
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ होंगे। बुधवार को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद उनकी नियुक्ति का ऐलान किया गया। जीतेंद्र मिश्रा का चयन उन 5,585 अभ्यर्थियों में से किया गया है जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए आवेदन किया था। ट्रस्ट के लिए सीईओ नियुक्त करने का फैसला मंदिर में चढ़ावे और चंदा चोरी का खुलासा होने के बाद किया गया। मंदिर की व्यवस्था एक प्राइवेट ट्रस्ट करता है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद चुना था। प्राइवेट ट्रस्ट को उन नियमों का पालन नहीं करना होता जो सार्वजनिक ट्रस्ट के लिए जरूरी होते हैं जिनमें ऑडिट किए गए खातों को सार्वजनिक करना होता है और इनकी जांच सरकार करती है।
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा करीब 38 साल तक वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं और इसी साल अप्रैल में सेवानिवृत्त हुए हैं। बीते साल 2025 में मई में जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ था तो वे वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से आने वाले मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उनकी नियुक्ति को उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में यूपी के ब्राह्मणों ने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों से कई मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई है।
उनकी नियुक्ति के पीछे एक और अहम बात उनकी राष्ट्रवादी पहचान और सैन्य पृष्ठभूमि है। इस बाबत अयोध्या के एक पत्रकार का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक की अगुवाई करने की वजह से उनकी छवि और भी चमकी थी। इस पत्रकार ने इस बारे में गुरुवार को फोन पर ज़ोर-ज़ोर से हंसते हुए 'नेशनल हेराल्ड' से कहा, "हमें भले ही लगे कि हम होशियार हैं, लेकिन असलियत यह है कि प्रधानमंत्री हमसे ज़्यादा होशियार हैं।" उन्होंने समझाया कि किसी की भी हिम्मत नहीं होगी कि वह युद्ध में बहादुरी दिखाने वाले किसी अनुभवी सैनिक पर उंगली उठाए; और अगर ट्रस्ट चीज़ों को ठीक से मैनेज नहीं भी कर पाता है, तो भी विपक्ष के लिए खराब कामकाज की आलोचना करना मुश्किल होगा, क्योंकि उन पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के नायकों में से एक को बदनाम करने का आरोप लग सकता है।
एयर मार्शल मिश्रा (रिटायर्ड) के चयन का फ़ैसला शायद इसकी घोषणा से कई हफ़्ते पहले ही कर लिया गया था। अगस्त 2026 में न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी भूमिका पर डेढ़ घंटे से ज़्यादा समय तक उनका इंटरव्यू लेने के फ़ैसले की और कोई वजह समझ नहीं आती। इस लंबे इंटरव्यू में एयर मार्शल को भारतीय वायु सेना की उपलब्धियों का बखान करने और डींगें मारने का मौका मिला था। उन्होंने कई बड़ी-बड़ी बातें कहीं, जिनमें से एक यह थी कि भारतीयों द्वारा उड़ाए जाने वाले चौथी पीढ़ी के राफ़ेल फ़ाइटर जेट दुश्मन के छठी पीढ़ी के फ़ाइटर प्लेन का मुक़ाबला कर सकते हैं।
इससे भी अहम बात यह है कि एयर मार्शल ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ़ की थी। उन्होंने कहा था कि सेना को पूरी ऑपरेशनल आज़ादी दी गई थी और प्रधानमंत्री का समर्थन भी भरपूर था। इंटरव्यू के दौरान, रिटायर हो चुके एयर फ़ोर्स अफ़सर ने बताया कि जब प्रधानमंत्री वेस्टर्न कमांड के दौरे पर आए थे, तो उन्होंने मोदी के साथ ही गाड़ी में बैठने की इजाज़त मांगी थी। काफ़ी भावुक दिख रहे पूर्व एयर मार्शल ने याद करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने तुरंत कहा था, 'क्यों नहीं?'
उन्होंने बताया कि अगले 90 मिनट तक उन्हें प्रधानमंत्री को सुनने का सौभाग्य मिला। उन्होंने माना कि यह उनके लिए जीवन भर याद रहने वाला अनुभव था और कहा कि वे भारतीय वायु सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों के सिस्टम के बारे में प्रधानमंत्री की जानकारी देखकर हैरान रह गए। वे आधुनिक युद्ध और हवाई लड़ाई के बारे में प्रधानमंत्री की समझ देखकर चकित रह गए। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही प्रभावशाली था।
हालांकि इस इंटरव्यू का इस्तेमाल पूर्व एयर फ़ोर्स कमांडर के युद्ध के रिकॉर्ड को सामने रखने के लिए किया गया, लेकिन रिटायर्ड अफ़सर यह दिखाने की बहुत कोशिश करते दिखे कि उनके और पीएम मोदी के बीच काफ़ी करीबी बातचीत रही थी।
उत्तर प्रदेश के जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री उस कमांडर से प्रभावित हुए हों और उन्होंने उन्हें सीईओ के पद के लिए आवेदन करने की सलाह दी हो। दूसरी ओर, उनका यह भी कहना है कि यह भी मुमकिन है कि प्रधानमंत्री को एयर मार्शल में एक ऐसा 'भक्त' दिखा हो जो अयोध्या में उनके हर फैसले पर हामी भरने वाला (यानी 'यस मैन') साबित हो। प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के रूप में, मोदी के पास ट्रस्ट में पहले से ही एक 'यस मैन' मौजूद था। एयर मार्शल मिश्रा के आने से, उन्हें ट्रस्ट में एक और ऐसा व्यक्ति मिल जाता जो उनका भरोसेमंद होता।
सूत्रों ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि ट्रस्ट की शर्त थी कि मंदिर ट्रस्ट के सीईओ को धार्मिक ग्रंथों या महाकाव्यों की जानकारी होनी चाहिए। सीईओ के लिए एकमात्र शर्त यह थी कि वह एक आस्थावान हिंदू हो और उसके पास 20 साल का प्रशासनिक और प्रबंधकीय अनुभव हो। हालांकि, उन्होंने माना कि एयर मार्शल के पास पिछले 20 वर्षों का आवश्यक अनुभव नहीं दिखता है। उन्होंने बताया कि कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और कॉर्पोरेट पृष्ठभूमि वाले लोगों ने भी आवेदन किया था। उनमें से कई के पास एयर मार्शल की तुलना में अधिक प्रशासनिक अनुभव हो सकता है। आवेदकों में कई ब्राह्मण भी थे और वे भी उतने ही योग्य थे, या शायद उससे भी अधिक।
ऐसा लगता है कि इस चयन में प्रधानमंत्री की मंज़ूरी ने निर्णायक भूमिका निभाई। राम मंदिर पर नज़र रखने वालों का कहना है कि एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री की ही पसंद हैं।
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