
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा।
विपक्ष ने SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार-पुलिस को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों को CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने को कहा है
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना रद्द करने, सीजेपी के प्रदर्शन जैसे मामलों पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा। वहीं, विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर भी निर्देश दिए गए।
राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इसमें कथित अनियमितताओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप भी उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने इन याचिकाओं को विभिन्न राज्यों में SIR की वैधता को चुनौती देने वाले पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया।
इस मामले में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी याचिका दायर की है। याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाने और प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच का मुद्दा उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने संबंधी व्यवस्था रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी मोदी सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। इस मामले में अदालत ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
SIR के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू की थी। इसके बाद कुछ याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि हिरासत में लिए गए लोगों में वकील और पत्रकार भी शामिल थे, जिन्हें अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से रोका गया।
प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया है। संबंधित निर्देशों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के फुटेज संरक्षित रखने और अदालत के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने 12 अक्टूबर को बड़ी संख्या में लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे पर याचिका दायर की गई।
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