
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्य पूर्व में जंग के कारण देश में ईंधन की कथित कमी का मुद्दा उठाते हुए गुरुवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और ‘एप्स्टीन फाइल’ का उल्लेख किया, जिसपर अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वह नियम के तहत ही बोल सकते हैं।बिरला ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने नोटिस में ईंधन से जुड़े मुद्दे का उल्लेख किया था और वह सिर्फ उसी पर बोल सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष को एक बार फिर बोलने से रोके जाने पर कांग्रेस सदस्यों ने जमकर विरोध किया।
इससे पहले राहुल गांधी ने देश में एलपीजी संकट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘तकलीफ की शुरुआत हुई है, रेस्तरां बंद हो रहे हैं और एलपीजी की कमी हो रही है...यह तो शुरुआत है।’’ उन्होंने कहा कि किसी भी देश की बुनियाद ऊर्जा सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को यह तय करने की इजाजत कैसे दे सकता है कि ‘‘हम रूस से तेल खरीदें या नहीं।’’
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इसके बाद, नेता प्रतिपक्ष ने एप्स्टीन फाइल का हवाला देते हुए पेट्रोलियम मंत्री पुरी का उल्लेख किया, जिस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई। इस बीच, स्पीकर बिरला ने कहा, ‘‘आपने जिस विषय पर नोटिस दिया है, उस पर बोलिए। अगर इस विषय पर बोलना है तो इसके लिए नोटिस दीजिए।’’ इसका विरोध करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने सदन में ‘‘एप्स्टीन-एप्स्टीन’’ और ‘‘मंत्री इस्तीफा दो’’ के नारे लगाए।
इसके बाद संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सदन में गैस और एलपीजी की स्थिति का मुद्दा उठाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर बोलने की अनुमति मांगने की एक प्रक्रिया होती है... मैंने गैस और एलपीजी की स्थिति के बारे में बयान देने की अनुमति मांगी थी। यह शुरुआत है। मैं इस बारे में बोलना चाहता था, लेकिन लगता है कि एक नई प्रक्रिया शुरू हो गई है- पहले मंत्री निर्णय लेंगे, फिर मैं बोलूंगा, और उसके बाद मंत्री जवाब देंगे।
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ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता पर चिंता जताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि ईंधन की आपूर्ति एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। उन्होंने कहा कि असल में मुख्य बात यह है कि गैस एक समस्या बनने वाली है। पेट्रोल एक समस्या बनने वाला है। सभी ईंधन एक समस्या होंगे। क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। गलत विदेश नीति ने यह समस्या पैदा की है। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। अगर नहीं, तो इसका असर देश के करोड़ों लोगों पर पड़ेगा।
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राहुल गांधी ने यह भी सुझाव दिया कि यह मुद्दा सिर्फ इस बात से कहीं बड़ा है कि कुछ देश ईंधन की आपूर्ति की अनुमति देते हैं या प्रतिबंधित करते हैं। यह युद्ध मूल रूप से मौजूदा विश्व व्यवस्था के बारे में है। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तन अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। राहुल गांधी ने कहा कि ईरान ईंधन की अनुमति देगा या नहीं, यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है... हम एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रहे हैं। जब आप अस्थिर दौर में प्रवेश करते हैं, तो आपको मानसिकता बदलनी पड़ती है। मैं सरकार को यही सुझाव दे रहा हूं कि वे संभावनाओं पर विचार करें और यह सुनिश्चित करें कि हमारे लोगों को कोई परेशानी न हो।
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