
कांग्रेस अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस सरकार से इस समझौते को लेकर स्पष्टीकरण की मांग कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर सरकार से जुड़े लोग चीजों को अपने हिसाब से पेश करने के लिए सक्रिय हो गए हैं लेकिन अब तक इस समझौते का कोई ठोस विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को यह भी कहा कि यह स्पष्ट है कि कृषि वस्तुओं के आयात को उदार बनाने को लेकर रियायतें दी गई हैं।
दरअसल, डील को लेकर मोदी सरकार और अमेरिका के दावे अलग-अलग हैं।
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रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया,‘‘ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के 36 घंटे बीत चुके हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर की गई और यह तुरंत प्रभावी हो रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ 'स्पिन डॉक्टर' अपने काम में लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक हमारे पास इस समझौते के कोई ठोस विवरण नहीं हैं, हालांकि यह स्पष्ट है कि भारत ने कृषि वस्तुओं के आयात को उदार बनाने को लेकर रियायतें दी हैं।’’
उन्होंने कहा, "यहां तक कि कोई संयुक्त बयान भी जारी नहीं हुआ है। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस घोषणा को आगे बढ़ाया। क्यों? इसके कम से कम तीन कारण हैं…।"
उन्होंने इन "कारणों" का उल्लेख नहीं किया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उन्हें खुशी है कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा था कि दोनों देशों द्वारा ‘शीघ्र’ एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, जिसमें समझौते का विवरण होगा।
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वहीं, ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रमुख अमेरिकी क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर भी सहमति व्यक्त की है।
कैरोलिन ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘ राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बड़ा व्यापार समझौता किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की। दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। भारत न केवल रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रतिबद्ध है बल्कि अमेरिका से तेल खरीदने के लिए भी प्रतिबद्ध है। संभवतः वेनेजुएला से भी जिससे हमें पता है कि अब अमेरिका और अमेरिकी जनता को सीधा लाभ होगा।’’
पीटीआई के इनपुट के साथ
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