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साहित्य अकादमी विजेता केपी रामानुन्नी ने मॉब लिंचिंग में मारे गए जुनैद की मां को दी पुरस्कार राशि

सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित किताब के लिए सम्मानित मलयालम लेखक केपी रामानुन्नी ने जुनैद की मां को पुरस्कार की राशि दे दी। जुनैद को पिछले साल जून में ट्रेन में पीट-पीट कर मारा डाला गया था।

फोटोः आईएएनएस
फोटोः आईएएनएस जुनैद की मां को पुरस्कार की राशि सौंपते हुए मलयालम लेखक केपी रामानुन्नी

देश की 23 भाषाओं के लेखक-लेखिकाओं को 12 फरवरी को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2017 प्रदान किए गए। मलयालम लेखक केपी रामानुन्नी को उनकी किताब ‘दाएवाथिंते पुस्तकम’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। लेकिन उन्होंने हरियाणा के जुनैद की पीट-पीटकर की गई हत्या के विरोध में आवाज उठाने के लिए पुरस्कार के साथ मिली राशि को जुनैद की मां को दे दिया। उन्होंने पुरस्कार राशि में से महज तीन रुपये अपने पास रखकर बाकी की रकम जुनैद की मां को दे दिए। पिछले साल जून महीने में ईद की खरीदारी कर अपने घर लौट रहे जुनैद को ट्रेन में पीट-पीटकर मार डाला गया था।

बिना किसी वजह के मार दिया गया जुनैद : रामानुन्नी

केपी रामानुन्नी ने कहा कि उन्हें जिस किताब, दाएवाथिंते पुस्तकम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, वह सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जुनैद को बिना किसी वजह के मार डाला गया था। तमिल कवि इंकलाब के परिजन भी पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हुए। इंकलाब को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया गया है।

23 लेखकों को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

असमिया में जयंत माधब बोरा को उनकी किताब 'मोरिआहोला' के लिए पुरस्कृत किया गया। बांग्ला में अफसार अहमद को उनकी किताब 'सेई निखोंज मानुषता' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। बोडो भाषा की रीता बोरा को 'थवीसम' के लिए पुरस्कृत किया गया। डोगरी में शिव मेहता को 'बन्ना', अंग्रेजी में ममंग दाई को 'द ब्लैक हिल' और गुजराती में उर्मी घनश्याम देसाई को उनकी पुस्तक 'गुजराती व्याकरण ना बासो वर्षा' के लिए पुरस्कार दिया गया।

हिंदी में रमेश कुंतल मेघ को उनकी कृति 'विश्व मिथक, सरिता सागर' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। कन्नड़ में टी.पी. अशोक को 'कथाना भारती', कश्मीरी में अवतार कृष्ण रबर को 'येली पर्दा वोथ' और कोंकणी में गजानन रघुनाथ जोग को 'खंड अनी हेर कथा' के लिए यह पुरस्कार दिया गया। मैथिली में उदय नारायण सिंह 'नचिकेता' को उनकी किताब 'जहालक डायरी’, मणिपुरी में राजेन तोइजांबा को 'चाही तारेत खुंताकापा', मराठी में श्रीकांत देशमुख को 'बोलावे ते अमही' और नेपाली में बीना हंगखिम को 'कीर्ति विमर्श' के लिए इनाम मिला।

उड़िया भाषा में गायत्री सराफ को 'एतावातिरा शिल्पी', पंजाबी मे नक्षत्र को 'स्लोडाउन', राजस्थानी में नीरज दाहिया को 'बीना हसलपाई', संस्कृत में निरंजन मिश्रा को 'गंगापुत्रावादानम', संथाली में भुजंग तुदु को 'ताहेनान तांगी रे', और सिंधी में जगदीश लछानी को 'आछेंदे लाजा मारान' के लिए पुरस्कृत किया गया। तेलुगू में टी. देवीप्रिया को 'गालीरंगू' और उर्दू में मोहम्मद बेग अहसास को 'दखमा' के लिए पुरस्कृत किया गया।

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबर ने विजेताओं को प्रशस्ति पत्र, शाल और एक-एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया।

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