
पंजाब के अखबारों से लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों तक सबको दबाने के सिलसिले ने पंजाब में जोर पकड़ लिया है। शुरुआत हुई थी नवंबर की पहली तारीख को। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से बयान दिया गया था कि चंडीगढ़ में आप के नेता अरविंद केजरीवाल के लिए शीश महल तैयार किया गया है। अखबारों ने बीजेपी प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला के बयान से मिली यह खबर पहले पन्ने पर छापी। तकरीबन सभी ने इसी के साथ आम आदमी पार्टी का खंडन भी छापा।
राज्य सरकार को यह बात नागवार लगी और अगले ही दिन अखबारों के सप्लाई वाले ट्रकों को रोक लिया गया। तलाशी के नाम पर अखबारों के बंडलों को खोला गया। कहा गया कि यह खुफिया विभाग से मिली इस जानकारी के बाद किया जा रहा है कि इन ट्रकों से ड्रग्स और हथियार भेजा जा रहा है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला। जब तक यह सब चला, अखबारों को पाठकों तक भेजने का समय खत्म हो चुका था। उस दिन पंजाब के ज्यादातर लोगों को वह अखबार नहीं मिले जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह बयान काफी प्रमुखता से छपा था कि उनके कैंप ऑफिस के बारे में लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
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इसके बाद अखबारों को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए गए। कुछ दिन बाद कई अखबारों में विज्ञापन पहले की तरह ही छपने लगे। अटकलें थीं कि इन अखबारों ने सरकार से समझौता कर लिया है। पर कुछ अखबारों के विज्ञापन तब भी बंद रहे। इनमें पंजाब का सबसे पुराना पंजाब केसरी समूह भी है।
यह पूरा मामला चंडीगढ़ के सेक्टर दो के 50 नंबर बंगले का था, जिसे मान ने अपना कैंप कार्यालय और गेस्ट हाउस बनाने के नाम पर एलाॅट करवाया था। चंडीगढ़ की मशहूर सुखना झील के पास के इस सेक्टर में पजाब और हरियाणा मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश और तमाम आला अफसर रहते हैं। कहा जाता है कि इस बंगले में अब अरविंद केजरीवाल स्थायी रूप से रहते हैं।
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नया साल आते ही लगा कि आप सरकार ने जैसे प्रेस को दबाने का नया संकल्प ही ले लिया है। पहली ही जनवरी को पंजाब पुलिस की तरफ से यह खबर दी गई कि उसने आरटीआई कार्यकर्ता मानिक गोयल और नौ सोशल मीडिया कंटेंट क्रियेटर्स एवं इन्फ्लुएंसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इन लोगों ने इसे सरकार द्वारा दिया गया नए साल का तोहफा बताया।
यह मामला एक महीने पुराना था। जब मान दिसंबर के शुरू में दस दिन के लिए जापान और दक्षिण एशिया के दौरे पर गए थे। इसी दौरान मानिक गोयल ने फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफार्म फ्लाइटराडार 24 के जरिये पंजाब के मुख्यमंत्री के हैलीकाॅप्टर की जानकारी जमा करनी शुरू की। उन्होंने पाया कि जब मुख्यमंत्री देश से बाहर थे, तब भी उनका हैलीकाप्टर उड़ान भर रहा था। इनमें से एक उड़ान अमृतसर की भी थी। गोयल ने यह जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। यह सिर्फ एक जानकारी ही नहीं महत्वपूर्ण खबर भी थी। इसलिए पंजाबी के यू-ट्यूब चैनलों और इनफ्लुऐंसर्स ने इस हाथों हाथ लिया। जल्द ही यह चर्चा का विषय बन गया। हालांकि मुख्यधारा के मीडिया ने इस खबर को हाथ नहीं लगाया।
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पुलिस ने इन सबके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 एक और दो के तहत अफवाह फैलाने, गलत जानकारी देने और धारा 61 दो के तहत आपराधिक षडयंत्र रचने के मामले दर्ज किए। जब इन सबको को बठिंडा थाने में तलब किया गया, तो यह खबर मुख्यधारा के मीडिया में भी पहुंच गई।
इस मामले को लेकर मानिक गोयल और तीन पत्रकारों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। 12 जनवरी को अदालत ने कहा कि कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं, सिर्फ इसी आधार पर सरकार उनके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं बना सकती। हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्थगन आदेश दे दिया। जिस समय यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा था, पंजाब सरकार मीडिया पर दमन की एक और कार्रवाई शुरू कर चुकी थी।
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11 से 15 जनवरी के बीच राज्य सरकार की तमाम एजेंसियों ने पंजाब केसरी समूह के संस्थानों और उनके मालिकों के अन्य कारोबारों पर छापे मारे। अखबार के मालिकों का जालंधर में एक होटल है पार्क प्लाजा। इस होटल पर पहले एक्साइज और टैक्सेशन विभाग ने छापा मारा। इसके बाद फूड एंड सिविल सप्लाई वाले होटल पर छापा मारने आए। फिर नंबर आया जीएसटी विभाग के छापे का। लाईसेंस रद्द करने का सिलसिला भी शुरू हो गया।
दिलचस्प बात यह है कि यह होटल भले ही पंजाब केसरी के मालिकों का है, लेकिन इसका संचालन सरोवर ग्रुप करता है जो देश भर में इस समय 150 से ज्यादा होटलों का संचालन कर रहा है। जिन मामलों को लेकर होटल पर छापे मारे गए, उन सभी की जवाबदेही सरोवर समूह की थी, पंजाब केसरी समूह की नहीं।
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बात सिर्फ होटल तक ही नहीं रुकी। जालंधर, लुधियाना और बठिंडा में अखबार के दफ्तरों के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। तीनों जगह प्रिंटिंग प्रेस पर श्रम विभाग ने छापे मारे। इसके बाद पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने अखबार की जालंधर और लुधियाना की प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा। बावजूद इसके कि अखबार के कारोबार को ऐसे उद्योगों की श्रेणी में नहीं रखा जाता जिनसे किसी भी तरह से पर्यावरण को कोई खतरा हो। बिना नोटिस दोनों ही जगह के बिजली कनेक्शन काट दिए गए।
अखबार के सीईओ और प्रमुख संपादक 93 वर्षीय विजय कुमार चोपड़ा का कहना है कि, "यह सब जानबूझकर अखबार को दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है।" कुछ अन्य लोगों का कहना है कि पंजाब केसरी समूह के खिलाफ कार्रवाई से सबको यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार किस हद तक जा सकती है। पूरा विपक्ष इसकी आलोचना कर रहा है। दूसरी तरफ सरकार पूरी ढिठाई से इसे जायज ठहरा रही है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब केसरी को प्रेस फिर शुरू करने का आदेश दे दिया है, लेकिन चेतावनी पूरे मीडिया को मिल गई है। नवा पंजाब यूट्यूब चैनल के नवनीत सिंह वधवा कहते हैं, "जो पंजाब केसरी के साथ हो रहा है, कल हमारे साथ भी होगा, और परसों आपके साथ भी होगा।"
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