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कौन होगा अजित पवार का राजनीतिक उत्तराधिकारी?

एनसीपी के विभाजन के बावजूद पवार परिवार राजनीति से अलग एकजुट दिखता रहा है। शरद पवार और अजित दादा कई बार पारिवारिक कार्यक्रमों में एक साथ रहे हैं।

पवार परिवार (फाइल फोटो)
पवार परिवार (फाइल फोटो) 

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी (एपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार का निधन बुधवार को एक विमान दुर्घटना में ऐसे समय में हो गया जब उनकी ओर से अपने चाचा शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) को फिर से मिलाने के प्रयास किये जा रहे थे। पिछले दिनों पुणे में महापालिका के चुनाव एक साथ लड़ते हुए इसकी पहल भी हो गई थी। 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में भी इस पहल को दोहराने की कोशिश हो रही थी और आज सुबह इसी चुनाव के प्रचार के लिए वे बारामती आ रहे थे। लेकिन उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में 66 वर्षीय अजित पवार दादा के नाम से जाने जाते थे। अजित दादा के अचानक निधन के बाद अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर मीडिया में चर्चा होने लगी है। हालांकि, चर्चा यह भी हो रही है कि अजित गुट में बिखराव भी हो सकता है। राजनीति में अजित दादा का जो विशाल व्यक्तित्व था उसके मुकाबले उनकी पार्टी में कोई भी चमत्कारी नेता नहीं है। बावजूद इसके उनके उत्तराधिकारी के रूप में किसी ऐसे शख्स को सामने लाना होगा जो केंद्र और राज्य सरकारों में अपना प्रभाव कायम रख सके, क्योंकि अजित गुट केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में देवेंद्र फडणवीस की सरकार में शामिल है। 

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अजित दादा के पारिवारिक उत्तराधिकारी के तौर पर उनके पारिवारिक सदस्यों में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, पुत्र पार्थ पवार और जय पवार है। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे जैसे नेताओं को भी राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। सुनेत्रा पवार राज्यसभा की सदस्य हैं और बारामती में जमीनी स्तर पर सामाजिक कार्य कर रही हैं।

पुत्र पार्थ राजनीति में विवादास्पद हैं। हाल में भी उनका नाम कथित तौर पर एक जमीन विवाद में आया था। मावल संसदीय क्षेत्र से वे चुनाव हार गए थे। पुत्र जय राजनीति से ज्यादा व्यवसाय में व्यस्त हैं। इन तीनों के पास अजित दादा की तरह करिश्मा नहीं है। पार्टी के अंदर प्रफुल्ल पटेल ने अविभाजित एनसीपी के विभाजन में एक रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी। लेकिन वे भी अजित दादा की तरह आम जनता को मोहित करने की क्षमता नहीं रखते हैं। इस समय प्रफुल्ल पटेल अजित गुट में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता में बने रहने के लिए पवार परिवार बाहरी राजनीतिक उत्तराधिकारी को पसंद करेगा। अजित गुट के तीन सांसद और 41 विधायक हैं तो शरद गुट के पास 8 सांसद और 10 विधायक हैं।

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एनसीपी के विभाजन के बावजूद पवार परिवार राजनीति से अलग एकजुट दिखता रहा है। शरद पवार और अजित दादा कई बार पारिवारिक कार्यक्रमों में एक साथ रहे हैं। अब एक संभावना यह बनती है कि अगर शरद गुट और अजित गुट एक हो जाते हैं तो ऐसे में शरद पवार के अलावा उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले को कमान सौंपी जा सकती है। उनके पास राजनीतिक अनुभव है और वे अजित दादा की कई बातों से सहमत रही हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि अगर दोनों गुट एकजुट हो जाता है तो अजित गुट को केंद्र और राज्य सरकारों से बाहर होना पड़ सकता है। क्योंकि, शरद पवार कह चुके हैं कि उनके जीते जी एनसीपी मोदी सरकार और महायुती में शामिल नहीं होगा।

ऐसे में अजित गुट में फूट पड़ने की संभावना ज्यादा है। अजित गुट के ज्यादातर नेता मोदी के साथ ही रहना चाहते हैं। अजित गुट के नेताओं ने भी पहले इसके लिए शरद पवार पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। लेकिन एनडीए का हिस्सा बने या न बने इस बारे में शरद पवार के फैसले पर सबकी नजर रहेगी।

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वैसे, अजित दादा भी हिंदुत्व की राजनीति पसंद नहीं करते थे और इसीलिए उन्होंने नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय में जाकर मत्था नहीं टेका। इससे यह भी अटकलें लगती रही कि अजित दादा महायुति से बाहर होने वाले हैं।  

फडणवीस सरकार ने अजित दादा वित्त मंत्री भी थे। अगले महीने महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अजित गुट से वित्त मंत्री कौन बनेगा। हालांकि, अभी संकट का समय है तो ऐसे में फडणवीस खुद भी बजट पेश कर सकते हैं। वे पहले भी राज्य का बजट पेश कर चुके हैं।

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