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उत्तर प्रदेशः SIR के दावों से उलट जमीनी हालात

ड्राफ्ट मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम नहीं आया है, उनसे डिक्लरेशन भरवाने के सवाल पर विवाद है। इलेक्शन कमीशन लोगों से यह घोषणा करने को कह रहा है कि उनका नाम किसी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में नहीं है।

उत्तर प्रदेशः SIR के दावों से उलट जमीनी हालात
उत्तर प्रदेशः SIR के दावों से उलट जमीनी हालात फोटोः सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश में जारी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के एक्स हैंडल से 11 जनवरी को ट्वीट किया गया कि 'आज शाम 5 बजे तक उत्तर प्रदेश के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर BLO ड्राफ्ट मतदाता सूची के साथ उपस्थित है। उसके पास पर्याप्त संख्या में फ़ॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र भी उपलब्ध है। सभी उत्तर प्रदेश वासियों से आग्रह है कि आज अपने-अपने बूथ पर जाकर उपलब्ध ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जाँच लें और यदि आपका नाम उसमें नहीं है तो फ़ॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र भरकर BLO को दे दें जिससे अंतिम मतदाता सूची में आपका नाम अवश्य आ जाए। यदि ड्रॉफ्ट मतदाता सूची में आपका नाम है परंतु आपके विवरण में त्रुटियां है तो फ़ॉर्म 8 भरकर BLO को दे दें जिससे वो त्रुटियां ठीक हो जाएं।'

यह ट्वीट राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया में ड्राफ्ट लिस्ट के प्रकाशन के बाद इलेक्शन कमीशन के क्रियाकलापों का सार है। हालांकि चुनाव आयोग के दावों के उलट जमीनी हालात कुछ और हैं। 11 जनवरी को ही नवजीवन मेरठ जिले की किठौर विधानसभा के खरखौदा ब्लॉक में था। स्थानीय निवासी अजरू ने बताया कि यहां मौजूद पी.एस.आध स्कूल पोलिंग बूथ है और उन्होंने कन्फर्म किया कि यह स्कूल सुबह से बंद है। यहां कोई बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) नहीं आया। सुबह से ताला बंद है। अजरू ने कहा कि कल सोमवार है, उसी दिन यह खुलेगा।

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इसी के बगल में सौ मीटर की दूरी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय, आड़ भी है। वहां भी ताला बंद था और लोगों ने बताया कि यहां सुबह से कोई नहीं आया। यह मेरठ जिले के ग्रामीण इलाकों का हाल है। इसी ब्लॉक में एक गांव है मुन्डाली, जहां गवरनर रहते हैं। पेशे से किसान और छोटी सी परचून की दुकान चलाने वाले गवरनर बताते हैं कि उन्होंने फॉर्म भरा था, लेकिन उनकी पत्नी नफीसा और बेटे का फॉर्म नहीं आया। फॉर्म भरने के बावजूद गवरनर का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया है। इस बारे में जब उन्होंने बीएलओ से पूछा तो कहा गया कि जब फॉर्म भरा जाएगा तो आपका फॉर्म भी भरवा देंगे।

हमने मुन्डाली की बीएलओ प्रियंका से फोन पर बात की तो बताया गया कि गवरनर का मकान नंबर नहीं था, इसलिए उनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया। हालांकि इस संदर्भ में मुलाकात के सवाल पर प्रियंका ने कहा कि उनके घर पूजा है और वह उसी काम में व्यस्त हैं। तब शाम के लगभग 4 बज रहे थे, और उन्होंने 1 घंटे बाद फ्री होने की बात कही, और तब शाम के 5 बज जाते। बीएलओ प्रियंका के लिए सीआईओ यूपी द्वारा तय डेडलाइन का समय समाप्त हो जाता।

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मुन्डाली के ही एक दूसरे मुहल्ले में बानो का परिवार रहता है। उनके पांच बेटे और चार बहुओं को मिलाकर परिवार में कुल ग्यारह लोग हैं। मगर इनमें से किसी का एन्युमरेशन फॉर्म नहीं आया। बीएलओ ने बानो को बताया कि उनके परिवार का फॉर्म नहीं आया है। जीवनयापन के लिए मजदूरी करने वाली बानो कहती हैं कि किसी को उनके परिवार की परवाह नहीं है। बीएलओ और प्रधान के अलावा उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी संपर्क किया, लेकिन हल नहीं निकला। आक्रोशित स्वर में वह अपनी बात खत्म करती हैं कि फॉर्म मिलता तब ना भरती! हालांकि मुन्डाली जैसे ग्रामीण इलाके से निकलकर मेरठ शहर विधानसभा के अंदरूनी हिस्सों में घूमिए तो बीएलओ टकरा जाते हैं। कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी बताते हैं कि उन्होंने 35 से ज्यादा लोगों के फॉर्म 6 भरवाए हैं। इनमें एक दर्जन से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनका ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं आया है।

जाहिदपुर में समाजवादी पार्टी के बीएलए अशरफ गनी कहते हैं कि लोग हर रोज पोलिंग बूथ पर जा रहे हैं, लेकिन बीएलओ मिलते नहीं हैं। बूथ लेवल ऑफिसर का कहना है कि वे सिर्फ रविवार को ही पोलिंग बूथ पर मिलेंगे। बीएलओ तनुज कुमार कहते हैं कि चुनाव आयोग की ओर से निर्देश मिला है कि जिन पुराने वोटरों का ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं आया है उनका फॉर्म 6 भरा जाए। इस संदर्भ में मतदाताओं से 2003 की वोटर लिस्ट से संबंधी की क्रमांक संख्या और भाग संख्या के बारे में वह कहते हैं कि किसी भी संबंधी (दादा/दादी, नाना/नानी, पिता/पति) की जानकारी दी जा सकती है। उनका जोर है कि वोट बहुत कीमती है इसलिए सबका वोट बनना चाहिए। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जिनकी उम्र 2003 में 18 साल से कम थी और उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था। साथ ही 2003 से पहले ही दादा-दादी और माता-पिता का देहावसान हो चुका था।

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हालांकि, ड्राफ्ट मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम नहीं आया है, उनसे डिक्लरेशन भरवाने के सवाल पर विवाद है। इलेक्शन कमीशन लोगों से यह घोषणा करने को कह रहा है कि उनका नाम किसी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में नहीं है। कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल ने रेडिफ डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में कहा कि पुराने मतदाता फॉर्म 6 भरकर नए वोटर के रूप में फिर से जुड़ सकते हैं, लेकिन ऐसा करते ही पुरानी मतदाता सूची से रिकॉर्ड अलग हो जाएगा। मेरे अपने मामले में पिछले 35 वर्ष का रिकॉर्ड मिट जाएगा।’’

कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य सप्पल ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर की मसौदा सूची जारी होने के बाद दावा किया था कि उनका और उनके परिवार के सदस्यों के नाम एसआईआर से गायब हैं, जबकि उनके पास सारे कागजात हैं और 2003 की मतदाता सूची में भी उनके नाम थे। सप्पल ने अपना नाम साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित कराया था।

चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता को जवाब देते हुए बताया कि बीएलओ ने अपना काम नियम मुताबिक ही किया है और उन्हें फॉर्म 6 भरना होगा। चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर का यह भी कहना है कि फिलहाल एसआईआर का प्रारंभिक चरण ही पूरा हुआ है, अभी अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह फ़र्क नहीं पड़ता कि आपका नाम मसौदा सूची में आया था कि नहीं। फ़र्क इस बात का पड़ेगा कि आपका नाम अंतिम मतदाता सूची में है या नहीं।’’

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इस पर सप्पल ने जवाब दिया, ‘‘मेरा मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना नहीं था, इसीलिए स्वयं मैंने सही कारण बताया था। मैंने पुराने पते से नाम काटने पर आपत्ति भी नहीं की और बीएलओ को भी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया, क्योंकि मैं जानता था उसकी कोई गलती नहीं थी। मेरा सवाल चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके प्रावधान पर है, जिसमें नए पते पर पुराने वास्तविक मतदाता का नाम दर्ज करने का कोई सिस्टम ही नहीं है।’’

सप्पल के उलट उत्तर प्रदेश के आम लोगों को इसकी परवाह नहीं है, और वे फॉर्म 6 भरने के लिए तैयार हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में ना हो।

ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग की ड्राफ्ट मतदाता सूची में कोई अशुद्धि नहीं है। मेरठ दक्षिण विधानसभा के बूथ संख्या 14 की वोटर लिस्ट में अशुद्धियां नंगी आंखों से भी पकड़ी जा सकती हैं। 2017 और 2022 में मेरठ दक्षिण से विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले आदिल चौधरी ने दो नौजवानों की ड्यूटी वोटर लिस्ट चेक करने के लिए लगा रखी है। यह युवा बताते हैं कि वोटर लिस्ट में अशुद्धियां बहुत हैं और उन्हें मैनुअली चेक करना बहुत मुश्किल है। वे बताते हैं कि आरती नाम की महिला का वोट दो बार है। एक में उनके पति के नाम से तो दूसरे में ससुर के नाम से।

आरती के पति हर्ष कुमार हैं, लेकिन ससुर के नाम को लेकर उलझन है। कहीं उनका नाम सहस्त्रपाल है तो कहीं शेनसरपाल तो कहीं सहन्सरपाल। दिलचस्प यह है कि उनका नाम कुल 5 मतदाताओं के लिए इस्तेमाल हुआ है और जितनी बार भी लिखा गया है अलग तरीके से लिखा गया है। आदिल चौधरी को मतदाता सूची चुनाव आयोग से मिली है इसलिए इसमें मतदाताओं की फोटो भी है, लेकिन वे अपने बीएलए को इसके वेरिफिकेशन के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड करवाते हैं तो फिर उस सूची में फोटो नहीं आता है। इसलिए वेरिफिकेशन में बूथ लेवल एजेंट फोटो की जांच नहीं कर सकता, हालांकि उस पर लिखा होता है कि मतदाता का फोटो उपलब्ध है।

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उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर भले ही यह दावा करते हों कि बीएलओ के पास पर्याप्त संख्या में फॉर्म-6 मौजूद है, मगर आदिल चौधरी का दावा है कि 11 जनवरी को चली स्पेशल ड्राइव में पहुंचे बीएलओ के पास पर्याप्त संख्या में फॉर्म-6 मौजूद नहीं थे। और जिन लोगों को एसआईआर का एन्युमरेशन फॉर्म नहीं मिला था, उन्हें पता है कि उनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है। इसलिए लोग फॉर्म 6 भरने को आतुर हैं। उनकी शिकायत है कि मेरठ साउथ के बीएलओ को एन्युमरेशन फॉर्म भी देर से मिला था और अब नोटिस में भी देर हो रही है। अगर सही टाइम पर फॉर्म मिल गया होता तो लोगों को राहत मिलती। मगर हर मामले में देर हो रही है। आदिल चौधरी इस बात को स्वीकारते हैं कि पुराने वोटर से फॉर्म 6 भरवाना गलत है, लेकिन वोट बनवाना है तो क्या कर सकते हैं। 

चुनाव आयोग द्वारा चलाई गई इस विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण प्रक्रिया में एक और चीज हुई है कि हर विधानसभा में बूथ संख्या बढ़ गई है। मई 2025 में चुनाव आयोग ने बूथ वार मतदाताओं की संख्या को 1500 से घटाकर 1200 कर दिया था। मेरठ दक्षिण विधानसभा में पहले 488 बूथ थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 545 हो गई है। दिलचस्प है कि जब बूथों की संख्या 488 थी तब मेरठ दक्षिण विधानसभा में वोटरों की संख्या लगभग 5 लाख 10 हजार थी। एसआईआर प्रक्रिया में वोटरों की संख्या 1 लाख 56 हजार कम हुई है, फिर बूथ की संख्या इतनी कैसे बढ़ गई। आदिल बताते हैं कि बूथ नंबर 488 पर 545 वोट हैं। बूथ नंबर 52 पर 424, बूथ नंबर 216 पर 399 वोटर हैं। होना तो यह था कि चुनाव आयोग एक क्राइटेरिया तय कर लेता, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। समझ नहीं आ रहा कि चुनाव आयोग की मंशा क्या है?

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