
बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद मुंबई के महापौर पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मंगलवार को दावा किया कि बीजेपी अपने और शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षदों के फोन टैप करा रही है। राउत ने कहा कि बीजेपी के पार्षदों पर उसी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा नजर रखी जा रही है।
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मुंबई के महापौर पद के लिए दौड़ तेज होने और शिवसेना के रुख को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संंजय राउत ने दावा किया कि मुंबई के महापौर का फैसला दिल्ली से किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र का अपमान है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “बीजेपी कार्यकर्ता पार्टी के हर पार्षद की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। बीजेपी अपने ही पार्षदों के फोन भी टैप कर रही है।" उन्होंने कहा कि एक आलीशान होटल में "बंद" शिवसेना पार्षदों के फोन भी टैप किए जा रहे हैं।
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हालांकि, बीजेपी ने राउत के आरोपों को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि पार्टी इस तरह की गतिविधियों में शामिल नहीं होती क्योंकि उसे अपने पार्षदों पर भरोसा है। महाराष्ट्र बीजेपी के मीडिया प्रभारी नवनाथ बान ने राउत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमें फोन टैपिंग की जरूरत नहीं है, लेकिन राउत को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी के सत्ता में रहने के दौरान एकनाथ शिंदे और उदय सामंत के फोन कौन टैप कर रहा था। हमें पार्षदों का पूरा समर्थन प्राप्त है और हम ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं।”
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हाल में हुए चुनावों में, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने देश के सबसे धनी नगर निकाय पर ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक लंबे एकाधिकार को समाप्त कर दिया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। बीजेपी को 89 और शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 64 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
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इसके बाद शिवसेना ने अपने सभी 29 नवनिर्वाचित सदस्यों को मुंबई के एक आलीशान होटल में पहुंचा दिया और इसका कारण नगर निकाय के कामकाज पर एक कार्यशाला आयोजित करना बताया। एकनाथ शिंदे लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि मुंबई का अगला महापौर महायुति (बीजेपी-शिवसेना गठबंधन) का होगा। हालांकि, उन्होंने शिवसेना की ओर से भी इस पद पर दावे का संकेत दिया और इसे बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उनके प्रति सम्मान का प्रतीक बताया, साथ ही शिवसैनिकों की भावनाओं का हवाला भी दिया। इन तमाम हलचलों के बीच संजय राउत के दावे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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