उत्तर प्रदेश के संभल जामा मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निचली अदालत को निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत इस मामले में कोई एक्शन न ले। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बिना कुछ भी न किया जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि न ही सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट खोलेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह सर्वोच्च न्यायालय आने से पहले हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? मस्जिद कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की गई थी, जिसमें निचली अदालत द्वारा सर्वे के आदेश दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या 227 के तहत हाईकोर्ट जाना उचित नहीं है? बेहतर होगा कि हम इसे यहीं लंबित रखें। आप अपनी दलीलें उचित पीठ के सामने दाखिल करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार संभल में शांति, सद्भाव बनाए रखने और दोनों समुदायों के सदस्यों को शामिल कर शांति समिति गठित करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के उत्पात और हिंसा के खिलाफ है।
संभल मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए कहा कि सर्वे रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाए और इसे सील बंद लिफाफे में रखा जाए। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को यह भी अवसर दिया कि वह निचली अदालत के आदेश को उच्च अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
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संभल विवाद मामले पर हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें अदालत ने शांति बनाए रखने के प्रति अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह शांति बनाए रखे और मस्जिद कमेटी को भी उच्च न्यायालय में जाने का मौका दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की पूरी स्वतंत्रता है। अगर वह तीन दिन के भीतर याचिका दायर करते हैं, तो मामला उच्च न्यायालय में लिस्टेड किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्देश नहीं आता, तब तक ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया को रोक दिया जाए।
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इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो रिपोर्ट है, वह सील लिफाफे में दाखिल की जाए और इस पर कोई रोक नहीं है। इस आदेश के बाद, अब ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक रहेगी, जब तक इलाहाबाद हाई कोर्ट अपने निर्देश नहीं देता। मुस्लिम पक्ष ने 19 नवंबर 2024 के आदेश को समाप्त करने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अभी स्वीकार नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी प्रक्रियाएं हाई कोर्ट के माध्यम से ही चलेंगी और मुस्लिम पक्ष को उच्च न्यायालय में अपील करने का मौका मिलेगा।
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दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के संभल जामा मस्जिद सर्वे की रिपोर्ट शुक्रवार को जिला न्यायालय में पेश नहीं हो सकी। कोर्ट कमिश्नर ने रिपोर्ट पूरी न होने की बात बताते हुए 10 दिन का समय मांगा। रिपोर्ट अब 8 दिसंबर को पेश होगी। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
कोर्ट कमिश्नर रमेश चंद्र राघव ने बताया कि सर्वे की रिपोर्ट अभी पूरी नहीं हुई है। कोर्ट से 10 दिन का समय मांगा है। इस मामले की सुनवाई 8 जनवरी को होगी। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को पहला सर्वे और 24 को दूसरे सर्वे के दौरान हिंसा हो गई, इस कारण रिपोर्ट पूरी नहीं हो सकी। आज वो जमा भी नहीं हो सकी है। इसके कारण अदालत से समय मांगा है।
शाही जामा मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता ने बताया कि हम मस्जिद की ओर से कोर्ट में पेश हुए और अनुरोध किया कि मामले से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां हमें दी जाएं और अदालत ने वही आदेश दिया। सर्वे रिपोर्ट आज जमा नहीं की गई। सर्वे टीम ने रिपोर्ट देने के लिए समय बढ़ाने की मांग की है। अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट में वादी पक्ष के वाद पत्र और उसके साथ लगाए सभी दस्तावेजों की कॉपी मांगी है। एप्लिकेशन लगाया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई आठ जनवरी को तय की है।
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बता दें, संभल की जामा मस्जिद में हरिहर मंदिर का दावा पेश करने के बाद मस्जिद में कराए जा रहे दूसरे चरण के सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी। पुलिस का कहना है कि इस दौरान मस्जिद के पास अराजक तत्वों ने सर्वे टीम पर पथराव कर दिया। देखते ही देखते माहौल बिगड़ता चला गया। पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अराजक तत्वों को चेतावनी भी दी। हिंसा के दौरान 4 लोगों की मौत भी हुई। इस मामले में गुरुवार को तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिसमें अभी तक 31 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
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