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अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर ट्रंप की भाषा बोल रहे हैं पीएम मोदी, सब दोस्त को खुश करने के लिए कर रहे हैं: कांग्रेस

जयराम रमेश ने कहा कि उनका कहना है कि जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारत को काफी फायदा हुआ है, वे अप्रासंगिक हो गए हैं। वास्तव में, यह ट्रंप हैं जो उन्हें अप्रासंगिक बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और अब मोदी अपने अच्छे दोस्त के सुर में सुर मिला रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर ट्रंप की भाषा बोल रहे हैं पीएम मोदी, सब दोस्त को खुश करने के लिए कर रहे हैं: कांग्रेस
अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर ट्रंप की भाषा बोल रहे हैं पीएम मोदी, सब दोस्त को खुश करने के लिए कर रहे हैं: कांग्रेस फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पॉडकास्ट साक्षात्कार को लेकर सोमवार को उन पर निशाना साधा और कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश रखने के लिए कुछ भी कर रहे हैं। रमेश ने कहा कि वैश्विक संगठनों को अप्रासंगिक बताने के मामले में वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर में सुर मिला रहे हैं। पीएम मोदी ने अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन को दिए साक्षात्कार में व्यक्तिगत, राजनीतिक और अतंरराष्ट्रीय बिंदुओं पर मुद्दों पर कई दावे किए थे।

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी स्पष्ट रूप से ट्रंप को खुश रखने के लिए कुछ भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारत को काफी फायदा हुआ है, वे अप्रासंगिक हो गए हैं। यह तो अमेरिकी राष्ट्रपति की भाषा है।" उन्होंने दावा किया कि वास्तव में, यह ट्रंप ही हैं जो उन्हें अप्रासंगिक बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और अब प्रधानमंत्री मोदी 'अपने अच्छे दोस्त' के सुर में सुर मिला रहे हैं।

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जयराम रमेश ने सवाल किया, "क्या डब्ल्यूएचओ भारत के लिए अच्छा नहीं है? क्या डब्ल्यूटीओ भारत के लिए अच्छा नहीं है? क्या जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता भारत के लिए अच्छा नहीं है? क्या संयुक्त राष्ट्र ने अपनी तमाम कमजोरियों के बावजूद भारतीय शांति सैनिकों को विदेशों में अवसर उपलब्ध नहीं कराये हैं?" उन्होंने कहा, "बहुपक्षवाद में सुधारों की आवश्यकता है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह से उसकी पूर्णतः निंदा कर रहे हैं उसकी जरूरत नहीं है।’’

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रमेश ने इसी पॉडकास्ट को लेकर प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया, "करीब एक साल पहले, उन्होंने खुद को "नॉन-बायोलॉजिकल" बताया था। अब वे कह रहे हैं कि वे 1+1 सिद्धांत में विश्वास करते हैं: एक मोदी और दूसरा दैवीय।" उन्होंने दावा किया कि वह ऐसी बातें तब कर रहे हैं जब अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, पड़ोसी देश अशांत हैं, और वैश्विक व्यवस्था लगातार अस्थिर होती जा रही है। रमेश ने कहा, "न्यूनतम आत्ममुग्धता, अधिकतम सुशासन का सिद्धांत होना चाहिए।"

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