
देश में सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में घपला उजागर होने के बाद बैंक की ओर से सफाई आई है। बैंक के प्रबंध निदेशक सुनील मेहता ने कहा कि धोखाधड़ी के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ अधिकारियों को इस मामले में निलंबित किया गया है और अभी जांच चल रही है। सुनील मेहता ने कहा कि यह धोखाधड़ी 2011 में शुरू हुआ था, जिसे सबसे पहले हमारे बैंक ने पकड़कर संबंधित जांच एजेंसियों को बताया था। उन्होंने कहा, “पीएनबी अपनी क्लीन बैंकिंग के लिए मशहूर है, जैसे ही हमें इस घोटाले के बारे में पता चला, हमने इसकी जांच की।”
पीएनबी की मुंबई स्थित एक शाखा से अवैध तरीके से 11,515 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आने के बाद सुनील मेहता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक किसी भी समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से लेटर्स ऑफ अंडरटेंकिंग (एलओयू) जारी कर घपला किया गया और कोई ट्रांजैक्शन केंद्रीकृत बैंकिग प्रणाली से नहीं हुआ। इसमें बैंक के जूनियर अफसर शामिल हैं। धोखाधड़ी के इस मामले में विदेसी करेंसी खाते में पैसे भेजे गए थे।
उन्होंने कहा कि दोषी कोई भी हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। बैंक पूरी क्षमता के साथ कार्रवाई करने में सक्षम है। ग्राहकों की विश्वास बहाली के लिए मेहता ने कहा कि पीएनबी स्वच्छ बैंकिंग के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले बुधवार यानी 14 फरवरी को बैंक ने बताया था, “मामले की जांच का जिम्मा पहले ही एजेंसियों को सौंप दिया गया है।”
इस बीच आरबीआई ने पीएनबी को ताकीद की है कि वह अपने लेनदारों को जल्द से जल्द पैसे चुकाए।
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