
देश के कई बड़े शहरों में अब कैब सर्च करना एक मुश्किल काम हो गया है। इसके पीछे की वजह ओला और उबर के बेड़े में कैब की घटती संख्या के साथ साथ ड्राइवरों को ना के बराबर मिलने वाला इंसेंटिव औक कमीशन में बढ़ोतरी माना जा रहा है। कई कैब ड्राइवरों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में किराए के कमीशन में 20-30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
कई बार ट्रिप एक्सेप्ट होने के बाद कैंसिल होने के पीछे ओला और उबर द्वारा ऐप में किए गया एक महत्वपूर्ण बदलाव भी है। इसमें ड्राइवर अब राइड रिक्वेस्ट आने पर डेस्टिनेशन और पेमेंट के तरीके को देख सकते हैं। ड्राइवर बताते हैं कि अब तय कर सकते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है? ड्राइवरों की प्राथमिकता अब लॉन्ग ट्रिप्स होती है।
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