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विकास दुबे की मौत के बाद दफन हो गए खाकी-खादी गठजोड़ के राज, कई सरपरस्तों ने ली राहत की सांस

विकास दुबे का सिक्का उत्तर प्रदेश के कुछ नेताओं की सरपरस्ती में ही चमका था। विकास के पकड़े जाने पर कई चेहरों को बेनकाब होने का डर सता रहा था। इसमें खादी ही नहीं कई खाकी वालों को भी उसके मुंह खोलने का डर सता रहा था। लेकिन अब एक ही झटके में सब खत्म हो गया।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

कानपुर में आठ पुलिस वालों की हत्या कर पिछले एक हफ्ते से सुर्खियों में छाए विकास दुबे की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद उसके साथ खाकी और खादी के कई राज दफन हो गए। प्रदेश के कई अफसरों और नेताओं ने अब राहत की सांस ली होगी। क्योंकि विकास की मौत के साथ ही इस नापाक गठजोड़ के सारे राज और सबूत भी खत्म हो गए। उसके पकड़े जाने से उसके भास्मासुर बनने की आशंका से डरने वालों को अब उसके मरने के बाद राहत की सांस मिली होगी।

दरअसल प्रदेश के कुछ नेताओं की सरपरस्ती में ही विकास का सिक्का चमक रहा था। अपराधी विकास के पकड़े जाने पर हर बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते थे। वह अपने आकाओं के नाम न उगल दे यह डर भी सबको सता रहा था। इसमें खादी ही नहीं कई खाकी वालों को भी उसके मुंह खोलने का डर सता रहा था। अगर पूछताछ होती तो कई राजनीतिक रिश्ते और नाम सामने आते जो इसे अपराध जगत को ताकत दे रहे थे।

वरिष्ठ पत्रकार अंकुर तिवारी कहते हैं, "विकास दुबे के एनकांउटर के लिए काफी हड़बड़ाहट दिख रही थी। लेकिन जब उसे पकड़ा गया तो एक उम्मीद जगी थी कि खाकी और खादी के सहारे वह जिस अपराध का नेटवर्क चला रहा था, अब उसका भंडाफोड़ होगा। लेकिन कई बड़े राज उसकी मौत के साथ ही दफन हो गए।"

उन्होंने कहा, “2001 में राज्यमंत्री की हत्या के बाद वह बरी हो गया। 60 से ज्यादा मुकदमे, हत्या, लूट, डकैती जैसे आरोप होने के बावजूद उसके 11 से ज्यादा असलहे 20 सालों से कभी निरस्त नहीं हुए। इसी से उसके रसूख का पता चलता है। यह तो जाहिर है कि उसने अपने साक्षात्कारों में सत्तारूढ़ दलों के विधायकों समेत कई राजनेताओं का नाम लिया। बीएसपी में भी उसका काफी दखल था। सरकार के एक मंत्री का नाम आ रहा था। जिस प्रकार से उज्जैन में उसकी नाटकीय गिरफ्तारी हुई। वहां भी कई सवाल हैं। फरीदाबाद से उज्जैन कैसे पहुंचा। उसके अपराध को बढ़ाने में और कौन-कौन पुलिसकर्मी लगे थे। ये सारे राज उसकी मौत के साथ दफन हो गए।"

हालांकि उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी एके जैन इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने कहा, "विकास दुबे जैसे अपराधी का एनकांउटर के अलावा कोई चारा नहीं था। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे लोगों को जेल में रखने से भी उनका नेटवर्क काम करता है। सब हाथ जोड़ते, चढ़ावा चढ़ाते। आने वाले समय में व्यापरियों से फिरौती मांगता। अन्य घटनाएं होतीं। हिरासत में आने से क्या राज उगलता। सब नेताओं के चेहरे उजागर हैं। कौन सा राजनीतिक दल अपने नेताओं के ऊपर कार्रवाई करेगा। उनसे पूछने पर कहेंगे कि वोट मांगने जाते थे। ऐसे में कुछ होने वाला नहीं है। इस मामले में इसके टच में जितने भी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी रहे हों। सब पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी काल डिटेल्स देखकर जो पुलिस वाले इससे मिले हों सब पर कार्रवाई होनी चाहिए।"

वहीं, आरएलडी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट कर विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद देश के सारे न्यायाधीशों को इस्तीफा दे देना चाहिए। अब तो बीजेपी के ठोक दो राज में अदालत की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने लिखा कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के असली अपराधियों को बचाने के लिए यह सब ड्रामा रचा गया है।

उधर, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भी एनकांउटर को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा, "शहीद पुलिसकर्मियों को न्याय कहां मिला? शहीदों को न्याय तब मिलता जब विकास दुबे से जुड़े पुलिस और नेताओं का पूरा सिंडिकेट बेनकाब होता। विकास दुबे के साथ ही न्याय की उम्मीद दफन हो गई। पहले चिट्ठियां गायब, सबूत दफन, लेकिन विकास दुबे ने योगी सरकार का असली चेहरा जनता के सामने लाकर रख दिया।"

चौबेपुर के रहने वाले एक शख्स ने बताया कि विकास दुबे के अपराधिक इतिहास के चर्चे देश भले पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद जान पाया हो। लेकिन वह कानपुर के आस-पास के इलाके में बहुत पहले से प्रसिद्ध था। अपनी सत्ता को बचाने के लिए जिस दल की सरकार होती थी, उसके साथ वह सवार हो जाता था। कानपुर देहात में वह चुनाव के दौरान ब्राह्मण वोटों का ठेकेदार बन जाता था।

एक स्थानीय निवासी ने कहा कि जमीनों पर कब्जे करना, डरा-धमका कर जमीन अपने नाम कराना यह उसका शौक था। पुलिस से बहुत जल्दी सेटिंग कर लेता था। अपने ब्राह्मण वोटों की लालच में लोग इसे चुनाव प्रचार में ले जाते थे। प्रधानी और पंचायती में यह मजबूत टूल्स के रूप में प्रयोग होता रहा है। अब इसकी मौत के बाद बहुत सारी बातें हैं, उन्हें कौन सामने लाएगा। यह भी बड़ा सवाल है।

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