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SIR का दूसरा चरण: 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए

एसआईआर का दूसरा चरण चार नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ।

बंगाल के पुरुलिया में बुजुर्ग ने आत्महत्या की, परिजनों ने SIR से जुड़े भय को कारण बताया
बंगाल के पुरुलिया में बुजुर्ग ने आत्महत्या की, परिजनों ने SIR से जुड़े भय को कारण बताया फोटोः सोशल मीडिया

चुनाव आयोग द्वारा नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के तहत करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27 अक्टूबर को एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई थी और तब कुल 50.90 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। हालांकि अलग-अलग प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों में मतदाताओं की संख्या घटकर 44.40 करोड़ रह गई है।

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निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें ‘एएसडी’ यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत/ नाम में दोहराव की श्रेणी में रखा गया है।

उन्होंने पहले उपलब्ध रुझानों का हवाला देते हुए कहा था कि एसआईआर की प्रक्रिया में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों का संग्रह ‘काफी कम’ रहा है।

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उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के बाद मंगलवार को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिये गए हैं। इसके मुताबिक राज्य में अब 12.55 करोड़ मतदाता हैं।

आयोग ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ (करीब 18.70 प्रतिशत)मतदाताओं के नाम मृत्यु, स्थायी प्रवास या एकाधिक पंजीकरण के कारण मसौदा सूची में शामिल नहीं किए जा सके।

एसआईआर का दूसरा चरण चार नवंबर को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ। असम में मतदाता सूचियों के एक अलग ‘विशेष पुनरीक्षण’ की प्रक्रिया चल रही है।

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राज्यों में 2003 में मतदाता सूचियों के हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसी मानक को बिहार में भी अपनाया गया था। अधिकतर राज्यों में पिछली एसआईआर प्रक्रिया 2002 से 2004 के बीच हुई थी।

एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य जन्मस्थान की जांच करके विदेशी अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची से बाहर निकालना है। बांग्लादेश और म्यांमा सहित विभिन्न देशों से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण हो जाता है।

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