विचार

विष्णु नागर का व्यंग्यः परिसीमन पर नाक कटवाई का शुभ आयोजन, आखिर किसके झांसे में ये कांड कर बैठे महामानव!

न तो संसद भागी जा रही थी, न सांसद और न ये तीनों विधेयक भागे जा रहे थे और न इन्हें और अमित शाह के पद को कोई खतरा था। चुनाव के बाद अधिवेशन बुलाने से न तो अडानी का कोई आर्थिक नुकसान होने वाला था, न ट्रंप इस अधिवेशन को बुलाने की अनुमति देने से इनकार करता!

परिसीमन पर नाक कटवाई का शुभ आयोजन, आखिर किसके झांसे में ये कांड कर बैठे महामानव!
परिसीमन पर नाक कटवाई का शुभ आयोजन, आखिर किसके झांसे में ये कांड कर बैठे महामानव! फोटोः सोशल मीडिया

विद्वानों की बात विद्वान जानें मगर मुझे लगता है कि नरेन्द्र मोदी ने जिद करके पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के बीचोंबीच संसद का विशेष अधिवेशन बुलाने की जो गफलत की, उसके पीछे कोई बड़ी चाल नहीं रही होगी बल्कि मूर्खता पर इनका दिनों-दिन गहरा होता विश्वास रहा होगा। मूर्खता और क्रूरता के बगैर ये चार कदम भी चल नहीं सकते! दो कदम के बाद ही हांफने लगते हैं!

तो किसी ज्योतिषी को इन्होंने बुलाया होगा कि महाराज ये बताएं कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के बहाने हिंदी प्रदेशों पर स्थायी कब्जा करने की जो कूट चाल हम चलना चाहते हैं, वह किस शुभ मुहूर्त में सफल होगी! सच्चा ज्योतिषी वही होता है जो अपने मोटे-तगड़े जजमान के सामने उसके मन की बात कहे। तो उस ज्योतिषी ने तत्काल अमित शाह की उपस्थिति में मोदी जी के सामने कुछ फर्जी जोड़-गुणा-भाग करके बताया होगा कि राजाधिराज, यह शुभ काम आप 16 से 18 अप्रैल के बीच करें तो दुनिया की कोई ताकत आपके इस विजय अभियान को रोक नहीं पाएगी। विपक्ष आपके चरणों में शीश रख देगा और संसद में वह आपकी जय-जयकार इतनी जोर से करेगा कि एनडीए गठबंधन के दल के नेता भी देखते रह जाएंगे!

Published: undefined

यह मुहूर्त हुजूर इतना अधिक लाभकर है कि आप प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की ऐसी अनोखी मिसाल कायम कर जाएंगे जो दुनिया में आज तक किसी ने न की होगी।आप 2049 तक तो देश के प्रधानमंत्री रहेंगे ही रहेंगे और हुजूर, गणना तो यह भी बताती है कि आप उसके बाद भी प्रधानमंत्री बने रहेंगे। अगर आपकी इच्छा इस बीच राष्ट्रपति बनने की हुई तो वह इच्छा भी आप जिस दिन चाहेंगे, ठीक उसी दिन पूरी हो जाएगी। आपकी जन्मकुंडली और आपके हाथ की रेखाएं बताती हैं कि आप सौ वर्ष की उम्र के बाद भी आज की तरह स्वस्थ रहेंगे और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति पद पर रहेंगे और हुजूर योग तो इतने तगड़े हैं कि ऐसा समय भी आ सकता है कि दोनों पदों को आप ही शोभायमान करें। इस जीवन में कोई आपसे ये पद छीन नहीं सकता!

आप बुरा न मानें तो इसके आगे की भविष्यवाणी भी कर दूं कि जब भी आप इस दुनिया से स्वेच्छा से प्रयाण करने का विचार करेंगे, आप पद और उसकी कुर्सी समेत स्वर्ग की ओर प्रस्थान करेंगे। इंद्र आदि देवता आप पर वहां पुष्प वर्षा करेंगे। वहां आपके लिए रेड कार्पेट बिछेगा और देवतागण आपके इतने पीछे चलेंगे कि कैमरे में केवल आप ही आप दिखेंगे!

Published: undefined

भारत देश में चमचों का इतना बड़ा प्रेमी न इसके पहले कभी हुआ है और न इसके बाद होने की संभावना है। उसने आगा देखा, न पीछा और विशेष अधिवेशन बुला लिया। आप ही सोचिए कि न तो संसद भागी जा रही थी, न संसद सदस्य और न ये तीनों विधेयक भागे जा रहे थे और न इन्हें और अमित शाह के पद को कोई खतरा था। चुनाव के बाद अधिवेशन बुलाने से न तो अडानी का कोई आर्थिक नुक़सान होने वाला था, न ट्रंप इस अधिवेशन को बुलाने की अनुमति देने से इनकार करता! ट्रंप से इनकी जो बातचीत पिछले दिनों चालीस मिनट तक हुई है, सूत्रों के अनुसार उसमें भी विशेष अधिवेशन का विषय आया था तो उस भले आदमी ने उदारता दिखाते हुए कहा था कि माई डियर फ्रेंड मोडी, टुमको हम इसकी अनुमटि देता है। टुम जब चाहो, इसे बुलाने को सकटा!

इसके अलावा और क्या कारण रहा होगा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने ऐन चुनाव के बीचोंबीच अपनी नाक कटवाई का यह शुभ आयोजन रखवाया। यह आयोजन बाद में भी तो हो सकता था! ज्योतिषी जी से अगर मोदी जी कहते कि नहीं ज्योतिषी जी महाराज, चुनाव के बाद की कोई तिथि बताइए तो उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी, कि नहीं कह पाता! वह फौरन पोथी पत्रा फिर से निकालता, फिर से फर्जी गुणा-भाग का खेल खेलता और दूसरी तिथि बता देता और उस तिथि को अप्रैल वाली तिथि से भी उत्तम बताता!

Published: undefined

उसके पिताजी का न पहले कुछ जा रहा था, न अब जाने वाला था बल्कि वह तो तीसरी और चौथी तिथि भी बता देता! वह जरूर पहुंचा हुआ ज्योतिषी रहा होगा तो नौ तिथियां अस्वीकार हो जातीं तो दसवीं तिथि भी बता देता। दक्षिणा में वह केवल राज्यसभा की फकत एक सीट मांगता और जिला परिषद की सदस्यता पर राजी हो जाता!

पिछले लगभग बारह साल से पूरे देश को झांसा देने वाला यह महापुरुष इस ज्योतिषी के झांसे में आ गया और यह कांड कर बैठा। पहली बार इतनी तगड़ी मात खा गया। बरसों तक लोग इस पर हंसेंगे। अच्छा चलो एक मिनट के लिए मान लेते हैं कि यह गड़बड़ ज्योतिषी के कारण नहीं हुई बल्कि काफी राजनीतिक गुणा-भाग के बाद हुई। ये विधेयक अगर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के बाद लाए जाते तो भी इतनी ही आसानी से गिर जाते! जब सरकार को बारह साल से हर दिन गिरने में कोई समस्या नहीं तो इन विधेयकों को तो केवल एक दिन में एक साथ गिरना था! इन्हें क्या दिक्कत थी?

Published: undefined

अगर ये दोनों गुजराती भाई सोच रहे थे कि ये विधेयक लाकर और विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक गिरा दिया का हल्ला मचा कर ये ममता बनर्जी या स्टालिन को हरा देंगे तो ये बहुत ही दूर की कौड़ी ला रहे थे। स्टालिन का तो ये कुछ भी करके कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते हैं, इतना ये पहले भी जानते थे। स्टालिन ने तो पहले ही परिसीमन के सवाल पर इनके खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था और इनकी हवा टाइट कर दी थी।

रही ममता बनर्जी तो उन्हें किसी और तरकीब से तो हराने की सोचा जा सकता था मगर इस मुद्दे पर उन्हें हराया नहीं जा सकता। एक तो वह खुद महिला मुख्यमंत्री हैं और दूसरे उन्होंने पहले ही महिलाओं को चुनाव में तैंतीस प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण दे रखा है। ममता के विरुद्ध यह हथियार कारगर नहीं होगा, इतनी अक्ल इनके पास रही होगी, यह मानना चाहिए। हां इस बार खरीद-फरोख्त ये नहीं कर पाए, इसका अफसोस इन्हें जरूर रहा होगा!

तो सवाल यह है कि जल्दबाजी में ये ड्रामा करने से इन्हें क्या मिला, जिसका सेट तैयार नहीं था। प्रापर्टी पूरी नहीं थी और प्रकाश व्यवस्था में‌ भी कमी थी! अभिनेता डायलॉग तक रट कर नहीं पाए थे। बात फिर ज्योतिषी पर आकर अटक जाती है!

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined