
वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद साल की दूसरी तिमाही में भारत का जीडीपी दर 8.2 प्रतिशत रहा। इस पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी इसको लेकर पीठ थपथपा रही है। दूसरी ओर विपक्ष ने आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठाया।
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सीपीएम प्रवक्ता चिगुरुपति बाबू राव ने कहा, "8.2 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में फाइनेंस मिनिस्टर की बातें सच नहीं हैं, वे झूठी हैं। जो आंकड़े दिखाए जा रहे हैं, वे असली स्थिति को नहीं दिखाते हैं। हमारे देश में, मार्केट का दबाव बढ़ रहा है और छोटे और मीडियम साइज के उद्योगों को बंद होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।"
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कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, "आपको पूरे साल की जीडीपी दिखानी चाहिए, इसे तिमाही दर तिमाही देखने का क्या फायदा है? और अगर जीडीपी बढ़ रही है, तो युवा अभी भी बेरोजगार क्यों हैं? आज भी एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच का अंतर साफ दिख रहा है। आप बस हर चीज का प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया हर दिन गिरता जा रहा है।"
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इससे पहले जयराम रमेश ने जीडीपी के ताजा आंकड़ों को लेकर ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, 'यह विडंबना है कि विकास दर के तिमाही आंकड़े उस वक्त जारी किए गए जब आईएमएफ की रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के वार्षिक मूल्यांकन में भारत के राष्ट्रीय खातों के आंकड़ों को ‘सी’ श्रेणी में रखा है जो दूसरी सबसे निचली श्रेणी में हैं। आंकड़ों की स्थिति निराशाजनक बनी हुई है।'
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दरअसल, जीडीपी के शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी जो पिछली छह तिमाहियों में सर्वाधिक है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.6 फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 7.8 फीसदी थी।
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