
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में हुई अचानक मौत से पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस दुखद घटना ने न सिर्फ उनके परिवार और समर्थकों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चिंता और सवालों की लहर दौड़ा दी है। उनके निधन पर नेताओं ने शोक व्यक्त करने के साथ ही हादसे की जांच की भी मांग शुरू कर दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि अजित पवार का देहांत प्रीमेच्योर यानी समय से पहले हुआ और यह उन लोगों के लिए एक बड़ा आघात है जो उनके साथ काम करते थे। खड़गे ने कहा कि उनके परिवार वालों को यह दुख सहन करने की शक्ति मिले, यही हम सभी प्रार्थना कर सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हादसे की जांच होना जरूरी है क्योंकि यह एक अननैचुरल एक्सीडेंट है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने छोटे प्लेन में ऐसा हादसा क्यों हुआ, जबकि सुरक्षा के लिहाज से ये ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अजित पवार की मौत पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। ममता ने कहा कि अजित पवार अपने पुराने खेमे में लौटने वाले थे और इससे पहले यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि आज सुबह प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत की खबर सुनकर मुझे गहरा सदमा लगा है। इस देश में आम लोगों की तो बात ही छोड़िए, राजनेता भी सुरक्षित नहीं हैं। दो दिन पहले मुझे पता चला था कि किसी दूसरी पार्टी के किसी व्यक्ति ने बयान दिया था कि पवार बीजेपी का साथ छोड़ने को तैयार थे और अब आज यह हो गया। ममता बनर्जी ने कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में सही जांच की मांग करती हूं। हमें सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, किसी और एजेंसी पर नहीं। सभी एजेंसियां पूरी तरह से बिक चुकी हैं। यह सच में बहुत बड़ा नुकसान है। आज वह विपक्ष में थे, लेकिन कल वह अपनी पार्टी के असली रास्ते पर लौटने वाले थे। मैं उनके परिवार, महाराष्ट्र के लोगों और शरद पवार के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूं।”
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में हुई मौत पर निजी विमान सेवाओं की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। पृथ्वीराज चव्हाण ने निजी विमान सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई बार निजी कंपनियों के विमान पुराने होते हैं और उनका रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता। डीजीसीए को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि हादसे की असली वजह क्या थी। तकनीकी खराबी, उपकरण की विफलता, पायलट की गलती, या कोई और कारण।उन्होंने सरकार से अपील की कि निजी विमान कंपनियों को लाइसेंस देते समय और भी सख्ती बरती जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इस तरह की घटनाएं लगातार क्यों हो रही हैं, यह चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस मामले पर गहन ध्यान देना चाहिए और जांच कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा और जीवन से जुड़ा मामला है।
पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि अजित पवार देश के बड़े नेताओं में से एक थे और महाराष्ट्र की राजनीति में उनका योगदान अमूल्य था। उन्होंने कहा कि इस दुख में समाजवादी पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस हादसे में किसी तरह की साजिश हुई हो तो जांच कर उसे सामने लाया जाना चाहिए। अगर ऐसा कुछ नहीं पाया गया तो इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण एक्सीडेंट ही माना जाएगा।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर प्लेन क्रैश के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हादसे में क्या हुआ, यह तुरंत कहना मुश्किल है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कोई टेक्निकल खराबी थी, खराब मौसम का असर था या कोई और वजह थी। उन्होंने कहा कि मौत तो मौत होती है और इसे केवल भगवान ही जानते हैं। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग इस विमान में इस दुनिया से चले गए, उनका वक्त यहीं खत्म हो गया।
इस बीच पूर्व एयर इंडिया पायलट और विमानन विशेषज्ञ मीनो वाडिया ने इस दुर्घटना को लेकर कई अहम बातें कहीं और लोगों से अपील की कि बिना पूरी जांच और ठोस सबूत के किसी नतीजे पर न पहुंचा जाए। मीनो वाडिया ने बताया कि अभी जो जानकारी मिल रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि पायलट ने इमरजेंसी घोषित की थी। अब सवाल यह है कि इमरजेंसी क्यों घोषित की गई? क्या इंजन में कोई खराबी थी? अगर सिर्फ एक इंजन भी फेल हुआ होता, तब भी इस तरह का हादसा होना जरूरी नहीं था, क्योंकि पायलट एक इंजन पर भी विमान को सुरक्षित उतार सकता है।" अगर यह अंडरकारेज की दिक्कत होती, तो पायलट रनवे पर ही उतरने की कोशिश करता। लेकिन यह विमान रनवे से काफी पहले या दूर गिरा है। इससे लगता है कि हादसे की वजह कुछ और हो सकती है।" उन्होंने आगे कहा कि अभी सिर्फ अंदाजे लगाए जा रहे हैं और सही वजह तभी सामने आएगी, जब जांच के दौरान ठोस सबूत मिलेंगे।
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इधर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने बारामती में विमान हादसे की जांच शुरू कर दी है। एएआईबी की टीम दिल्ली से पुणे पहुंची और बारामती जा रही है। डीजीसीए की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है। ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) समेत अन्य जानकारियों की जांच की जाएगी। हादसे का शिकार हुआ विमान लियरजेट-45 था, जिसका रजिस्ट्रेशन वीटी-एसएसके था। यह दिल्ली स्थित मेसर्स वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर (एनएसओपी) विमान था। कंपनी का एयर ऑपरेटर परमिट 2014 में जारी हुआ था और अप्रैल 2028 तक वैध है। फ्लीट में 17 विमान हैं, जिनमें लियरजेट-45, एम्ब्राएर 135बीजे, किंग एयर बी 200 और पिलाटस पी.सी-12 शामिल हैं। फरवरी 2025 में डीजीसीए के ऑडिट में कोई गंभीर कमी नहीं पाई गई थी, हालांकि 2023 में कंपनी के एक अन्य लियरजेट 45 (वीटी-डीबीएल) ने मुंबई में लैंडिंग के दौरान हादसा झेला था, जिसकी जांच जारी है।
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