हालात

हम हैं कामयाब-1: जब आईएएस बनने के ख्वाब की कुर्बानी से अंकुरित हुई 'सेक्रेड लीव्स'

अक़ील अहमद कहते हैं कि ‘सेक्रेड लीव्स’ सिर्फ बिजनेस करने वाली कंपनी का नाम नहीं है, बल्कि एक संस्कृति है, एक टीम है और एक मिशन है।

सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ अक़ील अहमद ( ग्राफिक्स: नवजीवन)
सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ अक़ील अहमद ( ग्राफिक्स: नवजीवन) 

नए साल में ‘नवजीवन’ के पाठकों के लिए एक और नई श्रृंखला पेश की जा रही है। ‘हम हैं कामयाब’ नाम से शुरू की गई यह श्रृंखला उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिखने वालों को ‘सलाम’ पेश करने का बेहतरीन माध्यम है। ‘हम हैं कामयाब’ के तहत कुछ ऐसी कंपनियों या संस्थानों से आपका परिचय कराया जाएगा, जिन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है। हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को एक नई कंपनी या संस्था के संघर्ष और मेहनत की कहानी आपके सामने रखी जाएगी। कंपनियों या संस्थानों के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि वे पंजीकृत हों और 20 साल से अधिक पुरानी न हों। हमारी यह कोशिश न केवल नया स्टार्ट-अप शुरू करने वालों के लिए हौसला बढ़ाने का कारण बनेगी, बल्कि उन लोगों को मार्गदर्शन भी देगी जो अपनी ताकत और क्षमता से नई कंपनी की नींव रखना चाहते हैं।

——————————————

Published: undefined

2012 की बात है, जब 21 साल का एक युवा पत्थर की मस्जिद (पटना, बिहार) से राजधानी दिल्ली पढ़ाई के लिए पहुंचा था। देश की ऐतिहासिक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में जब उसने ‘रूसी भाषा’ में बीए करने का फैसला किया, तो शायद उसने यह सोचा भी नहीं होगा कि वह भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने का एक अहम माध्यम बन जाएगा। इस युवा ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर ‘सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक ऐसी कंपनी खड़ी कर दी, जो आयुर्वेदिक दवाएं भारत से रूस निर्यात करती है। जिस युवा की हम बात कर रहे हैं, उसका नाम अक़ील अहमद है। उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं का निर्यात रूस से जरूर शुरू किया, लेकिन अब अमेरिका और यूक्रेन जैसे देशों में भी निर्यात का सिलसिला शुरू हो चुका है।

सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड की नींव भले ही 2019 में पड़ी, लेकिन इस कंपनी का बीज 2015 में ही बो दिया गया था। उस समय कंपनी का नाम ‘इंसिस ओवरसीज़’ रखा गया। 2015 के अंत में यह कंपनी रजिस्टर्ड हुई और छोटे स्तर पर रूस को दवाओं का निर्यात शुरू हुआ। अक़ील अहमद बताते हैं कि उनकी मुलाकात रूस के एक व्यक्ति से हुई थी, जिसे न केवल आयुर्वेदिक दवाएं चाहिए थीं, बल्कि ऐसा भरोसेमंद व्यक्ति भी चाहिए था जो उनकी जरूरतों को ईमानदारी से पूरा कर सके।

Published: undefined

इस अवसर को अक़ील अहमद ने ‘रूसी भाषा’ के प्रति अपनी रुचि को ‘ज़मीन से आसमान’ तक पहुंचाने का एक बेहतरीन ज़रिया माना, लेकिन यह इतना आसान भी नहीं था। यहां यह उल्लेख जरूरी है कि रूसी भाषा के प्रति अपने प्रेम को चरम पर पहुंचाने के लिए अक़ील अहमद को ‘यूपीएससी’ परीक्षा पास करने का अपना सपना छोड़ना पड़ा, जिसकी तैयारी वह 2015 में शुरू कर चुके थे। यानी सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड का अस्तित्व ‘एक सपने की कुर्बानी’ का फल है।

अक़ील अहमद का कहना है कि ‘सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड’ की सफलता के पीछे ‘इंसिस ओवरसीज़’ का संघर्ष शामिल है। 2015 में जब आयुर्वेदिक दवा का पहला सैंपल रूस भेजा गया, तो उसके बाद 7–8 महीने बहुत ही परीक्षा के थे। कोशिश यह थी कि रूस में कुछ ऐसे संस्थानों से संपर्क हो, जिससे कंपनी को मजबूती मिले और कुछ लोगों को रोजगार भी मिल सके। इस उद्देश्य से एक ‘फेसबुक पेज’ तैयार किया गया, लेकिन उससे कोई खास फायदा नजर नहीं आया। अक़ील अहमद ने बताया कि व्यक्तिगत प्रयासों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल से 2016 के अंत तक मेहनत का असर दिखने लगा। 2019 में यह महसूस हुआ कि वैश्विक स्तर पर व्यापार को आसान बनाने और निर्यात के नियमों व शर्तों का पालन करने के लिए एक ‘प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी की जरूरत है। यही वह मौका था जब ‘इंसिस ओवरसीज़’ ने ‘सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड’ का रूप ले लिया।

Published: undefined

इस कंपनी में पहली नौकरी मोहम्मद सिराज को मिली, जो 2016 से अब तक अक़ील अहमद के नेतृत्व में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। वे ‘परचेज मैनेजमेंट’ की जिम्मेदारी संभालते हैं और उनका कहना है कि हर नए ऑर्डर के साथ उन्हें कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है। कंपनी के एक अन्य कर्मचारी अमित कुमार, जो कि वेयरहाउस मैनेजर हैं, ने कार्यालय के दोस्ताना माहौल का जिक्र किया, जो किसी भी कंपनी की प्रगति के लिए बेहद जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि हर खुशी और त्योहार के मौके पर साथ मिलकर जश्न मनाना अपनापन महसूस कराता है। दीवाली, ईद और होली जैसे त्योहारों में कंपनी के सभी सदस्य जिस तरह एकजुटता दिखाते हैं, वह कार्यालय के माहौल को बेहद खुशनुमा बनाता है।

इस कंपनी में लगभग दो दर्जन लोगों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है। अकाउंट मैनेजर जितेंद्र ने बताया कि कंपनी कुल मिलाकर हर महीने लगभग 8 लाख रुपये वेतन पर खर्च करती है। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर करीब 13 करोड़ रुपये है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कंपनी के कर्मचारी एक सकारात्मक माहौल में मेहनत और प्रगति की कहानी को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि एक दौर ऐसा भी आया था, जब कंपनी को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वह समय था कोरोना महामारी का।

Published: undefined

यह तो सभी जानते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान कई कंपनियां बंद हो गईं और रोजगार के अवसर खत्म हो गए। उस विनाशकारी दौर में ‘सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड’ को स्थिरता देने और कर्मचारियों को हर तरह की परेशानियों से बचाने के लिए अक़ील अहमद ने एक खास कदम उठाया। उन्होंने विदेशों में दवाओं के निर्यात की अपनी मूल सेवाओं के अलावा चीन से कुछ महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपकरणों का आयात शुरू किया, जो एक उत्साहवर्धक कदम साबित हुआ।

अक़ील अहमद का कहना है कि “कोरोना का समय काफी मुश्किलों भरा था। हवाई सेवाएं बंद हो गई थीं और कई कंपनियों ने ऑर्डर रद्द कर दिए थे। ऐसे समय में हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती इस कारोबार को जिंदा रखना, टीम का ध्यान रखना और उनके हौसलों को बनाए रखना था।” वे आगे बताते हैं कि “कोरोना के दौरान सभी परेशान थे। अस्पतालों में भीड़ की वजह से लोग घरों में रहकर इलाज कराने को मजबूर थे। इन हालात को देखकर हमने चीन से जरूरी चिकित्सीय उपकरणों के आयात का फैसला किया, और इस कदम से न सिर्फ कंपनी को फायदा हुआ, बल्कि आम लोगों और छोटे अस्पतालों तक चिकित्सीय उपकरण पहुंचने से कई तरह की राहतें भी मिलीं।”

Published: undefined

अब ‘सेक्रेड लीव्स प्राइवेट लिमिटेड’ दवाओं के निर्यात के लिए नई राहें तलाशते हुए आगे बढ़ रहा है। आगे बढ़ने की इस कोशिश में अक़ील अहमद अपने कर्मचारियों का भी खास ख्याल रखते हैं। वे कहते हैं कि “हमारे कर्मचारी ही हमारी ताकत हैं, इसलिए हमने वर्क-लाइफ बैलेंस का भी खास ध्यान रखा है। यह हमारी कंपनी की विशेषताओं में शामिल है। हम बेझिझक कह सकते हैं कि ‘सेक्रेड लीव्स’ सिर्फ बिजनेस करने वाली कंपनी का नाम नहीं है, बल्कि एक संस्कृति है, एक टीम है और एक मिशन है।”

अक़ील अहमद अपने मिशन पर आगे बढ़ रहे हैं और इस मिशन के दौरान भारत से लेकर रूस तक जो भी रिश्ते बने हैं, उन्हें बेहतर तरीके से निभा भी रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अक़ील अहमद का रूस से रिश्ता अब सिर्फ ‘रूसी भाषा’ और ‘दवाओं’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एक रूसी महिला से शादी भी कर ली है, जिनका नाम लूलू अहमद है।

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined