
जंतर-मंतर से उठी जवाबदेही की मांग अब छोटे जिलों और कस्बों तक पहुंचती दिख रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित दूसरे राज्यों में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे सड़कों पर हैं। स्कूल में शिक्षक क्यों नहीं हैं? पीने का पानी, टॉयलेट, बिजली, बेंच-डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों की गूंज से सत्ता-प्रशासन हलकान हैं। क्या यह सिर्फ सुविधाओं की मांग है या फिर भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के गहरे संकट का सबूत? क्या ये बच्चे सिर्फ अपने लिए लड़ रहे हैं या नागरिक चेतना की एक नई आवाज हैं? इन्हीं सवालों पर नवजीवन ने प्रसिद्ध शिक्षाविद् और दिल्ली विश्वविद्यालय में फैकल्टी ऑफ एजुकेशन की पूर्व डीन, प्रोफेसर अनीता रामपाल से बात की