विचार

विष्णु नागर का व्यंग्यः खतरे में रहने का नाम ही अमेरिका है!

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, तो मोदी जी ने तुरंत उनकी हां में हां मिलाई वरना वे खुद खतरे में पड़ जाते। भारत खतरे में पड़ जाए तो कोई समस्या नहीं, मोदी जी पर खतरा नहीं होना चाहिए क्योंकि वे सबसे बड़े राष्ट्रवादी हैं!

खतरे में रहने का नाम ही अमेरिका है!
खतरे में रहने का नाम ही अमेरिका है! फोटोः सोशल मीडिया

भारत को तो केवल पाकिस्तान और चीन से खतरा रहा है, इधर इस सरकार के प्रकट होने के बाद तथाकथित बांग्लादेशियों, प्रवासियों से भी खतरा पैदा हो गया है। पिछले बारह साल से यहां हिंदू सरकार आने के बाद हिंदू भी 'खतरे' में आ गए हैं मगर हमारी सरकार का परम दोस्त अमेरिका तो अट्ठारहवीं सदी से आज तक खतरे में चल रहा है! उसे किसी भी बात से, कहीं भी, कभी भी खतरा हो सकता है! खतरे में रहने का नाम ही अमेरिका है!

आजकल उसे ईरान से खतरा चल रहा है। मान लो कल ईरान से खतरा नहीं रहा तो वह सुरक्षित नहीं हो जाएगा और खतरे वह अपने सिर पर उठा लेगा। जब तक पृथ्वी रहेगी, आकाश रहेगा, वायु और जल रहेंगे, एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और यहां तक कि यूरोप रहेगा, वह खतरे में रहेगा! वह खतरे में रहने और दुनिया को खतरे में डालने के लिए ही पैदा हुआ है!

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उसका खतरा तो उसी दिन से शुरू हो गया था, जब 18वीं सदी से ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन, नीदरलैंड के अपराधी वहां निर्वासित कर दिए गए थे। आते ही इन गोरे अपराधियों को अमेरिका के मूल निवासियों, रेड इंडियनों से खतरा पैदा हो गया! जमीन उनकी, देश उनका और खतरा इन अपराधियों को उन्हीं से!

रेड इंडियनों का सफाया करने के बाद अमेरिका में गुलाम बनाकर लाये गए काले लोगों से इन गोरों को खतरा पैदा हो गया! फिर पता चला कि इन्हें औरतों से भी खतरा है इसलिए गोरी औरतों को भी मताधिकार नहीं दिया गया। बड़ी मुश्किल से 1920 में उन्हें आधा-अधूरा यह अधिकार मिला मगर काली औरतों को मिल कर भी नहीं मिला। 45 साल और संघर्ष करने के बाद उन्हें यह अधिकार मिला! आजाद भारत में यह अधिकार 1950 में ही मिल गया था!

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आजकल यूरोप से भगाए गए अपराधियों के वंशजों को दूसरे देशों से आए प्रवासियों से खतरा है! हमारे देशवासियों को यहां हथकड़ी-बेड़ियों में वापस भेजा गया! पर कोई बात नहीं, आज का अमेरिका, भारत का, मोदी जी का सबसे अच्छा दोस्त है! दोस्त का तो काम ही दोस्त का अपमान करना होता है, इसका बुरा नहीं मानते!

अमेरिका और उसके पक्के से भी पक्का दोस्त इजरायल भी हमेशा खतरे में रहता है। इन दोनों को खतरे में रहने और दुनिया को खतरे में डालने की आदत सी पड़ चुकी है। चैन से बैठने से इन्हें सख़्त परहेज़ है! इनकी तबियत खराब हो जाती है। आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है!

खतरा नहीं तो ये भी नहीं। अभी कल तक अमेरिका को वेनेजुएला से खतरा था तो वहां के राष्ट्रपति को उठाकर अमेरिका अपने यहां ले आया। अमेरिका या तो तख्ता पलटकर राष्ट्रपतियों- प्रधानमंत्री का तत्काल निबटारा कर देता है या फिर अपने देश ले जाकर रेत-रेत कर उन्हें ऊपर भेजने का इंतजाम करता है।

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अभी उसे वेनेजुएला से खतरा नहीं है, मगर मान लो, कल वहां के तेल की लूट के खिलाफ लोग उठ खड़े हो गए तो अमेरिका फिर खतरे में पड़ जाएगा! जहां भी लूट का उसका 'अधिकार' खतरे में पड़ता है, वह खतरे में पड़ जाता है। जो देश स्वतंत्र निर्णय ले, अपने संसाधनों का राष्ट्रीयकरण करे, अमेरिकी लूट के रास्ते बंद कर दे, उसके विरोधी देशों से संबंध रखे, अपने को कम्युनिस्ट घोषित करे, अपनी संप्रभुता का दावा करे तो ये खतरे में पड़ जाते हैं।

रूस से भारत सस्ता तेल खरीदे, अंबानी जी की जबरदस्त कमाई करवाए तो भी अमेरिका को खतरा पैदा हो जाता है। मोदी जी ने उस खतरे को फिलहाल दूर भगा दिया है। रूस से तेल लेना बंद कर दिया है! अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, मोदी जी ने तुरंत उनकी हां में हां मिलाई वरना वे खुद खतरे में पड़ जाते। भारत खतरे में पड़ जाए तो कोई समस्या नहीं, मोदी जी पर खतरा नहीं होना चाहिए क्योंकि वे सबसे बड़े राष्ट्रवादी हैं। उनसे भी बड़े राष्ट्रवादी हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दे दी!

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1959 में क्यूबा में क्रांति हुई, अमेरिका खतरे में पड़ गया। फिदेल कास्रो को मारने के अनगिनत कोशिशें हुईं मगर बंदा बच गया, इसका अफसोस आज तक अमेरिका को है क्योंकि क्यूबा से उसे आज भी खतरा है। उसे अपने सभी पड़ोसी देशों से खतरा है और जो देश उससे हजारों किलोमीटर दूर हैं, उनसे भी खतरा है। उसे पड़ोसी कनाडा तक से खतरा है, जिसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की इच्छा ट्रंप जी प्रकट कर चुके हैं। उसे मैक्सिको से खतरा है। उसे कोलंबिया से खतरा है। उसे ब्राजील से खतरा है। उसे खतरा ही खतरा है।

उसे पहले सोवियत संघ से खतरा था। अब चीन, रूस और उत्तरी कोरिया से स्थायी खतरा है, जिसका इलाज वह अभी तक ढूंढ नहीं पाया है। खतरा है मगर इनसे अभी वह डरा-डरा सा रहता है। उसे सुदूर अफ्रीका में नाइजीरिया से खतरा है क्योंकि वहां के ईसाई खतरे में हैं, जिस तरह हिंदू, पाकिस्तान और बांग्लादेश में खतरे में हैं। उसे अफ्रीका के साहेल क्षेत्र के अमेरिका विरोधी समूहों से खतरा है। उसे अफ्रीका में चीन और रूस का प्रभाव बढ़ने से खतरा है। उसने जिन आतंकी संगठनों को बनाया और बढ़ाया, उनसे भी खतरा है।

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उसे अपने आप से भी खतरा है। उसे अमेरिकी महाद्वीप के हर देश से खतरा है। अपने देश के उन राज्यों से भी खतरा है, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकारें हैं, वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राज्यों की इच्छा के विरुद्ध सेना और नेशनल गार्ड लगा दिए हैं। अमेरिका को अब दुनिया भर में प्रतिष्ठित अपने विश्वविद्यालयों से भी खतरा है। रिपब्लिक पार्टी को वोट न देने वाले वोटरों से भी खतरा है यानी अमेरिका को बाहर से ही नहीं, अंदर से भी खतरा है।

जब तक अमेरिका है, उसे खतरा है। उसे चींटी से खतरा है, हाथी से खतरा है, चूहे से खतरा है। उसे कनेर के फूलों से खतरा है, उसे बिहार के ठेकुआ और मालपुआ से खतरा है, उसे मध्य प्रदेश के कलाकंद और महाराष्ट्र के श्रीखंड और पावभाजी से खतरा है। उसे हिंदी से खतरा है, भिंडी से खतरा है, गरीब के चिथड़ों से खतरा है। उसे आपसे, हमसे और उनसे भी खतरा है! इस व्यंग्य लेख से उसे खतरा है, इसे पढ़ने वालों से उसे खतरा है। इतना दयनीय है अमेरिका, उसे खतरा है!

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