
सोनम वांगचुक ने लद्दाख के उपराज्यपाल कार्यालय पर उन्हें बदनाम करने का अभियान चलाने का आरोप लगाया और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की।
वांगचुक और HIAL का जमीन की लीज रद्द होने तथा डेजर्ट फ्लावर स्कूल को लेकर प्रशासन से विवाद चल रहा है।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी उपराज्यपाल कार्यालय पर करदाताओं के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
केंद्र से बातचीत बेनतीजा रहने पर वांगचुक ने लद्दाख के लोगों से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया।
पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के कार्यालय पर उन्हें बदनाम करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में हस्तक्षेप करने और लद्दाख के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती इलाकों के लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि देश के युवाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के हित में आवाज उठाने के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लद्दाख में उपराज्यपाल प्रशासन उनके संस्थानों और स्कूलों को परेशान कर रहा है। वांगचुक ने अपने वकीलों की ओर से की गई जांच को ‘स्टिंग ऑपरेशन’ बताते हुए इससे जुड़े कुछ अंश सार्वजनिक किए।
वांगचुक ने कहा कि उनकी जांच के दौरान लोक निवास से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन फिलहाल वह उनमें से कुछ हिस्से ही सार्वजनिक कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले इस सामग्री को आईबी प्रमुख के साथ साझा किया गया था, ताकि मामले में हस्तक्षेप हो सके। हालांकि, कुछ बातचीत के बाद उनकी ओर से जवाब मिलना बंद हो गया।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह इस सामग्री को सार्वजनिक करने से बच रहे थे, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि इससे देश की गरिमा और मनोबल को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन अब उन्होंने इसे देश के सामने रखने का फैसला किया है। वांगचुक ने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के पारिस्थितिक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
वांगचुक की पत्नी और HIAL की सह-संस्थापक एवं सीईओ गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी उपराज्यपाल कार्यालय पर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि निजी कंपनियों को करदाताओं के पैसे से फंड देकर वांगचुक को बदनाम करने और उपराज्यपाल की छवि का प्रचार करने की कोशिश की जा रही है। इन आरोपों पर उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
वांगचुक और उनके संस्थान ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख’ (HIAL) का लद्दाख प्रशासन के साथ जमीन की लीज को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। प्रशासन ने लीज रद्द करने के पीछे तय समय में लीज डीड निष्पादित नहीं किए जाने और जरूरी प्रीमियम का भुगतान न होने का हवाला दिया था। प्रशासन का यह भी आरोप है कि जमीन का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए उसका आवंटन हुआ था।
प्रशासन ने HIAL को अपने ‘डेजर्ट फ्लावर स्कूल’ के संचालन से जुड़ी आगे की गतिविधियां नहीं करने का निर्देश भी दिया है। दूसरी ओर, वांगचुक और उनकी पत्नी ने जमीन के सौदे को अंतिम रूप देने में हुई देरी के लिए नौकरशाही की बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि लीज रद्द करने की कार्रवाई लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग से जुड़ी राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
इस विवाद के बीच लेह की लेबर कोर्ट ने शनिवार को HIAL के एक पूर्व कर्मचारी से जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि उसे कानूनी रूप से मिलने वाला मातृत्व लाभ नहीं दिया गया और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
वांगचुक ने केंद्र सरकार पर भी लद्दाख के लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने कहा था कि क्षेत्र के लोग दुखी, हैरान और नाराज हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ‘राम राज्य’ की बात करती है, तो फिर लोगों से किए गए वादे पूरे क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
वांगचुक के मुताबिक, लद्दाख के लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक सुरक्षा देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बातचीत में सामने आए प्रस्ताव उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से अपील की है कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को देश के दूसरे नागरिकों के समान अधिकार, लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और न्याय मिले।
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