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'राष्ट्रीय सुरक्षा पर नेता प्रतिपक्ष की बात नहीं सुनना चाहते थे प्रधानमंत्री मोदी', कांग्रेस का सरकार पर हमला

जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार की ‘मन की बात’ वाली सोच है। ‘मन की बात’ रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब देते हैं।’’

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: Getty Images) Sonu Mehta

कांग्रेस ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि चार दिनों तक निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने नहीं दिया गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उनकी बात सुनना नहीं चाहते थे।

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पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि विपक्ष में रहते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 10 जून, 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सदन में बोलने से रोका गया था, जबकि उस वक्त राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा पूरी हुई थी।

लोकसभा ने बृहस्पतिवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

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प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का प्रधानमंत्री द्वारा सदन में जवाब देने की परंपरा है, लेकिन गतिरोध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जवाब लोकसभा में नहीं हुआ और प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।

रमेश ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा में बोलने से चार दिनों तक रोका गया। वह राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति को लेकर कुछ बुनियादी बात करने वाले थे, लेकिन उन्हें जनाबूझकर रोक दिया गया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ये बातें सुनना नहीं चाहते थे।’’

उनका कहना था, ‘‘राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने का विषय उच्च सदन में उठाया और कहा कि संसद के दो स्तंभ होते हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। जब एक स्तंभ पर आक्रमण होता है दूसरा स्तंभ भी कमजोर होता है।’’

रमेश ने कहा कि इस विषय पर विपक्षी दल एकजुट हैं और उन्होंने राज्यसभा से बहिर्गमन किया।

लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक और आसन की अवमानना के मामले में वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘सदन में दो आवाजें हैं, एक आवाज सत्तापक्ष की और दूसरी विपक्ष की है। लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष की आवाज को मौका मिले।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार की ‘मन की बात’ वाली सोच है। ‘मन की बात’ रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब देते हैं।’’

टैगोर ने कहा कि यह पहली बार है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया गया और प्रधानमंत्री भी नहीं बोले, जो लोकतंत्र के लिए दुखद है।

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उनका कहना था, ‘‘राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने का विषय उच्च सदन में उठाया और कहा कि संसद के दो स्तंभ होते हैं, एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा। जब एक स्तंभ पर आक्रमण होता है दूसरा स्तंभ भी कमजोर होता है।’’

रमेश ने कहा कि इस विषय पर विपक्षी दल एकजुट हैं और उन्होंने राज्यसभा से बहिर्गमन किया।

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लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक और आसन की अवमानना के मामले में वर्तमान बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘सदन में दो आवाजें हैं, एक आवाज सत्तापक्ष की और दूसरी विपक्ष की है। लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष की आवाज को मौका मिले।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह सरकार की ‘मन की बात’ वाली सोच है। ‘मन की बात’ रेडियो पर हो सकती है, लेकिन संसद ‘मन की बात’ के लिए नहीं है। संसद में विपक्ष के नेता बोलते हैं और फिर प्रधानमंत्री जवाब देते हैं।’’

टैगोर ने कहा कि यह पहली बार है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया गया और प्रधानमंत्री भी नहीं बोले, जो लोकतंत्र के लिए दुखद है।

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