
सूत्रों के अनुसार साहेब की हालत आजकल बहुत टाइट चल रही है। बहुत दुखी-दुखी से, उदास उदास से, घबराए-घबराए से रहते हैं। इस हालत में कहीं भी, कुछ भी बोलकर अपनी घबराहट जाहिर करते हैं। कहते हैं कि मुझे कुछ लोग बदनाम करना चाहते हैं। देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। अरे, उनका नाम तो बताओ कि वे कौन दुष्ट हैं! नाम नहीं बताते! नाम बताएंगे तो इनकी हेठी हो जाएगी पर सब जानते हैं कि इनके निशाने पर कौन है? ये नहीं बताते तो हम भी नहीं बताते। हम भी इशारे-इशारे में कह रहे हैं, ये लोग नहीं, वही एक अकेला है, जिसका फोबिया इन्हें दिन-रात खाये जा रहा है।
बताइए, ये कह रहे हैं कि इन्हें बदनाम किया जा रहा है, जैसे दुनियाभर में इनका बड़ा सुनाम है और इनकी सरकार अराजकता नहीं, सुराजकता ला रही है। ऐसी अराजकता तो कभी थी नहीं माननीय, जैसी आपके राज में है। आपके मंत्री, आपके मुख्यमंत्रियों की भाषा खुलेआम गुंडों वाली भाषा है और उनके काम भी इसी तरह के हैं। आपके गृहमंत्री को इतनी भी तमीज नहीं कि विपक्ष के नेता का नाम सही ढंग से ले सकें। उन्हें राहुल बाबा कहते हैं। आप और आपकी सरकार को इंडिया गठबंधन से इतनी तकलीफ़ है कि उसे इंडी गठबंधन कहते हो।
गली-गली में जिनके गुंडों की फौज खड़ी कर रखी है, वे कह रहे हैं कि मेरा नाम बदनाम किया जा रहा है पर आजकल का यही चलन है! पर खैर वे प्रधानमंत्री हैं, जो भी बोलेंगे, शान से छपेगा, शान से गोदी चैनल पर दिखेगा, इसलिए कुछ भी बोलते चले जाओ। वैसे भी अभी पिताजी का राज चल रहा है।
साहेब पिछले कुछ महीनों से विपक्ष से बेहद खौफ खाने लगे हैं। राहुल गांधी का तो उन्हें फोबिया है। भारत के परमाणु कार्यक्रम से लेकर कृषि तक पर जब भी बात होती है तो भी वे छद्म रूप से राहुल-राहुल करते पाए जाते हैं।
आज रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली है, उससे वे सुबह चार बजे से घबराए हुए हैं। कुछ जो उनसे रैली से ठीक पहले मिलकर आए हैं, बता रहे हैं कि साहेब बिना ठंड के भी ऊनी वस्त्रों में थर-थर कांप रहे हैं। कंबल ओढ़कर चार-चार हीटर लगाकर बैठे हैं, फिर भी उनके दांत किटकिटा रहे हैं। उन्हें जाने क्यों लग रहा है कि यह रैली नहीं, समुद्र के पानी का रेला है, जो उन्हें डुबो देगा।
वे आज सुबह सात बजे से टीवी के सामने बैठे हैं और गिन रहे हैं कि अभी तक कितने लोग रामलीला मैदान में आ चुके हैं। हर तीन सेकंड बाद वे उधर नजर घुमाते हैं। 60 सेकंड बीतते न बीतते उन्हें लगता है कि अब तो इतने लोग आ गए हैं कि वे गिन नहीं सकते। डर कर कहते हैं कि ऐ साला, तुम टीवी बंद करो। सब बकवास है। बदमाशी है। मुझे हटाने की साजिश है। बंगले में बैठे-बैठे चुनौती दे रहे हैं कि ओ, अरे इंडीवालों मैं कहीं नहीं जा रहा। उनके सेवक मन ही मन हंस रहे हैं कि साहेब की हालत काफी गड़बड़ है। नरभसा गए हैं।
तीन मिनट भी नहीं बीतते कि साहब फिर से कहते हैं टीवी चालू करो! फिर कहते हैं, बंद करो। फिर चालू, फिर बंद, यह कोई पचास बार करवा चुके हैं। उनका डॉक्टर उनका ब्लडप्रेशर बार बार नाप रहा है और कह रहा है कि सर आप उधर देखना बंद कीजिए। टीवी बंद कीजिए। इतना लोड मत लीजिए वरना ब्लडप्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाएगा और आपको अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा। आपके हेल्थ कार्ड में काला धब्बा लग जाएगा। आपकी बदनामी होगी मगर साहेब तो साहेब ठहरे, किसी की मानते नहीं, इसीलिए तो साहेब हैं!
उन्होंने आज अपने पास अमित शाह को बुलाया था कि आज रैली तक तुम मेरे साथ रहोगे। तुम रहोगे तो मेरी घबराहट कम होगी मगर शाह ने कहा कि सारी, मैं खुद घबराया हुआ हूं। मेरा करियर भी दांव पर लगा हुआ है। मुझे आज रैली की मॉनिटरिंग करने से फुर्सत नहीं है। यह शांतिपूर्ण ढंग से निबट गई तो मेरी बहुत बदनामी हो जाएगी कि मुझे एक रैली भी हैंडल करना नहीं आता। बाद में शाम को मैं आराम से आऊंगा। साहेब ने कहा कि तब तक तो मेरे प्राण निकल जाएंगे। अमित शाह ने कहा कि यह मोदी की नहीं, शाह की गारंटी है कि आपके प्राण इतनी आसानी से नहीं निकलने वाले। जब भी निकलेंगे, बड़ी मुश्किल से निकलेंगे।
कहा जाता है कि साहेब सबकुछ सहन कर सकते हैं मगर अपनी गद्दी को चुनौती देना नहीं, जबकि अभी तो कोई उनकी गद्दी सीधे-सीधे छीन भी नहीं रहा है। अभी तो ज्ञानेश कुमार का नंबर आया है। ज्ञानेश जब भी जाएंगे, उसके बाद अमित शाह का नंबर आएगा। अभी तो ज्ञानेश के जाने में ही समय लगेगा। ऐसा तो है नहीं कि विपक्ष ने कहा, राहुल गांधी ने कहा और ज्ञानेश से कह दिया जाएगा कि भाईसाहब बहुत हो गया, बहुत सहा हमने, अब आप कृपापूर्वक चले जाओ। विपक्ष की रैली आज जबर्दस्त हुई है। प्लीज़ रिजाइन!
अरे मोदी जी, जब आप लोग ज्ञानेश कुमार के लिए अभी इतनी फाइट दे रहे हो तो सोचो, अमित शाह के लिए कितनी दोगे? जान लड़ा दोगे! क्योंकि शाहजी गए तो दाग देहलवी का यह मशहूर शेर सब को याद आने लगेगा-'अब हम भी जानेवाले हैं, सामान तो गया'!
वैसे शाह जी गए तो बचा क्या? सामान तो गया। फकीर का झोला तो सफ़र पे गया। अब ये अलग बात है कि ज्ञानेश कुमार के लिए फाइट देते-देते ही ये इतने थक जाएं कि इसी में इनके प्राण स्वाहा हो जाएं और ये अमित शाह के लिए फाइट न दे पाएं! सरेंडर कर जाएं! नरेन्दर सरेंडर हो जाए!
फिर तो पक्का है कि साहेब का नंबर है मगर अभी से मत डरो साहेब। कांपो मत आज से, अभी तो मौसम और भी बिगड़ेगा। हो सकता है इस सबमें एक साल निकल जाए। खुशफहमी में रहने के लिए फिलहाल मान लो कि आप अभी एक साल तक इस पद पर हो। वर्स्ट कम वर्स्ट छह महीने रहोगे मगर पॉज़िटिव रहोगे तो बने रहोगे वरना जल्दी चले जाओगे। बी पॉजिटिव। शुभ- शुभ सोचो।
आज मैं आपकी पॉजिटिविज्म की क्लास लेकर ही छोड़ूंगा। अच्छा चलो एक साल नहीं, छह महीने रहोगे और मान लो कि दो महीने बाद ही आपकी विदाई हो गई तो भी चिंता क्या? भूतपूर्व होने के बाद मनमोहन सिंह दस साल से अधिक समय तक जिंदा रहे। देवगौड़ा साहब तो प्रधानमंत्री रहने के तीस साल बाद भी 93 वर्ष की उम्र में आपकी सरकार को समर्थन देने का महान कार्य संपन्न कर रहे हैं। विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, इंद्रकुमार गुजराल आदि का भी पद चला गया मगर इस वजह से तो उनका हार्टफेल नहीं हुआ तो आप भी सेफली मान सकते हो कि आपका पद चला गया तो भी आपका हार्ट फेल नहीं होगा। तो फिर समस्या क्या है? अरे जब आप 97 की उम्र तक प्रधानमंत्री बने रहने का प्लान बना चुके हो, तो फिर डरते क्यों हो? वीर तुम बढ़े चलो। आग में जलते चलो!
आपकी यह बात सही है कि आपका केस बहुत कॉम्प्लिकेटेड है। पद पर न रहने के बाद हो सकता है कि आपकी स्थिति ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो या उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो की तरह हो जाए! अगर ऐसी स्थिति आई तो आपके सारे चम्मच, गिलास और कटोरियां किसी काम नहीं आएंगी। उन्हें अपनी फिक्र होगी कि हमारा क्या होगा अब कालिये मगर अंबानी नहीं तो अडानी को तो आपकी मदद के लिए आना चाहिए न, जिसे आपने पूरा देश सौंप रखा है कि जा जो चाहे, जहां चाहे, जेब में रख ले। सब अपना ही माल समझ। एक रुपया दे और ले जा! आपने इतना दिया, इतना दिया उसे कि बताते हैं कि कोई एक लाख रुपए रोज भी कमाए और उसमें से एक पैसा खर्च न करे तो भी उसे अडानी बनने में एक लाख सतहत्तर हजार साल लगेंगे, मतलब अगली एक हजार पीढ़ियों तक वह अडानी नहीं बन पाएगा!
आपने उसके लिए जंगल के जंगल कटवाए। पानी लुटवाया। हवा बदबूदार बनवाई। किसानों, आदिवासियों को उजाड़ा। उनके विरोध की परवाह नहीं की। उन्हें कुचल दिया, मसल दिया, निगल लिया। उसे हवाई अड्डे, बंदरगाह, सड़क और क्या-क्या नहीं दिया और उससे आपके रिश्तों पर डाक्यूमेंट्री बनी तो उसे भी आपने प्रतिबंधित करवा दिया। लोग तो अब कहने लगे हैं कि सरकार साहेब चला रहे हैं या अडानी! प्रधानमंत्री का नाम क्या अब गौतम अडानी है?
तो भगवान से प्रार्थना करो कि अंत में वह आपको बचाने आए। उसके सामने अगर अपनी संपत्ति और साहेब में से किसी एक को बचाने का विकल्प होगा तो साहेब वह अपनी संपत्ति के लिए आपकी बलि खुशी-खुशी दे देगा। वह बड़ा बनिया है। वह आपके जब तक अच्छे दिन रहेंगे, तब तक आपका साथ रहेगा! आपको निचोड़कर कहेगा, तू कौन?
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