विचार

विष्णु नागर का व्यंग्यः राममंदिर मामले में 'कड़ी' कार्रवाई तय, बस ED-CBI बीच में नहीं आएगी, न कहीं बुलडोजर चलेगा

कार्रवाई तो कड़ी से कड़ी ही होगी! बस उसमें बड़ा से बड़ा कोई नहीं फंसेगा और उसमें छोटा से छोटा बल्कि उससे भी छोटा फंसेगा। चांस इसके ज्यादा‌ हैं कि कोई नहीं फंसेगा, उल्टे आरोप लगाने वाले फंस जाएंगे क्योंकि मामला राममंदिर का है, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हैं!

राममंदिर मामले में 'कड़ी' कार्रवाई तय, बस ED-CBI बीच में नहीं आएगी, न कहीं बुलडोजर चलेगा
राममंदिर मामले में 'कड़ी' कार्रवाई तय, बस ED-CBI बीच में नहीं आएगी, न कहीं बुलडोजर चलेगा फोटोः सोशल मीडिया

इस देश में 'कड़ी कार्रवाई 'का बड़ा चक्कर है। जब देखो, तब कड़ी कार्रवाई होने लगती है।कभी भी सीधी-सिंपल कार्रवाई नहीं होती! कुछ भी ऐसा या वैसा हुआ- और ऊपरवाले की किरपा से लगभग हर रोज़ होता रहता है- तो फौरन 'कड़ी कार्रवाई' होना शुरू हो जाती है। राम मंदिर में 200 करोड़ की डकैती हुई तो इस मामले में भी 'कड़ी कार्रवाई' ही होगी। जैसा कि चलन है, आदित्यनाथ जी ने भी कह दिया है कि कोई कितने ही बड़े पद पर हो, दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

कोई आश्चर्य नहीं कि कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी हो जाए, बल्कि कड़ी से कड़ी से कड़ी कार्रवाई होने की आशंकाएं हैं क्योंकि मामला उत्तर प्रदेश का है, उसमें भी अयोध्या का है और अयोध्या में भी राम मंदिर का है और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हैं, जो कड़ी से कम कार्रवाई करते नहीं बल्कि अकसर कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर डालते हैं बल्कि कभी-कभी तो कड़ी से भी कड़ी और उससे भी कड़ी कार्रवाई करके ही मानते हैं मगर लोगों को इसका पता उनके भारी-भरकम बयानों से चलता है! यही उनकी मुख्य विशेषता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश चल रहा है वरना कभी का बैठ चुका होता!

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राममंदिर मामले में कड़ी से कड़ी और उससे भी कड़ी कार्रवाई हुई तो भी ईडी-सीबीआई बीच मे नहीं आएगी और न उसे आने दिया जाएगा। कहीं बुलडोजर नहीं चलेगा, किसी का फुल या हाफ एनकाउंटर नहीं होगा। सब शांतिपूर्वक होगा लेकिन कार्रवाई तो साहब, कड़ी से कड़ी ही होगी! बस उसमें बड़ा से बड़ा कोई नहीं फंसेगा और यह कहने की बात नहीं कि उसमें छोटा से छोटा बल्कि उससे भी छोटा फंसेगा। चांस इसके ज्यादा‌ हैं कि कोई नहीं फंसेगा, उल्टे आरोप लगाने वाले फंस जाएंगे क्योंकि मामला राममंदिर का है, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हैं और चुनाव बहुत दूर नहीं हैं!

उन्हें मंदिर में की गई यह डकैती अभी से अफवाह लगने लगी है, भक्तों की भावनाएं आहत करने की कोशिश लगने लगी है, अयोध्या को बदनाम करने की साजिश लगने लगी है तो आप समझ लीजिए एसआईटी  बेचारी क्या करेगी? मुख्यमंत्री जी की भावनाओं का सम्मान करके जयश्री राम करते हुए बैठ जाएगी! उधर प्रधानमंत्री के खासमखास नृपेंद्र मिश्र इसे डकैती और विश्वासघात बता रहे हैं। मतलब दिल्ली और लखनऊ में अंदर ही अंदर रस्साकशी चल रही है।

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दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है, चिंता न करें, नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इंडिगो की लापरवाही के कारण हजारों हवाई यात्री परेशान हुए, कड़ी कार्रवाई होगी। खाद की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। नकली दवाई सप्लाई करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। गैंगस्टर को अपना आइकन मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। स्कूल के कमरे गिर गए, बच्चे मर गए, चिंता न करें, कड़ी कार्रवाई होगी। मंदिर जाते या आते समय या प्रवचन के बाद लोग मारे गए, कड़ी कार्रवाई होगी। अस्पताल में लापरवाही से लोग मर गए, कड़ी कार्रवाई होगी। मतलब सब कड़ी कार्रवाई के पीछे पड़ गए हैं!

पहले वाले भी कड़ी कार्रवाई करते थे। ये भी यही करते हैं और आगे आने वाले भी मेरा दृढ़ मत है कि यही करेंगे क्योंकि इस देश में  कड़ी कार्रवाई करने की परंपरा 'भगवान श्री राम' के समय से चली आ रही है। यहां कार्रवाई चूंकि कड़ी होती है, इसीलिए यहां रामराज्य स्थापित हो चुका है और  हिन्दू राष्ट्र स्थापित होने वाला है! डंका बजाने वाले को जब भी विदेश यात्राओं से लंबी फुर्सत मिलेगी, डंका बज जाएगा!

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आजादी के बाद से आज तक कम से कम पांच करोड़ बार हिंदुस्तान के हर कोने में हर मामले में कड़ी कार्रवाई हो चुकी है और अभी भी जारी है, इसलिए यह आंकड़ा जल्दी ही बढ़कर छह करोड़ तक जा सकता है। आजकल चूंकि सरकार ने अपनी तरफ से बात करना बंद कर दिया है, अपनी ओर से बोलने का अधिकार सूत्रों को दे दिया है, इसलिए उन्होंने बताया है कि यह आंकड़ा सात करोड़ को छू सकता है। 2047 तक भारत को चूंकि विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री प्रतिबद्ध हैं, इसलिए इसे दस करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

वैसे सच यह है कि दोष हमारा है। मंत्री-मुख्यमंत्री-गृहमंत्री आदि दरअसल 'कड़ी' नहीं, 'कढ़ी' कार्रवाई की बात करते हैं। हमें चूंकि कार्रवाई के साथ 'कड़ी' सुनने की गंदी आदत पड़ चुकी है, इसलिए हम 'कढ़ी'  को भी 'कड़ी' सुनते और पढ़ते हैं। टीवी और अखबार वाले भी 'कड़ी' और 'कढ़ी' में अंतर करना नहीं जानते, वे भी 'कढ़ी' को 'कड़ी' कह या लिख देते हैं। विनम्रता में मंत्रीगण भी इसका खंडन नहीं करते!

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और जब 'कड़ी' की जगह 'कढ़ी' कार्रवाई होती है तो हम सरकार और प्रशासन की  निंदा करने लगते हैं। सरकार इसे भी सहन कर लेती है। सरकार दरअसल आजकल बहुत सहनशील हो चुकी है! इस समाज में मज़ाक़ समझने की तमीज अब  रही नहीं! वैसे 'कढ़ी' भी हर प्रदेश, हर क्षेत्र बल्कि हर घर की अलग होती है। उसमें तीन ही चीजें कामन होती हैं- छाछ, बेसन और नमक! उसी तरह कढ़ी कार्रवाई में सब जगह कढ़ी शब्द ही कामन होता है, सबमें बेसन, छाछ और नमक और पानी का अनुपात अलग होता है। कढ़ी से कढ़ी और उससे भी कढ़ी कार्रवाई का अर्थ है कोई कार्रवाई नहीं! इस गूढ़ार्थ को लोग समझते नहीं और पें-पें, चें-चें करने लगते हैं!

तो इस देश में कढ़ी कार्रवाई होती रहती है। कभी-कभी कड़ी कार्रवाई भी हो जाती है लेकिन उसके लिए दोषी का 'बाबर की औलाद' होना जरूरी है, 'मुल्ला' होना आवश्यक है। हिंदू खतरे में है, इसलिए उन्हें 'टाइट' करना समय की आवश्यकता है पर हमें इससे घबराना नहीं है क्योंकि हमें प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 2047 में विकसित भारत बनाने का सपना पूरा करना है!

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