
फीफा विश्व कप में पहली बार कदम रखने वाली केप वर्डे ने अपना शानदार सफर जारी रखते हुए नॉकआउट दौर में जगह बना ली है। केप वर्दे ने सऊदी अरब के खिलाफ ड्रॉ खेला और इस तरह से विश्व कप फुटबॉल के नॉकआउट राउंड में पहुंचने वाला सबसे छोटा देश बन गया। केप वर्दे ने ग्रुप एच में अपने तीनों मैच ड्रॉ कराए जिससे वह स्पेन के बाद दूसरे स्थान पर रहकर आगे बढ़ने में सफल रहा। इस ग्रुप में उरुग्वे और सऊदी अरब दो-दो अंक ही हासिल कर पाए और वह टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
इतिहास रचने के इरादे से मैदान पर उतरे केप वर्डे के कोच बुबिस्टा ने अपनी शुरुआती टीम में आधे से ज्यादा बदलाव किए थे, जिनमें से कुछ बदलाव मजबूरी में करने पड़े थे। हालांकि, उन्होंने अपने स्टार और हीरो गोलकीपर वोजिन्हा पर भरोसा बनाए रखा था। सऊदी अरब के खिलाफ केप वर्डे को गोल करने के कई मौके मिले थे, लेकिन टीम इन मौकों को भुना नहीं सकी।
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अफ्रीका के पश्चिमी तट पर बसे केप वर्डे के इस सपने को सच करने में उनके 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा की भूमिका सबसे अहम रही। उन्होंने अपने पहले ही विश्व कप मैच में अकेले दम पर टीम की दीवार बनकर यूरोपीय चैंपियन स्पेन को ड्रॉ पर रोककर एक ऐतिहासिक अंक दिलाया था। इसके बाद, केप वर्डे ने दो बार की पूर्व चैंपियन उरुग्वे के खिलाफ भी शानदार खेल दिखाते हुए 2-2 से ड्रॉ खेला था। इसी जुझारू प्रदर्शन की बदौलत केप वर्डे सऊदी अरब के खिलाफ मैच से पहले नॉकआउट की रेस में मजबूती से खड़ा था और अंततः उन्होंने ड्रॉ खेलकर नॉकआउट में पहुंचने का सपना पूरा किया।
पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में उन्होंने मोहम्मद कन्नो के हेडर को रोककर सऊदी अरब को बढ़त हासिल नहीं करने दी। इसके बाद 66वें मिनट में उन्होंने मोहम्मद अबू अल-शमत के शॉट को भी शानदार तरीके से रोका। उन्होंने दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में अब्दुल्ला अल-हमदान के शॉट को भी गोल में जाने से रोका।
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अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित छोटा द्वीपीय राष्ट्र केप वर्दे फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर पहली बार खेल रहा है। उसने अपने पहले मैच में 2010 के चैंपियन स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका था और फिर उरुग्वे के खिलाफ पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए मैच 2-2 से बराबर किया था। केप वर्दे के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। वह ‘राउंड ऑफ 32’ में तीन जुलाई को मियामी में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना का सामना करेगा।
विश्व कप में तीनों ग्रुप मैचों में ड्रॉ होने से अगले दौर में पहुंचने की गारंटी नहीं मिलती। लेकिन अतीत में कई टीमों ने ऐसा किया है, जिनमें 1958 में वेल्स, 1990 में आयरलैंड और नीदरलैंड तथा 1998 में चिली शामिल हैं। न्यूजीलैंड ने भी 2010 विश्व कप में तीनों मैच ड्रॉ खेले थे लेकिन वह टूर्नामेंट से बाहर हो गया था।
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