
राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर हमला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा। आख़िर ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति’ का भी। बीजेपी के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है।
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उन्होंने आगे कहा कि ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफ़े नहीं होते हैं। ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ से आहत जनता कटाक्ष करते हुए कह रही है कि भाजपाई कह रहे हैं कि हमने कहा था कि ‘इस्तीफ़ा’ नहीं होता, हमने इस्तीफ़ा नहीं ‘त्यागपत्र’ दिया है।
दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों’ के काले कारनामों, करतूतों और कारगुज़ारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है। बंटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली’ एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा’ लेकर इधर-उधर भागें, बार्डर बंद कर दिये जाएं। अभी तो शुरुआत है, अब तो केयर फ़ंड के साथ-साथ अनरजिस्टर्ड लोगों को अपने कुकृत्यों का हिसाब भी देना होगा। भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह’ बच नहीं पाएगा। NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफे शुरू हो गए हैं तो ‘लीकाधिपति’ का भी करवा दीजिए।
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गौरतलब है कि राम मंदिर में फंड गड़बड़ी का मामला सामने आने के कुछ दिनों बाद ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बता दें कि गुरुवार देर रात मंदिर के कर्मचारियों, नकदी गिनने वाले स्टाफ और कुछ पूर्व बैंक अधिकारियों समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि इन सभी ने आपसी मिलीभगत से मंदिर की दान राशि का गबन किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कई लोगों ने सवाल उठाए कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित क्यों रही और वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। इसके बाद ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्यों के इस्तीफे को इस मामले का बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 14 जून को श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
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