
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के आदेशानुसार सोमवार को पाकिस्तान ने भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस दिया। इस दौरान भारत की और से डिप्टी हाई कमिश्नर गौरव अहलुवालिया ने जाधव से मुलाकात की। पिछले कई सालों से पाकिस्तान की जेल में कैद जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मिलने के बाद उन्हें इस केस में बड़ी राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या होता है कॉन्सुलर एक्सेस और किस तरह से यह कुलभूषण के लिए फायदेमंद साबित होगा।
दरसल 1963 वियना कन्वेंशन के तहत इस नियम को लागू किया गया था। इसके मुताबिक अगर एक देश में किसी दूसरे देश का कोई शख्स कैद है तो उसके देश के राजनयिक या अधिकारियों को उससे मिलने की इजाजत दी जाती है। ICJ ने जुलाई में पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वो जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मुहैया कराए। इसी वजह से सोमवार को भारतीय उच्चायोग के अधिकारी उनसे मुलाकात कर पाए। वियना कन्वेंशन को 170 से ज्यादा देश मानते हैं।
कॉन्सुलर एक्सेस दिए जाने के बाद भारतीय उच्चायोग के अधिकारी पाकिस्तान में कैद जाधव से मिलकर उनका हालचाल पूछ सकते हैं। इसके जरिए इस बात का भी पता लगता रहता है कि पाकिस्तान की जेल में उनके साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है। इसके अलावा उनके साथ कोई हिंसक घटना या किसी तरह का मानसिक या शारीरिक टॉर्चर तो नहीं किया गया है। कॉन्सुलर एक्सेस मिलने के बाद कैदी के केस को जानने और समझने में आसानी हो जाती है। कॉन्सुलर एक्सेस मिलने के बाद जाधव के केस में उनका पक्ष रखते हुए उन बातों पर चर्चा हो सकती है, जो अब तक सामने नहीं आ पाई है।
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