगी, नौकरियां कम होंगी और लोगों के पास काम नहीं रहेगा। नरेंद्र मोदी को समझना होगा कि देश टॉफी बांटने से नहीं- बेहतर आर्थिक और विदेश नीतियों से चलता है। अगर समय रहते नरेंद्र मोदी ने कदम उठाए होते, तो आज देश को ये दिन न देखना पड़ता। नरेंद्र मोदी ने भारत और भारत की अर्थव्यवस्था का बहुत नुकसान कर दिया है।"
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इसी मुद्दे को समाजवादी पार्टी ने भी उठाया है। पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि, "ये है भाजपा की भ्रष्टाचारी आर्थिक नीतियों का दुष्प्रभाव। भाजपा की कमीशनख़ोरी ने हर कंपनी को कमज़ोर किया है, जिसकी वजह से कच्चे माल से लेकर तैयार माल तक कृषि और औद्योगिक उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, इससे भारत की मैन्यूफ़ैक्चरिंग, शेयर-बुलियन मार्केट, बैंक, बीमा, मार्केटिंग, मैनेजमेंट, IT-सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन, MSME, FMCG, टेक्सटाइल्स, हेल्थकेयर, लाइफ़स्टाइल, कम्युनिकेशन, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर सब बर्बादी की कगार पर आकर खड़े हो गये हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि, "देशी कंपनियों द्वारा भाजपा को एकमुश्त कमीशन देने की गुप्त योजना के कारण ही छोटे दुकानदार मारे गये हैं। इधर सुनार मारे जा रहे हैं तो ऑनलाइन की मार से मेडिकल शॉप्स और किराने की दुकान तक बंद होनी शुरू हो चुकी हैं। इन सबकी केवल एक वजह है और वह है भाजपा की भ्रष्टाचारी नीतियाँ। भाजपा की कमीशनख़ोरी से ही महंगाई बढ़ी, जिससे बाज़ार में मांग घटी और मंदी का दौर आया, इससे उत्पादन घटा, लोगों की छँटनी हुई और पिछसे दस सालों में बढ़ी बेतहाशा बेरोज़गारी बेलगाम हो गयी।"
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अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी नौकरियाँ दी नहीं गईं, इससे कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। रूपया डॉलर के मुक़ाबले पाताल की ओर चल पड़ा। निर्यात को गलत विदेश नीति की वजह से ज़बरदस्त नुक़सान हुआ और आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा बची नहीं। गैस की क़िल्लत और महंगाई व पेट्रोल-डीज़ल के लगातार बढ़ते दामों ने हर वस्तु-सेवा महंगी कर दी। अफ़सरशाही और जीएसटी के भ्रष्टाचार ने रही सही कसर पूरी कर दी है। भाजपा सरकार दूसरों को संयम बरतने का प्रवचन देकर विदेशभ्रमण पर निकल गई है।
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