कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को दावा किया कि अमेरिका में पेगासस स्पाइवेयर जासूसी मामले में आए फैसले से साबित हो गया है कि किस तरह भारतीयों के 300 व्हाट्सऐप नंबरों को निशाना बनाया गया। उन्होंने सवाल किया कि अब इस फैसले के मद्देनजर क्या सुप्रीम कोर्ट आगे की जांच कराएगा। सुरजेवाला ने एक खबर साझा की, जिसमें कहा गया कि पहली बार अमेरिका की एक अदालत ने इजरायल के एनएसओ समूह को सेंधमारी करने वाले उसके स्पाइवेयर पेगासस के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
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रणदीप सुरजेवाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पेगासस स्पाइवेयर मामले का फैसला साबित करता है कि कैसे अवैध स्पाइवेयर रैकेट में भारतीयों के 300 व्हाट्सऐप नंबरों को निशाना बनाया गया था।’’ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जवाब दे कि जिन 300 नामों को निशाना बनाया गया, वे कौन थे।
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कांग्रेस नेता ने पूछा, ‘‘दो केंद्रीय मंत्री कौन हैं? तीन विपक्षी नेता कौन हैं? संवैधानिक अधिकारी कौन हैं? पत्रकार कौन हैं? व्यवसायी कौन हैं? बीजेपी सरकार और एजेंसियों ने कौन सी जानकारी हासिल की? इसका किस तरह से इस्तेमाल किया गया, दुरुपयोग किया गया और इसका क्या नतीजा निकला?’’ उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या अब मौजूदा सरकार के नेताओं या अधिकारियों, एनएसओ के स्वामित्व वाली कंपनी के खिलाफ उचित आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
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सुरजेवाला ने कहा, ‘‘क्या उच्चतम न्यायालय मेटा बनाम एनएसओ मामले में अमेरिकी अदालत के फैसले पर ध्यान देगा? क्या उच्चतम न्यायालय 2021-22 में पेगासस स्पाइवेयर पर तकनीकी विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगा?’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या शीर्ष कोर्ट भारत के 300 सहित 1,400 व्हाट्सऐप नंबरों को लक्षित करने के निर्णय की पुष्टि के मद्देनजर अब आगे की जांच कराएगा।
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उन्होंने पूछा, ‘‘क्या उच्चतम न्यायालय अब मेटा से पेगासस मामले में न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए 300 नाम प्रस्तुत करने के लिए कहेगा?’’ कांग्रेस नेता ने पूछा, ‘‘क्या फेसबुक (अब मेटा) को अब पेगासस द्वारा लक्षित 300 भारतीयों के नाम जारी करने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए, यह देखते हुए कि व्हाट्सऐप और फेसबुक का भारत में सबसे बड़ा ग्राहक आधार है और उनका भारत में अपने ग्राहकों के प्रति ‘देखरेख और प्रकटीकरण का कर्तव्य’ है?’’
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