
तमिलनाडु के प्रमुख राजनीतिक दल डीएमके ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के विरोध में स्वर मुखर कर रखा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है जिससे दक्षिणी राज्यों में चिंताएं बढ़ गई हैं।
1971 की जनगणना के अनुसार, जब भारत की जनसंख्या लगभग 550 मिलियन थी, तबसे लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 सदस्य है।
अब जब जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक हो गई है, तो केंद्र सरकार एक नई परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से संसदीय प्रतिनिधित्व का विस्तार करने की योजना बना रही है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन संशोधन विधेयक का उद्देश्य लोकसभा सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करना है जबकि केंद्रशासित प्रदेशों से प्रतिनिधित्व 20 से बढ़ाकर 35 करना है।
आगामी तीन दिनों में होने वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है उनका तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।
उन्हें आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों को असमान रूप से लाभ होगा, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक रही है।
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खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार 2002 के परिसीमन संशोधन अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से 2026 के बाद की जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना या उससे पहले के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने पर भी विचार कर रही है, जिससे विवाद और भी बढ़ गया है।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और संघीय सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस योजना पर आगे बढ़ती है, तो उनकी पार्टी एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगी और पुरानी डीएमके फिर से देखने को मिलेगी। दूसरी ओर, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने चिंताओं को कम करते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से तमिलनाडु पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु की लोकसभा सीटें वर्तमान 39 से बढ़कर लगभग 50 हो सकती हैं जबकि उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से बढ़कर लगभग 143 हो सकता है जिससे संसद में सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल जाएगा।
इसी बीच, केंद्र सरकार परिसीमन प्रस्ताव के साथ-साथ महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की भी योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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