
राजधानी दिल्ली में दो स्वतंत्र महिला पत्रकारों ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में सीएम रेखा गुप्ता से सवाल पूछने पर पुलिस द्वारा जबरन थाने ले जाकर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों के आरोपों को गलत बताया है। वहीं पत्रकारों ने कहा कि वे चिकित्सकीय परीक्षण के लिए एम्स जा रही हैं, जिसके बाद उनकी मेडिकल-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसमें उन्हें आई चोटों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर महिला पत्रकारों के थाने से कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें दोनों को अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोट के निशान दिखाते हुए देखा जा सकता है। एक वीडियो में पीड़िताओं में से एक पत्रकार ने दावा किया कि वो एक निजी अस्पताल में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम को कवर करने के लिए दक्षिण दिल्ली गई थी और उनका इरादा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल करने का था।
पत्रकार ने साकेत थाने से घायल हालत में बनाए वीडियो में आरोप लगाया, "हम दिल्ली की मुख्यमंत्री से सवाल करना चाहते थे। लेकिन हमें हिरासत में ले लिया गया, साकेत थाने ले जाया गया। पुलिस टीम हमें एक कमरे में ले गईं, जहां उन्होंने हमारी बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने हमारा नाम पूछा और जैसे ही उन्हें पता चला कि हम मुसलमान हैं उन्होंने और बेरहमी से हमें पीटा।"
न्यूज पोर्टल 4पीएम से जुड़ी पत्रकार ने दावा किया कि थाने में पुलिस वालों ने जबरन उनके फोन मांगे। एसएचओ और अन्य महिला अधिकारी ने दुर्व्यवहार किया। इसके बाद कई महिला अधिकारियों ने बेरहमी से डंडों और लात से बुरी तरह पीटा। पत्रकार ने अपने चोट दिखाते हुए दावा किया कि उनके पैर और हाथ में चोट लगी है, जबकि उनकी साथी पत्रकार के पैर में चोट लगी है। वीडियो में दिख रहा है कि दूसरी पत्रकार की हालत गंभीर है और वह थाने में ही बेसुध है।
महिला पत्रकारों के वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें तथ्यात्मक रूप से गलत और गुमराह करने वाला बताया। पुलिस ने कहा, "प्रसारित बयान तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। दो महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास अपना स्कूटर खड़ा करके निर्दिष्ट वीवीआईपी मार्ग को बाधित कर दिया था। वाहन हटाने और मार्ग छोड़ने के बार-बार अनुरोध और निर्देश के बावजूद, उन्होंने इसका पालन नहीं किया। वीवीआईपी मार्ग की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के मद्देनजर दोनों महिलाओं को आगे की पूछताछ के लिए स्थानीय थाने ले जाया गया।"
दक्षिण दिल्ली पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अनंत मित्तल के आधिकारिक ‘एक्स’ पेज पर पोस्ट किए गए बयान में कहा गया है, "माननीय मुख्यमंत्री से सवाल पूछने पर मारपीट किए जाने समेत लगाए जा रहे सभी दावे पूरी तरह झूठे, भ्रामक और निराधार हैं। लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील है कि वे अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं को साझा या प्रसारित करने से बचें।
कांग्रेस ने महिला पत्रकार का वीडियो शेयर करते हुए कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, बीजेपी सरकार और दिल्ली पुलिस की गुंडई। 4PM की पत्रकार शाहीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मारपीट की। शाहीन का कहना है- जब पुलिसवालों को पता चला कि वो मुसलमान हैं तो उन्हें और बेरहमी से मारा गया। उनके शरीर पर जख्म हैं.. कैमरापर्सन भी बेसुध पड़ी है। एक पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव कतई सही नहीं है, दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इसकी उम्मीद कम है, क्योंकि- बीजेपी सरकार में सवाल पूछना गुनाह हो चला है।
आम आदमी पार्टी (आप) ने इस घटना को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने पर दिल्ली पुलिस ने दो महिला पत्रकारों को बहुत बेरहमी से पीटा है। महिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शर्म आनी चाहिए।"
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