
संसद के सेंट्रल हॉल में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई है। बैठक के दौरान कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने की शर्मनाक कोशिश की। उन्होंने कहा, “आप सभी महाराष्ट्र के घटनाक्रमों से अवगत हैं। राज्यपाल ने सबसे निंदनीय तरीके से व्यवहार किया। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों के तहत काम किया। बीजेपी अपने चुनाव पूर्व गठबंधन को अहंकार और अति-आत्मविश्वास के कारण बचा नहीं पाई। बीजेपी ने तीन दलों (कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना) के बीच हो रहे गठबंधन को तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में याचिका दाखिल करने के बाद मोदी-शाह की मनसूबे सबी के सामने आ गए। मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि हम तीनों दल बीजेपी के घोर जोड़-तोड़ की राजनीति को विफल करने के लिए एकजुट हैं।”
देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर भी सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “देश के सामने गंभीर समस्याएं हैं। दिन प्रतिदिन आर्थिक संकट गहरा रहा है। विकास की रफ्तार घट रही है, बेरोजगारी बढ़ रही है और निवेश नहीं हो रहा है। किसानों, व्यापारियों और छोटे और मझोले कारोबारियों के बीच चिंताजनक स्थिति है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में खपत घट रही है। निर्यात घट रहा है और आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या से निपटने के बजाय मोदी-शाह सरकार आंकड़ों को छिपाने में व्यस्त है और जारी नहीं कर रही है। सरकारी कंपनियों को बेचा जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि इन कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों का क्या होगा? लाखों वेतनभोगियों और सामान्य परिवारों के लाखों लोग बैंकों में अपनी जमा राशि के लिए चिंतित हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “हमारी पार्टी ने आरसीईपी समझौते का विरोध किया, जिस पर सरकार हस्ताक्षर करने वाली थी। हमने किसानों, मछुआरों, छोटे और मध्यम उद्यमों और हमारे विनिर्माण उद्योग के हितों की रक्षा के लिए ऐसा किया। हमारे विरोध के चलते सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और आखिर समय में उसने आरसीईपी समझौते पर आरसीईपी समझौता करने से इनकार कर दिया।”
सोनिया ने कहा, “असली मुद्दों से देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए प्रधानमंत्री और उनके गृह मंत्री विभाजनकारी नीतियों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।”
सोनिया गांधी ने एनआरसी के मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार द्वारा उठाए गए एनआरसी के चलते ससम में भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि अब मोदी सरकार पूरे देश में एनआरसी लाने की बात करी है। सोनिया ने कहा कि इस कदम से देश में और ज्यादा भय का माहौल पैदा होगा।
जम्मू-कश्मीर में यूरोपीय सांसदों को जाने देने और देश के सांसदों के रोक पर भी सोनिया गांधी मोदी सरकार पर निशाना साधा। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने पर सोनिय गांधी ने कहा, “तीन महीने पहले एक झूठे वादे के तहत जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटा दिया गया। जमीनी हकीकत मोदी-शाह सरकार द्वारा बनाई गई काल्पनिक छवियों से पूरी तरह अलग हैं। राज्य में लोग पीड़ा में हैं, उनका अपमान जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री, विधायक, राजनीतिक कार्यकर्ता, आम लोग जो भारत के विचार को मानते थे, जो भारत के संविधान का पालन करते थे, महीनों से घर में नजरबंद हैं। यहां तक कि बच्चों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। जब राहुल की अगुवाई में राजनीतिक दल के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर के लिए उड़ान भरी तो उन्हें शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन सरकार ने एक संदिग्ध एनजीओ द्वारा लाए गए यूरोपीय सांसदों वहां जाने की इजाजत दे दी।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर कहा, “आरटीआई के माध्यम से चुनावी बॉन्ड की हकीकत सामने आई है। यह जल्दबाजी में किया गया और आरबीआई की सलाह के विपरीत एक और गुप्त अभियान का हिस्सा है। इस योजना में कई अड़चनें हैं। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री द्वारा केवल सत्ताधारी पार्टी को लाभ पहुंचाने यह कदम उठाया गया था।”
कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर द्वारा महात्मा गांधी के हत्यार नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने का मुद्दा भी उठा। इस पर सोनिया गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर जो कुछ भी कहना था पार्टी ने कहा है।
प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वरा नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “वह जो कह रही हैं, वह आरएसएस और बीजेपी की सोच है। मैं क्या कह सकता हूं? इसे छिपाया नहीं जा सकता। मुझे उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के लिए अपना समय बर्बाद करने की आवश्यकता नहीं है।”
व्हाट्सएप प्राइवेसी ब्रीच मुद्दे पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार मौलिक अधिकार छीन रही है।
गौरतलब है कि एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि इजरायली सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनेताओं की जासूसी की गई थी। खबर सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरा था और इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
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Published: 28 Nov 2019, 10:53 AM IST