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राम मंदिर दान चोरीः सभी आरोपी 14 दिन के लिए जेल भेजे गए, पुलिस ने फिर नहीं मांगा रिमांड, उठे जांच पर सवाल

अब तक गिरफ्तार सभी आरोपी राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा रखे गए थे, लेकिन मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में सभी आरोपियों के पिता का नाम नहीं बताया गया है और पता अज्ञात के तौर पर दर्ज किया गया है। आखिर ये कैसे हो सकता है?

राम मंदिर दान चोरीः सभी आरोपी 14 दिन के लिए जेल भेजे गए, पुलिस ने फिर नहीं मांगा रिमांड, उठे जांच पर सवाल
राम मंदिर दान चोरीः सभी आरोपी 14 दिन के लिए जेल भेजे गए, पुलिस ने फिर नहीं मांगा रिमांड, उठे जांच पर सवाल फोटोः सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान चोरी के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था, तब भी पुलिस ने आरोपियों का रिमांड नहीं मांगा था।

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विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भ्रष्टाचार रोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इससे पहले, शुक्रवार को एक विशेष अदालत ने उन्हें सोमवार तक तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। उस दिन भी पुलिस ने आरोपियों का रिमांड नहीं मांगा था।

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ऐसे में इस मामले में सवाल उठने लगा है कि आखिर पुलिस आरोपियों का रिमांड क्यों नहीं ले रही है। किसी भी अपराध की स्थिति में पुलिस आरोपियों को रिमांड में लेकर पूछताछ करती है। उनकी निशानदेही पर सबूत जमा करती है। लेकिन चंदा चोरी के मामले में पुलिस का रवैया एकदम अलग है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से अब तक उन्हें रिमांड पर नहीं लिया है और न ही अदालत से उन्हें रिमांड पर देने की मांग की है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपियों के साथ पुलिस इतनी रियायत बरत रही है।

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इसके अलावा एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में अब तक गिरफ्तार सभी आरोपी राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा रखे गए थे, लेकिन मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में सभी आरोपियों के पिता का नाम नहीं बताया गया है और पता अज्ञात के तौर पर दर्ज किया गया है। आखिर ये कैसे हो सकता है कि ये सभी राम मंदिर के कर्मचारी थे, लेकिन उनके नाम पते तक मंदिर ट्रस्ट के पास नहीं हैं। ट्रस्ट का यह रवैया भी जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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इस बीच रविवार को अयोध्या के बार एसोसिएशन ने एक अहम बैठक में फैसला लेते हुए ऐलान किया कि जिले का कोई भी वकील राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। साथ ही बार एसोसिएशन ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, "कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे। चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा को अयोध्या छोड़ना होगा। इनके खिलाफ केस दर्ज करने के लिए धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। सीबीआई जांच की मांग की जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।"

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