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सुमित सरकारः आधुनिक भारत के इतिहासकार, हमेशा न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे

सुमित सरकार का गुरुवार शाम दिल्ली में उनके आवास पर निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। वह भारतीय इतिहास की जांच-पड़ताल की एक शानदार विरासत छोड़ गए हैं, जिसमें उन्होंने लगातार अपनी ही व्याख्याओं पर सवाल उठाए और उनमें सुधार किया।

सुमित सरकारः आधुनिक भारत के इतिहासकार, हमेशा न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे
सुमित सरकारः आधुनिक भारत के इतिहासकार, हमेशा न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे फोटो साभारः आनंद बाजार

इतिहासकारों और इतिहास में रुचि रखने वालों के एक समूह ने प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार के निधन पर शुक्रवार को शोक व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने ‘आधुनिक भारत’ और ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ जैसी उनकी पुस्तकों की प्रतियां सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं।

सुमित सरकार का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार शाम दिल्ली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। वह भारतीय इतिहास की जांच-पड़ताल की एक शानदार विरासत छोड़ गए हैं, जिसमें उन्होंने लगातार अपनी ही व्याख्याओं पर सवाल उठाए और उनमें सुधार किया।

इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर जन्म

इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर 1939 में जन्मे सुमित सरकार ने प्रेसिडेंसी कॉलेज, कलकत्ता और कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई की, जहां उन्होंने बाद में अध्यापन भी किया। इतिहास के प्रोफेसर के तौर पर उनका सबसे लंबा कार्यकाल 1974 से 2004 तक दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में रहा।

उनके कुछ सबसे अहम काम, जैसे ‘बंगाल में स्वदेशी आंदोलन’, ‘आधुनिक भारत: 1885–1947’ और ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ ने उन्हें उपनिवेशवाद, राष्ट्रवाद और आजादी की लड़ाई को अलग-अलग सामाजिक समूहों, वर्गों और जन-आंदोलनों के अनुभवों के जरिए समझने और परखने के मामले में एक विश्वसनीय इतिहासकार के तौर पर स्थापित किया।

लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे

मार्क्सवादी इतिहासकार सरकार स्वदेशी आंदोलन पर अपने अध्ययन और भारतीय राष्ट्रवाद के पारंपरिक, नेता-केंद्रित विवरण को चुनौती देने के लिए जाने जाते हैं। वह 'सबॉल्टर्न स्टडीज कलेक्टिव' के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने प्रभावशाली निबंध ‘द डिक्लाइन ऑफ द सबॉल्टर्न इन सबॉल्टर्न स्टडीज’ में इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह समूह अपने मूल मार्क्सवादी-प्रेरित ‘जमीनी स्तर से इतिहास’ वाले ढांचे से हटकर उत्तर-आधुनिक और आधुनिक-विरोधी अमूर्त विचारों की ओर चला गया था।

सुमित सरकार के निधन की खबर सुनकर उनके पुराने छात्र, साथी और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग उन्हें याद करने के लिए एकत्र हुए। उन्हें एक ऐसे महान व्यक्ति के तौर पर याद किया गया, जिन्होंने कई पीढ़ियों का ऐतिहासिक नजरिया गढ़ा और जो हमेशा न्याय, सच्चाई और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे।

उनके काम को हमेशा याद किया जाएगा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि भले ही वह कभी सरकार के छात्र नहीं रहे हों, लेकिन भारतीय इतिहास की उनकी समझ पर सरकार की पुस्तकों- ‘बंगाल में स्वदेशी आंदोलन', 'राइटिंग सोशल हिस्ट्री' और खासकर 'आधुनिक भारत: 1885-1947’ का गहरा असर पड़ा।

गुहा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘प्रोफेसर सुमित सरकार एक बहुत ही खास और बेहतरीन विद्वान थे, साथ ही वह एक बहुत अच्छे इंसान भी थे... उनके शानदार व्याख्यान भी हैं- ‘पॉपुलर मूवमेंट्स एंड मिडिल-क्लास लीडरशिप इन लेट कॉलोनियल इंडिया’, जिन्हें 'परमानेंट ब्लैक' ने उनकी 'अनकलेक्टेड राइटिंग्स' के संग्रह में दोबारा प्रकाशित किया है। उनके काम ने भारत और विदेशों में इतिहासकारों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और उनके जाने के बाद भी इसे हमेशा याद किया जाएगा।’’

एक महान हस्ती गुजर गई

एक और इतिहासकार, मारिया डी पेन्हा ने कहा कि उन्हें एक बेहतर इतिहासकार बनाने के लिए वे हमेशा उनके ऋणी रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘एक महान हस्ती गुजर गई... भारत के अतीत का हर वह विद्वान, जो समाज में हाशिए पर मौजूद लोगों का अध्ययन करता है, उनका आभारी है कि उन्होंने उनकी आवाज सुनने की जरूरत को समझते हुए इस क्षेत्र के द्वार खोले।’’

राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने ‘‘आधुनिक भारत’’ पुस्तक की अपनी उस प्रति की तस्वीर साझा की, जिसे उन्होंने कई बार पढ़ा है। उन्होंने सरकार को इस बात का श्रेय दिया कि उन्होंने ‘‘हमें सरकारी मिथक से हटकर जटिल सच को खोजने के रास्ते पर आगे बढ़ने’’ में मार्गदर्शन किया।

आम लोगों के जीवन को समझा

इतिहासकार और ‘लेफ्टवर्ड बुक्स’ के संपादक विजय प्रसाद ने एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्हें ‘‘मार्क्सवादी इतिहास-लेखन की गहरी परंपरा का उत्तराधिकारी’’ बताते हुए कहा कि उनके सबसे प्रभावशाली कामों में बंगाल नवजागरण शामिल है, जिसमें उन्होंने आम लोगों के जीवन को समझा और समाज के उन वर्गों में आए बदलावों को बयां किया।

सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने आधुनिक भारतीय सामाजिक इतिहास को नये सिरे से परिभाषित करने और न्याय, सच्चाई और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़े रहने का उन्हें श्रेय दिया।

एक बेहतरीन अकादमिक इतिहासकार

वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि वह छात्रों की एक ऐसी पीढ़ी के लिए सच्चे गुरु थे, जिन्होंने बेहतरीन लेखन शैली के साथ जबरदस्त विद्वता का उदाहरण पेश किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘...उनके शोध कार्य, पुस्तकें, निबंध और व्याख्यान आधुनिक भारत के इतिहास के एक बड़े फलक पर हैं। वह एक बेहतरीन अकादमिक इतिहासकार थे और सही मायनों में एक सच्चे बुद्धिजीवी भी थे, वह अपने विचारों पर अडिग रहते थे, लेकिन उनका व्यवहार बहुत विनम्र था।’’

इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब ने सुमित सरकार को आधुनिक भारत के सबसे प्रतिष्ठित, गहरी समझ रखने वाले और संवेदनशील इतिहासकारों में से एक बताया, जिन्होंने आधुनिक भारत के मुद्दों पर विस्तार से लिखा था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से उनका एक खास स्थान था, क्योंकि 1981 में भगत सिंह और उनके साथियों पर मेरी थीसिस के परीक्षकों में से वह एक थे।’’

अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा

पत्रकार-लेखक रवीश कुमार ने सरकार की कक्षा में शामिल होने का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह कभी भी किसी प्रोफेसर की तरह नहीं आते थे, बल्कि ‘‘सवालों से घिरे एक शर्मीले छात्र’’ की तरह आते थे।

सुमित सरकार के परिवार में उनकी पत्नी एवं इतिहासकार तानिका सरकार और बेटे आदित्य सरकार हैं, जो वारविक विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर हैं।उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा।

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