
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए अमेरिका से एक बुरी खबर आई है। अमेरिका के एक जज ने शुक्रवार को न्याय विभाग (अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) को भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप वापस लेने के अपने फैसले का स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। जज ने अडानी की कानूनी टीम के मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने के अनुरोध को तत्काल मंजूरी देने से इनकार कर दिया। जज ने अमेरिकी न्याय विभाग से पूछा है कि वे केस क्यों छोड़ना चाहते हैं।
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न्याय विभाग ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाएगा। बुधवार को अडानी के वकीलों ने ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला जज निकोलस गरौफिस से मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने का अनुरोध किया। जिस पर अपना फैसला सुनाते हुए अमेरिका के पूर्वी न्यूयॉर्क जिले के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज निकोलस गराफिस ने कहा कि न्याय विभाग का बयान बहुत छोटा, साधारण और बिना ठोस आधार वाला है। इससे अदालत को कोई निष्कर्ष निकालने या फ़ैसला करने में मदद नहीं मिलती। जज ने न्याय विभाग को 13 जुलाई तक समय दिया है कि वे अपना फैसला बदलने के पीछे का पूरा कारण और जानकारी अदालत को दें।
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अडानी पर 2024 में दायर आरोपों में कथित तौर पर अडानी ग्रुप की एक सहायक कंपनी द्वारा सौर ऊर्जा संयंत्र विकास परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की सहमति का आरोप था। इसके अलावा, उन पर अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार-विरोधी प्रथाओं के बारे में भ्रामक आश्वासन देकर गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया था।
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बता दें कि, ट्रंप सरकार के न्याय विभाग ने 18 मई को अदालत से कहा था कि वे इस केस पर और पैसे और समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक केस बंद किया जाए।
बाद में ऐसी खबरें आईं कि केस वापस लेने के लिए अडानी की ट्रंप सरकार से कोई डील हुई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि गौतम अडानी के वकीलों ने न्याय विभाग से कहा था कि अगर केस बंद कर दिया जाए तो वे अमेरिका में 10 अरब डॉलर यानी क़रीब 84000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे और 15000 नौकरियां पैदा करेंगे।
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