
डोनाल्ड ट्रंप जी को धमकी देने के अलावा कोई काम नहीं आता! सुबह- शाम तक जनाब धमकी ही देते रहते हैं। अमेरिका के और भी राष्ट्रपति हुए हैं, बहुत से बहुत ज़ालिम भी हुए हैं, हर जगह टांग फंसाकर टांग तुड़वानेवाले भी हुए हैं मगर शायद कोई इतना हास्यास्पद नहीं हुआ है ! ये तो जालिम भी हैं और हास्यास्पद भी! ईरान के कीचड़ में इन्होंने टांग फंसा ली है और अब समझ में नहीं आ रहा है कि उसे निकालें कैसे!
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ये फितूरी आदमी पता नहीं अपने आपको क्या समझता है, इसीलिए दिनों-दिन इसके हाल बुरे से बुरे होते जा रहे हैं। इंसान की तरह तो यह बात ही नहीं करता, गली- मोहल्ले के दादाओं वाला इसका हाल है! ऐसे दादा तो भारत की गली- गली में भरे पड़े हैं बल्कि पिछले बारह साल में जब से भारत का ' विकास' ' विश्वगुरु ' के रूप में हुआ है, तब से तो इनकी बाढ़ आ गई है। शहर- गांव सब उसमें डूब चुके हैं। ऐसा ही राष्ट्रपति चाहिए था तो अमेरिकियों, हमारे यहां से सौ- पचास मंगवा लेते और उनमें से किसी एक को अपना राष्ट्रपति बना लेते, बाकी को इधर-उधर एडजस्ट कर देते! हमारे यहां काले और सांवले ही नहीं, गोरे रंग के भी दादा भी खूब पाये जाते हैं! फर्क यह है कि वे हिंदी बोलते हैं मगर इससे क्या फर्क पड़ता है!धमकी ही तो देना है! किसी भी भाषा में दो, उसके अनुवाद की जरूरत नहीं पड़ती!
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ट्रंप जी को यह समझ में नहीं आता कि वह गली के गुंडे नहीं ,दुनिया के एक बड़े देश के राष्ट्रपति हैं! वह समझते हैं कि सारी दुनिया उनकी मुट्ठी में है। वह जिसके साथ जैसा चाहेंगे, सलूक करेंगे और दुनिया की कोई ताकत उन्हें रोक नहीं पाएगी! वेनेजुएला के प्रयोग के बाद यह मुगालता इन भैयाजी को कुछ ज्यादा ही हो गया था कि जिस देश के पास पेट्रोल और गैस होगी, उसके राष्ट्रपति - प्रधानमंत्री को या तो उठवा लेंगे या मरवा देंगे और फिर उस पर राज करेंगे।उसका तेल बेचकर अमीर और अमीर हो जाएंगे।
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इसी भ्रम में ये भैयाजी ईरान के लपेटे में आ गए और अब अपनी रही- सही इज्जत बचाने के लिए हाथ पैर -मार रहे हैं! ईरान ने इनकी और इनके परम दोस्त इस्राइल की ऐसी गत बना दी है कि शीशे में ये दोनों अपनी सूरत तक पहचान नहीं पा रहे हैं! ऊपर से अकड़ रहे हैं मगर अंदर से बुरी तरह हिले हुए हैं।रोज ट्रंप को झूठ बोलना पड़ता है कि ईरान हमसे समझौता करना चाहता है और रोज ईरान को इससे इनकार करना पड़ता है।यह ट्रंप जी के पिलपिले होने का प्रधान लक्षण है।अभी तो ये और पिलपिलाएंगे और ईरान को और टेढ़ा होने का मौका देंगे! ईरान जीते, न जीते, इनकी मूंछ तो उखाड़ कर इनके हाथ में दे ही देगा!ं
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इसी भ्रम में ये भैयाजी ईरान के लपेटे में आ गए और अब अपनी रही- सही इज्जत बचाने के लिए हाथ पैर -मार रहे हैं! ईरान ने इनकी और इनके परम दोस्त इस्राइल की ऐसी गत बना दी है कि शीशे में ये दोनों अपनी सूरत तक पहचान नहीं पा रहे हैं! ऊपर से अकड़ रहे हैं मगर अंदर से बुरी तरह हिले हुए हैं।रोज ट्रंप को झूठ बोलना पड़ता है कि ईरान हमसे समझौता करना चाहता है और रोज ईरान को इससे इनकार करना पड़ता है।यह ट्रंप जी के पिलपिले होने का प्रधान लक्षण है।अभी तो ये और पिलपिलाएंगे और ईरान को और टेढ़ा होने का मौका देंगे! ईरान जीते, न जीते, इनकी मूंछ तो उखाड़ कर इनके हाथ में दे ही देगा!
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इस तरह की फालतू की अकड़ से कोई देश न कभी महान बना है, न कभी बन सकता है। हमें ही देख लो, हम पिछले बारह साल से 'विश्वगुरु ' बने पड़े हैं मगर कोई पूछ ही नहीं रहा!कोई प्रणाम तक करने को तैयार नहीं!एक भी देश को हम आज तक अपना चेला नहीं बना पाए हैं मगर फिर भी हम' विश्व गुरु' हैं!खुद ही खुद के गुरु हैं और खुद ही खुद के चेला हैं!यहां तक कि कोई चिलम भरनेवाला तक आसपास नहीं है!
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यही हाल ट्रंप जी का है।ये महाशय जी आए थे अमेरिका को फिर से महान( मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) बनाने मगर उसे पिद्दी बनाकर जाएंगे। कुछ समय बाद लोग पूछेंगे कि अच्छा कभी यही देश था- दुनिया की महाशक्ति?इसी के डालर का कभी जलवा हुआ करता था!यह तो ग्रेट बनने वाला था मगर यह तो मैट पर आ चुका है!कहां फुस हो गई इसकी ग्रेटनेस?
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आजकल यह हालत हो गई है कि हमारे प्रधानमंत्री के'माई डियर फ्रेंड ' की कि इनके मुंह से इधर एक शब्द निकलता है, उधर दुनिया भर में हंसी का फव्वारा छूटने लगता है। ट्रंप जी ईरान को डराते हैं कि संभल जा वरना मैं तुझे पूरी तरह निगल जाऊंगा ,पाषाण युग में पहुंचा दूंगा, उधर दुनिया इनकी अक्ल पर तरस खाती है कि कैसा है ये राष्ट्रपति है,जब देखो, तब सड़क के गुंडे की तरह बात करता है। उधर युद्ध में आज भी जिसका हाथ ऊपर है, उस ईरान का राष्ट्रपति ठंडे दिमाग से अमेरिका के नागरिकों से कहता है कि देखो, हमारी दुश्मनी आपसे नहीं है। अमेरिका को टकराव का रास्ता बहुत महंगा पड़ेगा, यह ट्रंप को समझा दीजिए! आनेवाली पीढ़ियों के लिए सहयोग का रास्ता ही सही है। ईरान जानता है कि ट्रंप को यह भाषा समझ में नहीं आती मगर अमेरिकी और दुनिया की युद्ध विरोधी जनता को यह बात समझ में आने लगी है। अमेरिका में भी जगह- जगह युद्ध विरोधी बड़े -बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। उधर ट्रंप को समझाने के लिए ईरान के सेनाध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी सेना ने हमारी ज़मीन पर एक कदम भी रखा तो लाशें बिछ जाएंगी!
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अब तो सारी दुनिया मान रही है कि ईरान ने ट्रंप की हवा पूरी तरह निकाल दी है। उसके चारों पहिए पंचर कर दिये हैं।कार अपनी जगह से हिल नहीं रही है मगर ट्रंप हार्न पर हार्न बजा रहा है कि भाई मुझे रास्ता दो, मुझे ईरान को बर्बाद करना है!
हमारे वाले का 'माई डियर फ्रेंड ' कहता है ईरान से कि समझौता मेरी शर्तों पर होगा, ईरान इस पर हंसता है।वह कहता है कि अभी तो जनाब हमने अपने आधुनिक हथियार इस्तेमाल ही नहीं किए हैं, सावधान ! फिर मत कहना कि हमने पहले बताया नहीं था!
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ट्रंप जी की महती कृपा से अमेरिका का दबदबा घट रहा है। अमेरिका के दोस्त भी उसका साथ छोड़ रहे हैं। अधिकतर नाटो देशों ने उसका साथ देने से कभी इतनी सख़्ती से इनकार नहीं किया, जितना अब कर रहे हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन,नार्वे आदि अपनी ज़मीन, अपना आकाश ईरान के विरुद्ध इस्तेमाल नहीं करने दे रहे हैं। ट्रंप, नाटो देशों को डरपोक कह रहा है तो कोई उसे इसका जवाब देने लायक भी नहीं समझता! ट्रंप कहता है कि यूरोपीय देश हमारा साथ नहीं देंगे तो हम नाटो से हट जाएंगे, नाटो के बड़े देश कह रहे हैं कि ठीक है, हट जाओ। हमें अब नाटो-फाटो की जरूरत नहीं ,हम अपनी सुरक्षा खुद कर लेंगे! उधर खाड़ी के देशों से न उगलते बन रहा है ,न निगलते! सब समझ गए हैं कि ट्रंप
को केवल बड़ी- बड़ी डींगें हांकना आता है और कुछ नहीं। अभी एक दिन उसने अमेरिकी नागरिकों के सामने डींग हांकी कि हमें ईरान से जंग में जीत चुके हैं। हमने लक्ष्य हासिल कर लिया है।हमने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता और नौसेना को नेस्तनाबूद कर दिया है मगर इतना 'ताकतवर ' अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करने का खयाल छोड़ दिया है। ट्रंप कह रहा है कि हमें इससे कोई मतलब नहीं। जिनका काम धंधा इससे रुक रहा है, वे जानें! अब वह यह भी कह रहा है कि हम युद्ध का खर्च खाड़ी के मुल्कों से वसूलेंगे! पिटा हुआ आदमी इसी ढंग से बातें करता है!
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ट्रंप के दिमाग का दिवाला पिट चुका है कि एक दिन वह कुछ कहता है, दूसरे दिन कुछ और।एक दिन कहता है कि दो तीन सप्ताह में युद्ध खत्म हो जाएगा। अगले दिन कहता है कि पता नहीं यह कब खत्म होगा। एक दिन वह कहता है कि ईरान है क्या चीज़, उसे तो हम यूं ही मसल देंगे, उससे बातचीत करने की कोई जरूरत नहीं, फिर दूसरे दिन कहता है कि समय आ गया है कि मैं समझौता करूं।
वैसे अमेरिका को अपनी बेइज्जती करवाने का शौक काफी पुराना है। उसने दुनिया में अपनी बेइज्जती कई जगह खुद आगे बढ़कर करवाई है। वियतनाम के छापामार लड़ाकों से 19 साल लड़ने के बाद उसे भागना पड़ा। क्यूबा की क्रांति को असफल बनाने और राष्ट्रपति फिदेल कास्रो का मारने की उसकी तमाम कोशिशों पिट गईं। अब फिर से ट्रंप ने क्यूबा पर कब्ज़ा करने का इरादा जताया है मगर ईरान ने उसे इतना उलझा दिया है कि अभी उसे डर लग रहा है कि कहीं क्यूबा में भी ईरान न हो जाए!
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कल तक ये ही ट्रंप जी, कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते थे मगर अब इनकी बोलती बंद है।कल तक ये ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को उतावले थे, अब इनकी जुबान बंद है।
ट्रंप जी, ईरान को अब भूल जाओ! अमेरिकी जनता तुम्हारे खिलाफ है।वह युद्ध नहीं चाहती।दुनिया में यह संदेश भी चला गया है कि अमेरिका अपनी नहीं, इस्राइल की लड़ाई लड़ रहा है और अपने को बर्बाद होने दे रहा है! ट्रंप जी, संभल जाओ, जाग जाओ!
बचाओ रे कोई तो बेचारे इस ट्रंप को अपनी बेइज्जती करने से बचाओ। कोई तो इसे समझाओ, हमारे वाला तो बेचारा उसे क्या समझा पाएगा! उससे तो ट्रंप टेलीफोन पर एक बार बात कर लेता है तो वो चार दिन गदगद रहता है!
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