
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने बुधवार को लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे को विवादास्पद करार दिया और जनगणना के बिना किये जाने पर सवाल उठाया। साथ ही राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा की क्षमता का मुद्दा उठाते हुए इसे महाराष्ट्र के विभाजन की एक "साजिश" करार दिया।
दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि बिना जनगणना के किया जा रहा यह कार्य गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और दक्षिण भारतीय राज्य इसका पुरजोर विरोध करेंगे। उनकी पार्टी के पास 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' या महिला आरक्षण कानून का विरोध करने का कोई कारण नहीं है, जिसे केंद्र सरकार जल्द लागू करने की योजना बना रही है।
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राउत ने कहा कि हमारी पार्टी ने महिलाओं के चुनावी हितों में कभी बाधा नहीं डाली है और न ही कभी डालेगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने वाला पहला राज्य था। राउत ने कहा, “यह परिसीमन ही है जो देश में गंभीर स्थिति पैदा करेगा। परिसीमन का मुद्दा विवादास्पद है और यह जनगणना कराए बिना किया जा रहा है।” उन्होंने आगाह किया कि, "दक्षिण भारतीय राज्यों द्वारा इसका बड़े पैमाने पर विरोध किया जाएगा।"
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इस कवायद में महाराष्ट्र की लोकसभा सीटें 48 से बढ़कर 72 और विधानसभा सीटें 288 से बढ़कर 400 होने का अनुमान है। राउत ने राज्य विधानसभा की क्षमता का मुद्दा उठाते हुए इसे महाराष्ट्र के विभाजन की एक "साजिश" करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या विधान भवन में 400 विधायकों के बैठने की जगह न होने का बहाना बनाकर महाराष्ट्र को तोड़ने की साजिश रची जा रही है?
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बता दें कि संसद के विशेष सत्र (16-18 अप्रैल) में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि 2029 तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके। इसके तहत पिछली जनगणना (2011) के आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और तेलंगाना के उनके समकक्ष रेवंत रेड्डी पहले ही इस कदम का विरोध कर चुके हैं।
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