
रविवार को एक वेबसाइट ने सवाल उठाया कि आखिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की मिल्कियत वाली कंपनी ने रहस्यमय ढंग से 16000 गुना टर्नओवर बढ़ने के बावजूद अपना कारोबार बंद क्यों कर दिया? इस कंपनी का टर्नओवर महज 50000 हजार रुपए से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपए कैसे हो गया?
लेकिन सबसे रोचक तो यह है कि जय शाह की 60 फीसदी हिस्सेदारी वाली एक और कंपनी कुसुम फिनसर्व को 10.35 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार की मिनी रत्न कंपनी इंडियन रिन्यूएबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी यानी आईआरईडीए से मिला। इस कंपनी को जब यह कर्ज मंजूर किया गया था, उस समय पीयूष गोयल बिजली मंत्री थे।
पीयूष गोयल को देश के सामने इस बात का जवाब देना होगा कि एक ऐसी कंपनी जो शेयर बाजार और कमोडिटी में कारोबार करती थी, उसे आईआरईडीए के अपने नियमों की अनदेखी करते हुए आखिर यह कर्ज कैसे दे दिया गया? नियमों की अनदेखी की पुष्टि उन दस्तावेजों से होती है जो इस कर्ज के सिलसिले में नेशनल हेराल्ड और नवजीवन के पास मौजूद हैं।
आईआरईडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध नियमों के अनुसार, यह एजेंसी सिर्फ उन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकती है, जो सिर्फ एक मेगावाट तक के हों, लेकिन जय शाह की कंपनी ने जिस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव जमा कराया था, उसमें मध्यप्रदेश के रतलाम में 2.1 मेगावाट के प्रोजेक्ट की बात कही गयी है।
इतना ही नहीं आईआरईडीए की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट से स्पष्ट है कि किसी भी कंपनी को प्रोजेक्ट की कुल लागत का सिर्फ 70 फीसदी तक ही कर्ज दिया जा सकता है। ऐसे में कुसुम फिनसर्व के विंडपॉवर प्रोजेक्ट की लागत 15 करोड़ थी, इसलिए 70 फीसदी कर्ज के तौर पर 10.35 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए गए।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर 2.1 मेगावाट के प्रोजेक्ट की लागत 15 करोड़ है, तो नियमों के अनुसार 1 मेगावाट के प्रोजेक्ट की लागत करीब 7 करोड़ हुई। और अगर हिसाब लगाएं तो इस लागत का 70 फीसदी सिर्फ 4.9 करोड़ होता है, लेकिन आईआरईडीए ने जय शाह की कंपनी को 10.35 करोड़ रुपए का कर्ज मंजूर कर दिया।
वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में जय शाह के वकील के बयान का हवाला दिया है कि, “आईआरईडीए से जो कर्ज लिया गया है, वह 2.1 मेगावाट के विंड एनर्जी प्लांट के लिए जरूरी उपकरणों की कर्ज लेते समय कीमत के हिसाब से लिया गया है, और उस समय उपकरणों की कीमत उद्योग के मानकों के अनुसार करीब 14.35 करोड़ थी, और इस कर्ज को नियमानुसार जांच परख के बाद कारोबार के नियमों के मुताबिक लिया गया।” जय शाह के वकील ने यह भी बताया कि 30 जून 2017 को इस कर्ज का 8.52 करोड़ बकाया था और ब्याज सहित किस्तों का भुगतान समय पर हो रहा है।
तो इसका क्या यह अर्थ निकाला जाए कि जब रिपोर्टर अपनी खबर के बारे में इस वकील से बात कर रहा था तो क्या वह जानबूझकर रिपोर्टर को गुमराह कर रहे थे या फिर उन्हें आईआरईडीए के नियमों की जानकारी ही नहीं है?
एक रोचक बात और है। और वह यह कि जब अमित शाह के बेटे पर आरोप लगा तो सफाई देने के लिए कोई और नहीं मोदी सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल ने ही प्रेस कांफ्रेंस कर एक ‘आम नागरिक’ को बचाने की कोशिश की। क्या इस पूरी कवायद में कोई आपसी रिश्ता है, क्योंकि जब जय शाह को नियमों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए आईआरईडीए ने कर्ज मंजूर किया तो पीयूष गोयल न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के मंत्री थे। ऐसे में कोई भी पीयूष गोयल से सफाई मांगेगा कि आखिर जब आप मंत्री थे तो नियमों का उल्लंघन करते हुए आपने जय शाह की कंपनी को कर्ज कैसे मंजूर कर दिया?
रविवार को इससे पहले खबर यह आई कि जय अमित शाह की कंपनी टेम्पल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का 2014-15 में कुल राजस्व 50000 रुपए और मुनाफा महज 18728 रुपए था। लेकिन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ में जमा अपनी रिटर्न में इस कंपनी ने अगले ही साल यानी 2015-16 में कंपनी का राजस्व 80.5 करोड़ बताया है। और इस टर्नओवर को उत्पादों की बिक्री से होना बताया है।
यह वही साल था, जिस साल कंपनी ने केआईएफएस फायनेंशियल सर्विसेस से 15.78 करोड़ रुपए का अन-सिक्योर्ड कर्ज लिया था। केआईएफएस निर्दलीय राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के बड़े अधिकारी परिमल नाथवानी के समधी राजेश खंडेलवाल की कंपनी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि केआईएफएस फायनेंशियल सर्विसेस ने अपनी फाइलिंग में जय अमित शाह की कंपनी को दिए गए कर्ज का जिक्र किया ही नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है जिस साल केआईएफएस ने जय अमित शाह की कंपनी को कर्ज दिया, उस साल उसका अपना टर्नओवर ही कुल 7 करोड़ था, ऐसे में उसने जय अमित शाह की कंपनी को 15 करोड़ का कर्ज कैसे दे दिया।
यह भी गौर करने की बात है कि इस साल जुलाई में बीजेपी को मजबूर होकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोत्तरी को स्वीकारना पड़ा था। चुनाव आयोग में जमा अमित शाह के शपथपत्र में उनकी संपत्ति 19 करोड़ रुपए की बताई गई, जबकि 2012 में उन्होंने महज 1.90 करोड़ रुपए की संपत्ति का ही खुलासा किया था।
इसी तरह अमित शाह की अचल संपत्ति भी इन पांच वर्षों में 6.63 करोड़ से बढ़कर 15 करोड़ रुपए हो गयी। बीजेपी ने इसी साल जुलाई में यानी 2017 की जुलाई में बताया कि 2013 में अमित शाह की मां की मृत्यु के बाद उन्हें विरासत में संपत्ति मिली है।
लेकिन, अमित शाह के बेटे की कंपनी के टर्नओवर में रातों-रात बढ़ोत्तरी और फिर अचानक इस कंपनी के बंद होने से अमित शाह और उनके बेटे पर उंगलियां उठने लगी हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि यह तो उन तमाम कंपनियों में से एक है, जिनका पता लोगों को नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक जांच से ही पता चल सकता है कि क्यों इस कंपनी को बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे या कोई और गारंटी दिए ही करोड़ो रुपए का कर्ज दिया गया।”
रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि हर किसी को मालूम है कि सीबीआई और ईडी किन कंपनियों की जांच करती है और किन कंपनियों को छोड़ दिया जाता है। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले की जांच कराने की चुनौती दी।
इस बीच खबरें हैं कि जय अमित शाह के वकील मानिक डोगरा ने मीडिया को धमकी दी है कि अगर उनके खिलाफ खबरें दिखाई गईं या प्रकाशित की गईं, तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे।
यह पूरा विवाद और खुलासा बीजेपी के लिए बहुत ही बुरे समय पर हुआ है। गुजरात में विधानसभा चुनाव महज दो महीने दूर हैं और अर्थव्यवस्था के संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बैकफुट पर हैं। ऐसे में इस नए विवाद के सामने आने से उनकी अपनी साख पर गहरा बट्टा लगा है।
यह खबर और विवाद सामने आने के बाद रविवार को दिन भर ट्विटर पर #AmitShahKiLoot ट्रेंड करता रहा। इस हैशटैग के साथ किए गए कुछ दिलचस्प ट्वीट्स ऐसे थे:
एक ने लिखा, बीजेपी ने विकास की जय के नारे को बदलकर ‘जय का विकास’ कर दिया है। इसमें कोई खास फर्क नहीं है, अब हमें पता है विकास कहां छिपा है #AmitShahKiLoot
किसी और ने लिखा केआईएफएस फायनेंशियल सर्विसेस का कुल राजस्व 7 करोड़ था, लेकिन उसने जय शाह की कंपनी को 15 करोड़ दे दिए
सोशल मीडिया पर पिटाई के बाद रविवार दोपहर को बीजेपी आईटी सेल भी मैदान में कूदी। अपने अध्यक्ष के बेटे के बचाव में बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने इन आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि हर कारोबार जीरो टर्नओवर से शुरु होता है। लेकिन वे भूल गए कि यह कंपनी तो 2004 में बनी थी, और 2013-14 तक नुकसान ही दिखाती रही थी। सिर्फ 2015 में इसने मोटा कर्ज लिया, मोटा मुनाफा कमाया और कंपनी को बंद कर दिया। मालवीय के कुछ ट्वीट यहां दिए जा रहे हैं:
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Published: 08 Oct 2017, 10:41 PM IST