
संभल जिले में शनिवार को शिया समुदाय के लोगों ने ईद की नमाज अदा की, लेकिन इस बार वे काले बैंड पहनकर आए थे। ये बैंड उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई की मृत्यु पर शोक और विरोध जताने के लिए पहने।
सिरसी क्षेत्र में नमाज के दौरान और उसके बाद कुछ लोगों ने नारेबाजी भी की, जिसमें 'अमेरिका मुर्दाबाद' जैसे नारे शामिल थे। इस दौरान पुलिस वहां मौजूद थी और शांति बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रख रही थी। हालांकि, कुछ सदस्यों और पुलिस के बीच हल्की सी बहस हुई, लेकिन उसे जल्दी ही नियंत्रित कर लिया गया।
Published: undefined
शिया समुदाय के लोगों ने कहा कि काला बैंड पहनना उनके शोक और एकजुटता का प्रतीक था। यह कदम उन्होंने भावनात्मक क्षति व्यक्त करने और धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए उठाया। नमाज के बाद एक जुलूस भी निकाला गया, जिसमें लोग खामेनेई के प्रति सम्मान और उनकी मौत को लेकर विरोध दोनों के भाव व्यक्त कर रहे थे।
ये विरोध प्रदर्शन अमेरिका और ईरान के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की कथित हत्या को लेकर हो रहे हैं। खामेनेई की मौत ने पूरे भारत में मुस्लिम संगठनों के बीच व्यापक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की थीं। देश के अलग-अलग हिस्सों में शिया समुदाय ने ईद के मौके पर अपने शोक और विरोध को व्यक्त किया।
Published: undefined
इस घटना का संदर्भ उस रिपोर्टेड खबर से जुड़ा है जिसमें कहा गया कि संयुक्त अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई की मृत्यु हुई। इस खबर ने भारत में मुस्लिम संगठनों के बीच व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की। कश्मीर में, जहां शिया आबादी अधिक है, लाल चौक, सईदा कदल, बुडगाम, बंदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी व इजरायल विरोधी नारे लगाए।
Published: undefined
लखनऊ में मस्जिदों के आसपास समूह इकट्ठा हुए, नारे लगाए और महिलाओं को खमेनेई की तस्वीरें पकड़े देखा गया, वे रोती हुई नजर आईं। पंजाब के लुधियाना में भी प्रदर्शन हुए, जहां शियाओं की संख्या कम होने के बावजूद पुतलों का दहन किया गया। अजमेर में शिया समुदाय ने तीन दिन की शोक अवधि घोषित की।
वहीं कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में स्थिति शांतिपूर्ण रही। इस जगह खामेनेई एक बार गए थे। वहां की दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से बंद रहने का निर्णय लिया और गांव में तीन दिन का शोक घोषित किया गया। सभी सार्वजनिक कार्यक्रम और उत्सव स्थगित कर दिए गए ताकि माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined