
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मसौदा सूची में अपना और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम नहीं होने पर निर्वाचन आयोग के जवाब के बाद बुधवार को कहा कि उनका मकसद हंगामा खड़ा करना नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया पर सवाल करना था जिसमें नए पते पर पुराने वास्तविक मतदाता का नाम पंजीकृत करने का कोई प्रावधान नहीं है।
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कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य सप्पल ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में एसआईआर की मसौदा सूची जारी होने के बाद दावा किया था कि उनका और उनके परिवार के सदस्यों के नाम एसआईआर से गायब हैं, जबकि उनके पास सारे कागजात हैं तथा 2003 की मतदाता सूची में भी उनके नाम थे।
सप्पल ने अपना नाम साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित कराया था।
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निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस नेता को जवाब देते हुए बताया कि बीएलओ ने अपना काम नियम मुताबिक ही किया है और उन्हें फॉर्म 6 भरना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी का यह भी कहना है कि फिलहाल एसआईआर का प्रारंभिक चरण ही पूरा हुआ है तथा अभी अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह फ़र्क नहीं पड़ता कि आपका नाम मसौदा सूची में आया था कि नहीं। फ़र्क इस बात का पड़ेगा कि आपका नाम अंतिम मतदाता सूची में है या नहीं।’’
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इस पर सप्पल ने जवाब दिया, ‘‘मेरा मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना नहीं था, इसीलिए स्वयं मैंने सही कारण बताया था। मैंने पुराने पते से नाम काटने पर आपत्ति भी नहीं की और बीएलओ को भी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया, क्योंकि मैं जानता था उसकी कोई गलती नहीं थी। मेरा सवाल चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके प्रावधान पर है, जिसमें नए पते पर पुराने वास्तविक मतदाता का नाम दर्ज करने का कोई सिस्टम ही नहीं है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘आप ने कहा है कि ये सारे मतदाता अब फॉर्म 6 भर कर नए वोटर के रूप में फिर से जुड़ सकते हैं, लेकिन ऐसा करते ही पुरानी मतदाता सूची से रिकॉर्ड अलग हो जाएगा। मेरे अपने मामले में पिछले 35 वर्ष का रिकॉर्ड मिट जाएगा।’’
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