
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार पर राज्य के हिस्से का फंड रोकने का आरोप लगाया है।
झारखंड विधानसभा परिसर में बुधवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से विभिन्न योजनाओं का अनुदान रोकने की वजह से राज्य सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से डेढ़ हजार करोड़ रुपये का कर्ज मांगा है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। अगर केंद्र सरकार ने बकाया एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये की राशि का भुगतान कर दिया होता, तो हमें कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
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कांग्रेस विधायक अंसारी ने कहा, "हमारे मुख्यमंत्री केंद्र से लगातार राज्य के आदिवासियों और यहां की जनता के हक का पैसा मांग रहे हैं। केंद्र सरकार को कई चिट्ठियां लिखी गई हैं, लेकिन राशि नहीं जारी की जा रही है।"
मंत्री ने दावा किया कि अगले पांच साल के भीतर झारखंड पूरी तरह अपने पांवों पर खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे झारखंड का निर्माण करने जा रहे हैं, जहां सबका सम्मान होगा।"
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर विभेदकारी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका काम सिर्फ हिंदू-मुसलमान करना है।
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झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से राज्य में एनआरसी कराने की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि मरांडी जी व्यक्तिगत तौर पर सेक्युलर मिजाज के व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी विवशता है कि वह बीजेपी की ओर से दी गई स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं।
उन्होंने मरांडी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह झारखंड में "एक भी बांग्लादेशी दिखा दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा"। बांग्लादेशी घुसपैठ की झूठी बात कहकर बीजेपी नेताओं ने झारखंड के मुसलमानों को बदनाम किया है। जब हमारे बच्चे स्कूल जाते हैं तो उन्हें बांग्लादेशी कहा जा रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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