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मुंबई की तिरंगा रैली में उद्धव ठाकरे बोले- देशभक्तों ने अंधभक्तों को हराया, छात्रों ने लिखा स्वर्णिम अध्याय

मुंबई की तिरंगा रैली में उद्धव ठाकरे ने छात्रों के आंदोलन को बीजेपी के खिलाफ बड़ी लड़ाई की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि वोट चुराए जा सकते हैं, लेकिन लोग नहीं।

फोटो: @ShivSenaUBT_
फोटो: @ShivSenaUBT_ 

शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन करने के लिए छात्रों की सराहना करते हुए रविवार को कहा कि यह प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है और इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि ‘‘वोट चुराए जा सकते हैं, लेकिन लोग नहीं।’’

मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘तिरंगा’ रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘देशभक्तों ने अंधभक्तों को हरा दिया है।’’

इस रैली में युवाओं की भारी भीड़ जमा हुई, जिनमें ज़्यादातर कॉलेज के छात्र थे। वे राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे थे और संविधान के पोस्टर लिए हुए थे, तथा धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़े का ‘‘जश्न’’ मना रहे थे।

सुबह से हो रही हल्की बारिश के बीच रेनकोट पहने और छाते लिए युवा संविधान निर्माता बी.आर. आंबेडकर के पोस्टर तथा सोशल मीडिया के उन ‘मीम्स’ के पोस्टर लिए हुए थे जो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान वायरल हुए थे।

दिल्ली में 22 जुलाई को छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद से महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन देखे गए, जिनमें मुंबई का शिवाजी पार्क लोगों के जमा होने का मुख्य केंद्र रहा।

उद्धव बोले- युवाओं ने लिखा लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय

रविवार को रैली के दौरान उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक विवाद के बीच कथित रूप से आत्महत्या करने वाले 21 अभ्यर्थियों की याद में एक मिनट का मौन रखा।

उद्धव ने कहा कि युवाओं ने अपनी एकता का प्रदर्शन करते हुए भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में ‘‘स्वर्णिम अध्याय’’ लिखा है और छात्रों का यह आंदोलन अब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का रूप ले चुका है।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने कहा, ‘‘लोग हमसे पूछते हैं कि जब चुनाव में अभी तीन साल का समय बचा है तो हम इस बारे में बात क्यों कर रहे हैं। इसका जवाब सीधा है। मोदी को अब यह अहसास हो चुका है कि वोट चुराए जा सकते हैं, लेकिन लोग नहीं।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘आज कोई चुनाव नहीं जीता गया है। देशभक्तों ने अंधभक्तों को हरा दिया है। यह एक बड़े संघर्ष की शुरुआत है। यह लड़ाई भाजपा और भारत के बीच है।’’

प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर साधा निशाना

उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहता हूं कि अब देश पर ध्यान देने का समय आ गया है। आपके मंत्री राजनीतिक दलों को तोड़ने में व्यस्त हैं। उनसे कहिए कि वे देश के लिए काम करना शुरू करें।’’

प्रधान ने शनिवार को इस्तीफ़ा दे दिया, जिसके बाद कॉजपा ने अपना 36 दिन से जारी आंदोलन वापस ले लिया। इस आंदोलन ने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक के मुद्दों पर लाखों लोगों को एकजुट करने का काम किया।

उद्धव ठाकरे ने यह सवाल भी उठाया कि प्रधान को केंद्रीय मंत्रिमंडल से पहले ही क्यों नहीं हटाया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहता हूं कि अपने पसंदीदा धर्मेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाना कितना पीड़ादायक था? क्या यह पीड़ा उस पीड़ा से बड़ी थी जो उन छात्रों के परिवारों ने तब सही जब उनके बच्चों ने अपनी जान दी थी? मैं उस दर्द को नहीं भूल सकता और कभी नहीं भूलूंगा।’’

युवाओं से आंदोलन जारी रखने की अपील

युवाओं से अपना अभियान जारी रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ये जो अलख जगाई है उसे समाप्त मत होने देना। सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार को बर्दाश्त मत करना। आपने जनता की ताकत दिखाई है। इस देश को दोबारा किसी को कमजोर मत करने देना।’’

सरकार पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि वित्त मंत्री गिरते रुपये और बढ़ती महंगाई पर बात नहीं करतीं, लेकिन प्रश्नपत्र लीक के ‘‘फायदे’’ बताती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को देश की सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन वह प्रधान का बचाव कर रहे हैं।’’

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर तंज कसते हुए ठाकरे ने कहा कि ‘‘गड्ढा मंत्री’’ इथेनॉल (ई20 पेट्रोल) की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से यह अगला मुद्दा है।’’

राज ठाकरे, आदित्य ठाकरे और रोहित पवार ने भी रखी अपनी बात

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की सफलता ने साबित कर दिया है कि आज की ‘जेन जेड’ सरकार को चुनौती दे सकती है।

उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस का आभार जताया और कहा कि पूरे देश ने ‘‘महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच का अंतर’’ देख लिया है।

शिवाजी पार्क में आयोजित सभा में शामिल कुछ लोगों ने कहा कि वे प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र की जीत है।’’

वहीं, एक अन्य छात्रा ने कहा कि वह उन ‘‘21 नीट अभ्यर्थियों’’ को श्रद्धांजलि देने आई है, जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

इस संबंध में एक युवा ने कहा कि केवल एक इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और शिक्षा प्रणाली में पूरी तरह बदलाव की जरूरत है। उसने कहा, ‘‘मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन सरकार हमारी जीत का श्रेय हमें नहीं देना चाहती।’’

बाद में, शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई ने एकजुट होकर अपने हाथों में तिरंगा लेकर अपनी आवाज उठाई है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘तानाशाह हिल गया है। यह युवाओं की ताकत है। उन्हें किसी के निर्देश की जरूरत नहीं है। वे जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए। मुंबई की प्रतिक्रिया जबरदस्त रही है।’’

आदित्य ठाकरे ने कहा कि बहुत से लोग इस बात से नाराज हैं कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20 पेट्रोल) को उन पर जबरन थोपा गया है। उन्होंने कहा कि नए भारत में युवा सवाल पूछते रहेंगे लेकिन सरकार को इन सवालों का जवाब देने की आदत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार से सवाल पूछना देश विरोधी होना नहीं है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां वापस ली जानी चाहिए। इस सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।’’

सभा में शामिल हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा कि सत्ता और अहंकार को ‘‘जनता की ताकत’’ के सामने झुकना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अब युवाओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और परिसीमन के खिलाफ भी आवाज उठानी होगी।

पवार ने कहा, ‘‘युवा शक्ति ने एकजुट होकर व्यवस्था के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष का नेतृत्व किया।’’

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