
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले एसआईआर आंदोलन का समर्थन किया है। मोर्चा ने दिल्ली पुलिस और भाजपा-आरएसएस के नेतृत्व वाली राज्यों की सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण जन प्रदर्शनों पर किसी भी प्रकार की रोक या दमनात्मक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
एसकेएम ने केंद्र सरकार पर पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग और देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है। मोर्चा का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली पुलिस के साथ गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड सहित भाजपा शासित राज्यों के पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
एसकेएम के मुताबिक, विभिन्न राज्यों में आंदोलन में शामिल होने की योजना बना रहे कार्यकर्ताओं को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखा जा रहा है। मोर्चा ने महिला विद्यार्थियों सहित कई कार्यकर्ताओं को नजरबंद किए जाने, कार्यकर्ताओं को कथित रूप से उठाए जाने और स्थानीय इलाकों, विशेषकर मस्जिदों के आसपास अभियान चलाकर लोगों को डराने के आरोप भी लगाए हैं। संगठन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसी सामग्री पर भी चिंता जताई, जिसके जरिए उसके अनुसार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।
एसकेएम ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक हजरत निजामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों को रद्द करने तथा नई दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। मोर्चा ने इन कदमों को सरकार की घबराहट भरी प्रतिक्रिया बताते हुए आपत्तिजनक करार दिया। संगठन ने प्रदर्शन के दौरान 26 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की चर्चा करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्था राजनीतिक असुरक्षा को दर्शाती है।
मोर्चा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि किस कानून के तहत पुलिस अधिकारी नागरिकों के निजी घरों में प्रवेश कर सकते हैं और उन्हें नजरबंद कर सकते हैं। संगठन ने न्यायपालिका, संबंधित उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय से भी मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए की जा रही कथित अवैध कार्रवाइयों पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाए। एसकेएम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बिना हथियार शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभ हैं।
संगठन के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक जीवन में कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसे विरोध की स्वतंत्रता के लिए आवश्यक मानना चाहिए। मोर्चा ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी अहिंसक प्रदर्शनों को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की व्यवस्था करना है। इसके लिए दिल्ली पुलिस बैरिकेडिंग, घेराबंदी और यातायात मार्गों में बदलाव जैसे उपाय अपना सकती है। संगठन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी आपत्ति जताई और कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बलपूर्वक व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रावधान सार्वजनिक अशांति रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार देता है, लेकिन इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण सभाओं पर व्यापक या स्थायी प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। एसकेएम ने मांग की कि दिल्ली पुलिस निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति व्यक्त करने का अवसर दे। एसकेएम ने अपने बयान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अभियोजन, एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की है।
संगठन ने बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में एसआईआर लागू किए जाने के बाद हुए चुनावों को रद्द करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित चयन समिति में मनोनीत केंद्रीय मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने के लिए कानून में संशोधन की मांग की गई है, ताकि निर्वाचन आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर के किसानों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ किसी भी प्रकार के बल प्रयोग का विरोध करें। संगठन ने मतदाता सूची में कथित अवैध हस्तक्षेप को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वह 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले एसआईआर आंदोलन के साथ खड़ा है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर दमनात्मक कार्रवाई का विरोध करेगा।
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