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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी के आरोप-पत्र पर तृणमूल का अमित शाह पर निशाना

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक बार फिर ज़ुबानी जंग 28 मार्च शनिवार को देखने को मिली। दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-पत्र जारी किए।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अप्रैल जैसे नजदीक आ रही है, चुनाव माहौल गर्माता जा रहा है। हर गुज़रते दिन और खासतौर से मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसा के बाद माहौल काफी गर्म हो गया है।

शनिवार दोपहर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ एक 'चार्जशीट' जारी किए जाने के कुछ घंटों बाद ही, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी, अमित शाह और केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी खुद की एक चार्जशीट जारी करके पलटवार किया है। गृह मंत्री ने दावा किया है कि 2011 से तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन में पश्चिम बंगाल 'भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला' और उद्योगों का कब्रिस्तान बन गया है। उन्होंने लोगों से मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाने और 'भय' की जगह 'भरोसा' लाने की अपील की।

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने इस दावे को दोहराया कि राज्य में एसआईआर को घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें राज्य से बाहर निकालने के लिए किया गया है। गृह मंत्री ने दावा किया, ‘हर अवैध घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और उसे भारतीय ज़मीन से बाहर निकाला जाएगा, और तृणमूल की जगह बीजेपी को लाना ही आबादी में हो रहे बदलावों को रोकने का एकमात्र तरीका है।’ अमित शाह ने याद दिलाया कि एनडीए ने पहली बार 2015 में जम्मू-कश्मीर में, 2016 में असम में, 2017 में मणिपुर, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में, 2018 में त्रिपुरा में और 2024 में ओडिशा में सरकार बनाई। उन्होंने दावा किया कि 2026 में बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी।

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अमित शाह के बयानों और दावों पर तृणमूल ने तुरंत ही पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि ‘मोटा भाई, हमें जवाब चाहिए’।  एक घंटे के अंदर ही तृणमूल ने बीजेपी की कमियों की अपनी लिस्ट जारी कर दी। पार्टी ने बीजेपी के इस दावे को कि राज्य घुसपैठियों से भरा है, बंगाल और बंगालियों का अपमान और कलंक बताया। पार्टी ने ज़ोर देकर कहा, ‘क्योंकि अवैध घुसपैठ से सबसे ज़्यादा फ़ायदा बीजेपी को ही होता है। वे बंगाली और बांग्लादेशी के बीच की लकीर को धुंधला करना चाहते हैं, ताकि वे अपने नफ़रत भरे असम-स्टाइल डिटेंशन कैंप मॉडल को बंगाल में ला सकें।’ साथ ही, पार्टी ने गृह मंत्रालय की घुसपैठ रोकने में नाकामी पर भी सवाल उठाए।

तृणमूल कांग्रेस ने अपने आरोपपत्र में संसद में सरकार के एक जवाब का भी ज़िक्र किया है, जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनियों की संख्या 2010 में 1.21 लाख से बढ़कर जुलाई 2025 में 2.50 लाख हो गई है। पार्टी ने औद्योगिक ठहराव और गिरावट के दावों को गलत साबित करते हुए कहा, "2020 और 31 जुलाई 2025 के बीच, बंगाल में 49,040 नई कंपनियां बनीं, जबकि सिर्फ़ 1,742 कंपनियों ने अपने रजिस्टर्ड दफ़्तर राज्य से बाहर शिफ़्ट किए।"

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इस बीच तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने अमित शाह पर आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ़ राज्य सरकार के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि बंगाल के लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट जारी की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने बंगालियों को 'बांग्लादेशी' और 'रोहिंग्या' बताकर उन पर ठप्पा लगा दिया है और बीजेपी-शासित राज्यों में उन्हें परेशान किया है। उन्होंने कहा कि बंगालियों को अलग-अलग चरणों में 'अपराधी' बनाया गया है—पहले उनका अपमान किया गया, फिर उन्हें उनके हक़ से वंचित किया गया, फिर उन्हें अपराधी का लेबल दिया गया और आख़िर में उन्हें परेशान किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शाह अपने ही काम के रिकॉर्ड से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

मोइत्रा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह शाह के अधिकार क्षेत्र में काम करता है और इसका इस्तेमाल ज़्यादातर विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया जाता है। उन्होंने 2014 से अब तक के लगभग 6,000 ईडी मामलों का ज़िक्र किया, जिनमें से 98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ थे और सिर्फ़ 25 मामलों में सज़ा हुई; उन्होंने इस सज़ा दर को बेहद कम बताया। उन्होंने इसकी तुलना पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ लंबित कई एफआईआर और बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण सिंह से जुड़े मामले से की, और यह तर्क दिया कि सत्ताधारी व्यवस्था में शामिल ताक़तवर लोग गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई से बचे रहते हैं।

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इसके अलावा ब्रात्या बसु ने भी अपने हमले का दायरा बंगाल से बाहर तक बढ़ाया और कहा कि बीजेपी को राज्य में कानून-व्यवस्था पर लेक्चर देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, जबकि केंद्र की अपनी ही रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान महिलाओं के लिए सबसे ज़्यादा असुरक्षित राज्यों में से हैं। उन्होंने बीजेपी पर बंगाल का बकाया रोकने, "घुसपैठियों" वाली भाषा का इस्तेमाल करने और शासन की असली नाकामियों को दूर करने के बजाय राज्य को एक राजनीतिक 'पंचिंग बैग' की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

उन्होंने मणिपुर, बृज भूषण, उन्नाव और हाथरस के मुद्दों पर भी सवाल उठाए और कहा कि बीजेपी बंगाल के बारे में तो ज़ोर-शोर से बात करती है, लेकिन जिन राज्यों में उसकी अपनी सरकार है, वहाँ के बारे में चुप रहती है। ब्रात्य ने दावा किया कि बीजेपी नेता बंगाल जाकर वहां की आबादी और सुरक्षा के बारे में बातें करते हैं, जबकि दूसरी तरफ देश में लाल किले के पास और संसद के अंदर धमाकों का डर बना हुआ है; और उन्होंने यह भी पूछा कि पहलगाम में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कौन ज़िम्मेदार है।

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टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी कहा, "बीजेपी सरकार के खिलाफ चार्जशीट पहले ही आ चुकी है और बंगाल की जनता ने सुनवाई भी पूरी कर ली है। वे 4 मई को, यानी चुनाव नतीजों के दिन, अपना फैसला सुनाएंगे।"

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुजीत चटर्जी के अनुसार, "तृणमूल की जवाबी चार्जशीट महज़ एक खंडन नहीं है, बल्कि यह नैतिक बढ़त हासिल करने की एक कोशिश है। बंगालियों की गरिमा, केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल, महिलाओं की सुरक्षा, राज्य के बकाया और कथित दोहरे मापदंडों पर ज़ोर देकर, पार्टी ने बहस का रुख बीजेपी के आरोपों से हटाकर बीजेपी के अपने रिकॉर्ड की ओर मोड़ने की कोशिश की है।"

इस बीच, बीजेपी ने मुर्शिदाबाद में रामनवमी के जुलूस के दौरान हुई हिंसा को मुस्लिम सांप्रदायिकता और कानून-व्यवस्था की नाकामी का संकेत बताने की कोशिश की। तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का तुरंत खंडन करते हुए कहा कि इसकी पूरी ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की है, जिसने प्रशासन में फेरबदल करते हुए अनुभवी अधिकारियों की जगह बाहर के लोगों को तैनात कर दिया था। पार्टी ने कहा कि जो कुछ भी हुआ, उसके लिए राज्य सरकार की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है; साथ ही यह भी बताया कि हिंसा के आरोप में जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उनमें बीजेपी और आरएसएस के समर्थक भी शामिल हैं।

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