
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के मौके पर जहां लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। वहीं इस पावन मौके पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के स्नान से खुद को अलग कर लिया और अपनी पालकी को बीच रास्ते से ही अखाड़े में वापस लौटा दिया।
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जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ अखाड़े से संगम नोज की ओर रवाना हुए थे। इसी दौरान रास्ते में उनके शिष्यों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई। बताया जाता है कि इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, जिससे मामला बढ़ गया।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके शिष्यों के साथ मारपीट की जा रही है और अधिकारी मारने का इशारा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी स्थिति में वे संगम स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि जब शिष्यों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है, तो स्नान का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। रात 12 बजे के बाद से ही श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ने लगे थे। प्रशासन के अनुसार, स्नान के लिए आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और हालात को देखते हुए भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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संगम नोज और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मी सीटी बजाकर श्रद्धालुओं को एक जगह रुकने नहीं दे रहे हैं और स्नान के बाद उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि किसी तरह की भगदड़ की स्थिति न बने।
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प्रशासन ने मौनी अमावस्या के दौरान तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है। इसी को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्नान घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी पीएसी और प्रशिक्षित गोताखोरों को तैनात किया गया है।
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पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, पूरे माघ मेले की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है। कंट्रोल रूम से लेकर संगम नोज तक रातभर पेट्रोलिंग की जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
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मेले की सुरक्षा में पुलिस और पीएसी के अलावा आरएएफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो और खुफिया एजेंसियों को भी लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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एक ओर जहां संगम नगरी में श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर है, वहीं दूसरी ओर भीड़ और व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा स्नान से पीछे हटने की घटना ने माघ मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
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