ऑस्ट्रेलिया ने गुलाबी गेंद टेस्ट में अपना दबदबा जारी रखते हुए रविवार को भारत पर 10 विकेट की शानदार जीत दर्ज के साथ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला को 1-1 से बराबर कर ली। ऑस्ट्रेलिया ने महज सात सत्र के अंदर जीत दर्ज की जो गेंदों के हिसाब से भारत के खिलाफ उसका सबसे छोटा टेस्ट मैच है। इस जीत से ऑस्ट्रेलिया ने दिन-रात्रि टेस्ट में अपना दबदबा कायम रखा।
टीम इंडिया ने दिन की शुरुआत पांच विकेट पर 128 रन से करते हुए पहले ओवर में ही ऋषभ पंत (28) का विकेट गंवा दिया। नीतीश कुमार रेड्डी (42) के पहली पारी की तरह दूसरी पारी में शानदार जज्बा दिखकर टीम का स्कोर 175 रन पहुंचा। उनकी बल्लेबाजी से भारत पारी की हार टालने में सफल रहा।
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ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद जीत के लिए 19 रन के लक्ष्य को हासिल करने की औपचारिकता सिर्फ 3.2 ओवर में पूरी कर यादगार जीत दर्ज की।
भारत की दूसरी पारी केवल 36.5 ओवर तक चली। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान कप्तान पैट कमिंस ने शॉर्ट बॉल का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हुए 57 रन देकर पांच विकेट लिए। स्कॉट बोलैंड (51 रन पर तीन विकेट) ने पारी की शुरुआती में विकेट झटके जबकि मिशेल स्टार्क (60 रन पर दो विकेट) ने महत्वपूर्ण विकेट चटकाए।
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ऑस्ट्रेलिया के तीन प्रमुख तेज गेंदबाजों का दबदबा ऐसा था कि कमिंस को दूसरी पारी में मिशेल मार्श और नाथन लियोन की भी जरूरत नहीं पड़ी। टीम के विशेषज्ञ स्पिनर और हरफनमौला ने पूरे मैच में केवल पांच ओवर फेंके।
पर्थ में 295 रन की आसान जीत के बाद भारतीय बल्लेबाजी इकाई इस मैच की दोनों पारियों को मिलाकर कुल 81 ओवर भी नहीं खेल पायी। टेस्ट मैच में एक दिन में आधिकारिक तौर पर 90 ओवर गेंदबाजी करने का प्रावधान है। ऐसे में भारत अपनी दोनों पारी को मिलाकर एक दिन भी नहीं टिक पाया।
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भारत को इस मैच की दोनों पारियों में सबसे ज्यादा निराशा अनुभवी विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा की बल्लेबाजी से हुई। यह दोनों बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों का सामना करने में विफल रहे। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह ने पूरा प्रयास किया लेकिन उन्हें दूसरे छोर से अच्छा साथ नहीं मिला।
दिन के पहले ओवर में भी गुलाबी गेंद के बेताज बादशाह माने जाने वाले स्टार्क ने ऑफ स्टंप की बाहर वाली गेंद पर पंत को चकमा दिया और गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर दूसरे स्लिप में खड़े स्टीव स्मिथ के हाथों में चली गयी। स्टार्क के नाम दिन-रात्रि टेस्ट में सबसे ज्यादा 74 विकेट हैं।
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रेड्डी ने एक बार फिर तकनीक और आक्रमण का अच्छा मिश्रण दिखाया। पंत के आउट होने के बाद उन्होंने कुछ बड़े शॉट खेलकर टीम को पारी की हार से बचा लिया।
शुरुआती दो टेस्ट मैच में रेड्डी भारत के सबसे अच्छे बल्लेबाजों में से एक के तौर पर उभरे हैं। वह करियर की शुरुआती चार पारियों में अच्छी शुरुआत को अर्धशतक में बदलने में नाकाम रहे लेकिन उन्होंने 41, 37 नाबाद, 42 और 42 रन स्कोर के साथ प्रभावित किया। वह अगर गेंदबाजी में थोड़ी गति हासिल कर सुधार कर सकें तो टीम के लिए तेज गेंदबाजी हरफमौला की कमी को पूरा कर सकते हैं।
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रविचंद्रन अश्विन ने कमिंस की बाउंसर पर एक ही गलती लगातार तीन बार दोहराई। शुरुआती दो बार वह बच गए लेकिन तीसरी बार गेंद उनके ग्लव्स को छूकर विकेटकीपर के दस्ताने में चली गई। कमिंस ने एक और शॉट गेंद पर हर्षित राणा को खाता खोले बगैर चलता किया।
स्टार्क ने इसके बाद रेड्डी तो वही बोलैंड ने मोहम्मद सिराज को आउट कर भारतीय पारी को खत्म किया।
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